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पीलीभीत टाइगर रिज़र्व में बगैर ट्रेनिंग के दो वनकर्मी कर रहे नौकरी

पीलीभीत टाइगर रिज़र्व में बगैर ट्रेनिंग के दो वनकर्मी कर रहे नौकरी

May 3, 2015

पीलीभीत : पीलीभीत टाइगर रिजर्व में बगैर ट्रेनिंग लिए दो वन कर्मचारी सालों से नौकरी करने का मामला प्रकाश में आया है। इस तरफ वन विभाग ने कोई कार्रवाई नहीं की है। अमूमन सरकारी नौकरी मिलने के बाद पद के अनुसार कर्मचारी को प्रशिक्षित किया जाता है, जिससे वह अपने पद की जिम्मेदारियों को बेहतर ढंग से निवर्हन कर सके। जानकारी अपडेट रखने के लिए समय-समय पर कर्मचारियों को मुख्यालय से बाहर ट्रेनिंग के लिए भेजा जाता है। मगर पीलीभीत टाइगर रिजर्व में नया खुलासा सामने आया है। टाइगर रिजर्व के दो वनरक्षक पराग ऋषि और प्रमोद कुमार करीब पंद्रह सालों से तैनात है, लेकिन अभी तक किसी प्रकार की कोई ट्रेनिंग आदि नहीं ली है। पराग ऋषि माला रेंज में ड्यूटी दे रहा है। अगर दोनों वन कर्मचारियों ने ट्रेनिंग नहीं ली है, तो वन्यजीवों की रक्षा कैसे हो सकेगी। इतना समय बीतने के बावजूद किसी भी अफसर ने ट्रेनिंग आदि के बारे में पता ही नहीं किया। ऐसे ही सब चलता रहा। टाइगर रिजर्व के डीएफओ कैलाश प्रकाश का कहना है कि दोनों वन कर्मचारी कार्यरत है। एक माला रेंज व दूसरा कर्मचारी मुख्यालय पर काम कर रहा है। फिलहाल ट्रेनिंग लेने के बारे में जानकारी नहीं है। इस मामले में पता किया जाएगा।

ट्रेनिंग लेने से कुछ लाभ

-वन कर्मचारी को छह माह की ट्रेनिंग दी जाती है

-ट्रेनिंग मेरठ के हस्तिनापुर और कानपुर में होती है

-ट्रेनिंग पाने के बाद अपने पद के लिए उपयुक्त होते हैं

-वन्यजीवों की रक्षा करने के उपायों की जानकारी हो जाती है

-ट्रेनिंग के बाद वन कर्मचारी आग्नेयास्त्र चला सकते हैं।

ट्रेनिंग न लेने से नुकसान

-ट्रेनिंग न लेने से कर्मचारी अनट्रेंड कहलाए जाएंगे

-फारेस्ट कानून के बारे में कोई जानकारी नहीं होगी

-वन्यजीव संरक्षण एक्ट में कार्रवाई का ज्ञान नहीं होगा

-गलत ढंग से कार्रवाई का हमेशा डर बना रहता है

-वन विभाग के तकनीकी नामों की जानकारी नहीं होगी।

 

 

 

As posted in Jagran.com

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