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पीलीभीत में वन्य जीव गणना को डब्ल्यूडब्ल्यूएफ तैयार

-गणना कार्य के लिए दुधवा से बुलाई गई एक और टीम

– डीएफओ के लखनऊ से लौटते ही शुरू हो जाएगी गणना

पीलीभीत : जंगल में वन्य जीव गणना के द्वितीय चक्र के लिए विश्व प्रकृति निधि ने तैयारियां पूरी कर ली हैं। प्रभागीय वनाधिकारी के लखनऊ से लौटते ही कार्य शुरू हो जाएगा। जिले में 71 हजार 228 हेक्टेयर क्षेत्रफल में फैले प्राकृतिक जंगल में मांसाहारी एवं तृण भोजी दोनों तरह के वन्य जीव रहते हैं। राज्य सरकार की ओर से पीलीभीत के जंगलों को वन्य जीव विहार घोषित कर दिए जाने से इस गणना का महत्व काफी बढ़ गया है। दो साल पहले हुई गणना में जंगल की पांचों रेंजों में चालीस से अधिक बाघ होने की पुष्टि हुई थी। बाघों की सुरक्षा के लिए ही जंगल को टाइगर रिजर्व बनाने की पहल की गई। इस बार की गणना के बाद स्पष्ट हो जाएगा कि तृण भोजी वन्य जीवों के साथ ही इस अवधि में बाघों की संख्या कितनी बढ़ी अथवा घटी है। पिछले दो साल के दौरान जंगल से निकलकर आने वाली कई बाघिन, मादा तेंदुआ अपने शावकों के साथ घूमते देखे जाते रहे हैं।

ऐसे में बाघों की संख्या पहले की तुलना में बढ़ जाने की संभावना जताई जा रही है। विश्व प्रकृति निधि के परियोजना अधिकारी नरेश कुमार के अनुसार वन्य जीव गणना के लिए सभी तैयारियां पूरी कर ली गई हैं। एक टीम यहां तैयार है जबकि दूसरी टीम को भी दुधवा नेशनल पार्क से बुलाया गया है। प्रभागीय वनाधिकारी से बातचीत हो चुकी है। वह फिलहाल लखनऊ में हैं। उनके लौटते ही गणना कार्य शुरू करा दिया जाएगा। डीएफओ राजीव मिश्रा ने दूरभाष पर बताया कि वह विभागीय मीटिंग में शामिल होने लखनऊ पहुंचे हैं। जल्द ही वापस लौटकर वन्य जीव गणना शुरू कराएंगे।
As posted in Jagran.com

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