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पीलीभीत वन विभाग के साथ सहयोग बढ़ाएगा डब्ल्यूडब्ल्यूएफ

पीलीभीत वन विभाग के साथ सहयोग बढ़ाएगा डब्ल्यूडब्ल्यूएफ

Jun 18, 2014

पीलीभीत : यहां के जंगलों को टाइगर रिजर्व घोषित किए जाने के बाद विश्व प्रकृति निधि ने भी वन विभाग को और अधिक संसाधन मुहैया कराने पर मंथन शुरू कर दिया है। विश्व प्रकृति निधि की मदद से अभी तक जंगल की पांच में से दो रेंज में ग्लोबल पोजीशनिंग सिस्टम (जीपीएस) से गश्त हो रही है लेकिन अब जल्द ही शेष तीन अन्य रेंजों में गश्त को प्रभावी बनाने के लिए जीपीएस प्रणाली मुहैया कराई जाएगी। इसके लिए संबंधित रेंजों के वन कर्मियों को संस्था के विशेषज्ञ प्रशिक्षण भी देंगे।  जिले में 71 हजार 228 हेक्टेयर में फैले जंगल के पांचों रेंजों में बाघ पाए जाते हैं। पीलीभीत टाइगर रिजर्व तो अब घोषित किया गया है लेकिन बाघों के संरक्षण के लिए विश्व प्रकृति निधि यहां पर वर्ष 2003 से ही कार्य कर रही है। इस दौरान संस्था की ओर से वन विभाग को लाखों रुपये के संसाधन मुहैया कराए जाते रहे हैं। पिछले साल वन विभाग को तीस जीपीएस उपलब्ध कराकर उनके माध्यम से जंगल में गश्त शुरू कराई गई थी। शेष तीन अन्य रेंजों में गश्त के लिए जीपीएस सेट जल्द ही मुहैया कराने की योजना बनाई गई है।

जीपीएस सेट प्रदान करने के साथ ही इन रेंजों में गश्त करने वाले वन कर्मियों को संस्था के विशेषज्ञ प्रशिक्षण भी देंगे। जिससे बाघों के संरक्षण के साथ ही वन अपराधों पर नियंत्रण पाया जा सके। वन विभाग को जरूरत के मुताबिक विभिन्न तरह के संसाधन मुहैया कराने के साथ ही विश्व प्रकृति निधि जंगल के आसपास बसे गांवों में रहने वालों की गरीबी दूर करने के लिए भी कार्यक्रम चलाए जाते रहे हैं। इस तरह के कार्यक्रम अब और अधिक तेजी से लागू किए जाने पर विचार चल रहा है।

पीलीभीत टाइगर रिजर्व घोषित होने के बाद अब वन विभाग को और अधिक संसाधन मुहैया कराए जाएंगे। साथ ही बाघों के संरक्षण के लिए वन कर्मियों को आवश्यक प्रशिक्षण भी दिलाया जाएगा। जंगल के पांचों रेंजों में प्रभावी गश्त के लिए जल्द ही आवश्यकतानुसार जीपीएस सेट प्रदान किए जाएंगे। इसके अलावा अन्य जरूरत का सामान भी मुहैया कराने के लिए योजना जल्द ही तैयार की जाएगी।

As posted in Jagran.com

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