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पीलीभीत टाइगर रिज़र्व के आस-पास के पांच गांवो को डब्ल्यूडब्ल्यूएफ ने लिया गोद

पीलीभीत टाइगर रिज़र्व के आस-पास के पांच गांवो को डब्ल्यूडब्ल्यूएफ ने लिया गोद

Sep 10, 2014

पीलीभीत : विश्व प्रकृति निधि (डब्ल्यूडब्ल्यूएफ) की ओर से जिले में जंगल से सटे पांच गांवों को गोद लिया गया है। इन सभी गांवों के ग्रामीणों को योजना के प्रथम चरण में 25 फीसद छूट पर रसोई गैस कनेक्शन मुहैया कराए जाएंगे। जिससे उन्हें जलौनी लकड़ी के लिए जंगल में न घुसना पड़े। इन सभी गांवों के परिवारों को स्वरोजगार से जोड़ने के लिए विभिन्न व्यवसायों का प्रशिक्षण दिलाया जाएगा। साथ ही शासन की लाभार्थी परक योजनाओं से भी लाभान्वित कराया जाएगा। गांवों के बच्चों की अच्छी शिक्षा के लिए जागरुकता अभियान चलेगा। साथ ही स्वच्छ शौचालयों पर भी जोर दिया जाएगा। तराई के इस जिले में बाघों समेत दूसरे प्रकार के वन्य जीवों के संरक्षण, जैव विविधता को बचाने एवं जंगल पर ग्रामीणों का दबाव कम करने के लिए विश्व प्रकृति निधि लगभग एक दशक से कार्य कर रही है।

जंगल से सटे गांवों के लोगो का जीवन स्तर ऊंचा उठाने के साथ ही वन विभाग को इस दौरान लाखों रुपये के उपकरण, गाड़ियां, मोटर बोट आदि की सुविधा मुहैया कराई जा चुकी है। वन अपराध रोकने तथा जंगल की सुरक्षा से संबंधित प्रशिक्षण भी समय-समय पर वन कर्मियों को संस्था की ओर से दिलाया जाता रहा है। डब्ल्यूडब्ल्यूएफ की ओर से अब तक विभिन्न रेंजों में जंगल से सटे 15 गांवों में कार्यक्रम चलाकर वहां के ग्रामीणों को स्वरोजगार की तरफ उन्मुख किया जा चुका है। इन सभी गांवों के परिवारों में रसोई गैस कनेक्शन उपलब्ध कराए जा चुके हैं। ग्रामीणों को शहद उत्पादन, मशरूम की खेती, मेंथा आयल प्लांट लगाने से संबंधित तकनीकी एवं आर्थिक मदद दी जा चुकी है। अब संस्था की ओर से पांच अन्य गांवों को गोद ले लिया गया है। गोद लेने की कार्रवाई से पहले गांवों की सामाजिक, आर्थिक स्थिति का अध्ययन किया गया। इसकी रिपोर्ट बनाकर मुख्यालय भेजी गईं, वहीं से इन गांवों के लिए संस्तुति की गई।

इन गांवों को लिया गया गोद

नगरिया खुर्द कला, सेला, धुरिया पलिया, सिमरा ताल्लुका महाराजपुर एवं खिरकिया बरगदिया। ये सभी गांव जंगल से सटे हुए हैं। इन गांवों के वाशिंदे खेती एवं पशुपालन पर निर्भर हैं। भोजन पकाने के लिए जंगल से जलौनी लकड़ी पर ही आश्रित हैं।

विश्व प्रकृति निधि के प्रोजेक्ट अफसर नरेश कुमार के मुताबिक चयनित पांचों गांवों में सबसे पहले अभियान चलाकर पच्चीस फीसद छूट पर रसोई गैस कनेक्शन दिलाए जाएंगे। क्योंकि रसोई गैस कनेक्शन मिल जाने से इन गांवों के लोगों की जंगल पर निर्भरता कम होगी। इसके लिए चयनित गांवों के परिवारों से आवेदन मांगे गए हैं। रसोई गैस कनेक्शन वितरण के उपरांत स्वरोजगार के लिए ग्रामीणों की सहमति के आधार पर प्रोजेक्ट लागू कराए जाएंगे।

 

 

 

As posted in Jagran.com

 

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