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पीलीभीत टाइगर रिजर्व की सुरक्षा के दावों की खुल रही है पोल

पीलीभीत टाइगर रिजर्व की सुरक्षा के दावों की खुल रही है पोल

Jul 12, 2015

पीलीभीत। एक ओर वनमहोत्सव सप्ताह के तहत जंगल में पौधरोपण कर हरियाली बढ़ाने का काम किया जा रहा है। वन्यजीवों की सुरक्षा के लिए तमाम सख्त कदम उठाए जाने के दावे किए जा रहे है। पर कहीं न कहीं विभाग की ओर से जंगल की सुरक्षा में चूक हो रही है। माला रेंज से लकड़ी का कटान सामने आ रहा है, तो वहीं कटरूए भी खुलकर बाजार में बेचे जा रहे है। अब सवाल है कि जब पर्यटकों के लिए भी जंगल नबंबर माह तक बंद है। इसके बावजूद आसानी से कटरूए और लकड़ी लेकर ट्रेन के रास्ते पीलीभीत लाकर किस तरह बेची जा रही है। इसके पीछे विभागीय लापरवाही है या फिर मिलीभगत इसको सवाल उठ रहे है। टाइगर रिजर्व का दर्जा पाकर एक साल पूरा कर चुके  पीलीभीत के जंगल में एक बार फिर सुरक्षा के लिहाज से लापरवाही देखने को मिली है।

Image courtesy – Alok chandra saxena

– जंगल में लकड़ी का कटान जारी, कटरूए भी आ रहे बाहर
– विभागीय चूक या फिर मिलीभगत, उठ रहे सवाल
– नबंबर माह तक पर्यटकों के लिए भी बंद है जंगल

हाल ही में वनमहोत्सव सप्ताह मनाकर जंगल को हरा-भरा करने की मुहिम चलाइ गई। इसमें अस्सी हजार पौध लगाने के लक्ष्य के साथ विभागीय अधिकारी एवं राजनेता आगे भी आए। जंगल के अंदर पौधरोपण कर ग्रामीणों को भी जागरूक किया गया। वहीं दूसरी ओर माला रेलवे स्टेशन पर आए दिन सामने आ रहे दृष्य ने विभाग के दावों को सवालों के घेरे में खड़ा कर दिया है।

Image courtesy – Alok chandra saxena

माला रेलवे स्टेशन पर जंगल से लकड़ी काटकर आने वाले तमाम लोग देखे जा रहे है। जो जंगल की हरियाली नष्ट करके ट्रेन में लादकर पीलीभीत आते है और यहां आकर लकड़ी को बेचा जाता है। साथ ही जंगल के अंदर पाए जाने वाले कटरूए, जिसका इस्तेमाल सब्जी के तौर पर किया जाता है। इसकी भी लगातार भारी संख्या में मंडी रेलवे स्टेशन पीलीभीत के बाहर लग रही है। इनको पांच सौ रूपए प्रति किलोग्राम के हिसाब से बेचा जा रहा है। अब सवाल यह है कि जब जंगल पर्यटकों के लिए बंद है। विभागीय टीमें सुरक्षा एवं निगरानी में लगी हुई है। फिर लकड़ी का कटान और कटरूए बाहर कैसे आ रहे है। कही न कहीं विभाग की ओर से बरती जा रही लापरवाही इसके लिए जिम्मेदार है। पूरे मामले में विभाग की ओर से किए जा रहे दावों पर प्रश्नचिन्ह लग रहा है। हालांकि वन विभाग के अधिकारी लगातार निगरानी की बात कर रहे है। साथ ही जंगल में सख्ती बढ़ाए जाने के दावे कर दामन बचाने में जुटे हुए है।

 

-मुख्य संवाददाता वैभव शुक्ला की रिपोर्ट

 

(News inputs & Image courtesy – Alok chandra saxena)

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