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सुविधा मिले तो विदेशियों की सैरगाह बनेगा पीलीभीत टाइगर रिजर्व

सुविधा मिले तो विदेशियों की सैरगाह बनेगा पीलीभीत टाइगर रिजर्व

Nov 22, 2015

पीलीभीत के जंगल तो बाघों की बेतहाशा संख्या के चलते आजादी से पूर्व ही पूरे यूरोप में प्रसिद्ध थे। अब टाइगर रिजर्व बन जाने के बाद यदि यहां दुधवा पार्क की तरह संसाधन और सहुलियत दे दी जाएं तो पीलीभीत का टाइगर रिजर्व दुधवा पार्क को भी पछाड़ सकता है।
जनपद में पूर्व जमींदार शिकारी के रूप में खासी पहचान रखते थे। शेरपुर के बाला खान, मंगल खां व माधोटांडा के कुंवर भारत सिंह का नाम आज भी लोग बतौर एक शिकारी के रूप में जानते हैं। 1870 ईसवी में मल्लिका ए विक्टोरिया के बड़े पुत्र प्रिंस ऑफ वेल्स, उनके बाद लार्ड म्यूज्जल सेलेमन और 1896 ईसवीं में भारत के कमांडर इन चीफ लार्ड कैचेज यहां आए थे। लार्ड कैचेज ने 14 दिन के कैंप में 23 शेर व चार गुलदारों का शिकार किया था। कर्नल सेलेमन ने अपनी पुस्तक फ्राम राइफल टू कैमरा मेें यहां के शेरों की संख्या और शिकार का उल्लेख किया है।

लगातार बढ़ी बाघों की संख्या

दुधवा पार्क की तरह पहले यहां कभी बाघों की संख्या शिकार की छूट के बावजूद बेतहाशा थी। शिकार पर प्रतिबंध लगने के बाद संसाधनों की कमी के चलते एक समय ऐसा आया जब जनपद में बाघों में की संख्या मात्र दस रह गई। वहीं 2015 में लेजर कैमरों की गणना से 44 बाघों का आंकड़ा सामने आया।

सहुलियतें न होने से कतराते हैं विदेशी सैलानी

जनपद के जंगलों के जंगल टाइगर रिजर्व घोषित होने के बाद से ही यहां लगातार संसाधनों की संख्या घटती जा रही है। मात्र डब्ल्यूडब्ल्यूएफ ही सुविधाएं देता रहा है। यदि दुधवा पार्क की तरह यहां सुरक्षा संर्वधन व पर्यटकों के घूमने को सफारी आदि की व्यवस्था हो जाए, तो यहां के जंगल दुधवा नेशनल पार्क को पछाड़ सकते हैं। मात्र सहुलियतें न होने से ही विदेशी सैलानी यहां आने से कतराते हैं।

मायूसी ही लग रही है हाथ

पिछले दो दिनों में चूका बीच आने वाले सैलानियों को मायूसी ही हाथ लग रही है। चूका बीच में बनी हटों को नजारा उन्हें सिर्फ बाहर से ही देखने को मिल पा रहा है। उम्मीद थी कि इस बार दरों में कमी होगी, लेकिन ऐसा नहीं हुआ।

संसाधनों की कमी को अफसरों ने भी माना

चूका बीच के उद्घाटन के दौरान डीएफओ कैलाश प्रकाश ने संसाधनों की कमी की बात कही थी, वहीं डब्ल्यूडब्ल्यूएफ के परियोजना अधिकारी नरेश कुमार ने भी कहा था कि यदि संसाधन मिल जाए तो हम दुधवा पार्क को आसानी से पछाड़ने में सफल हो सकते हैं।

 

 

 

 

As posted in Amarujala.com

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