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पीलीभीत टाइगर रिज़र्व में हुई बाघ की मौत पर खामोशी अख्तियार किए है वन्यजीव बोर्ड

पीलीभीत टाइगर रिज़र्व में हुई बाघ की मौत पर खामोशी अख्तियार किए है वन्यजीव बोर्ड

May 4, 2015

पीलीभीत : पीलीभीत टाइगर रिजर्व की बराही रेंज में मरे बाघ मामले में राज्य वन्यजीव बोर्ड खामोशी अख्तियार किए हुए हैं। बोर्ड अपनी जिम्मेदारी को बखूबी निवर्हन नहीं कर पा रहा है। घटना के एक सप्ताह बाद भी कोई जांच टीम भेजने की जहमत नहीं उठाई गई। ऐसे में चंद वन कर्मचारियों के सहारे लुप्तप्राय बाघों को बचाने की कोशिश की जा रही है। वर्तमान समय में पीलीभीत टाइगर रिजर्व मुसीबतों में उलझा हुआ है। चार साल पहले बाघों के मामले में पीलीभीत खास संख्या रखता था, लेकिन वर्ष 2014 की गणना में बाघों की संख्या 28 रह गई। इस मामले की शासन से शिकायत की गई। इसके बाद टाइगर रिजर्व में गणना का कार्य दुबारा कराने के आदेश हुए। इस समय गणना कार्य चल रहा है। वन्यजीव संरक्षण के लिए राज्य वन्यजीव बोर्ड गठन है, जिसमें कई विशेषज्ञ शामिल हैं। बोर्ड पर वन्यजीव संरक्षण और संवर्धन करने की जिम्मेदारी है। मगर बोर्ड अपनी जिम्मेदारी पर खरा नहीं उतर पा रहा है। पीलीभीत टाइगर रिजर्व में 23 अप्रैल को बराही रेंज की हरदोई ब्रांच नहर में पांच साल के बाघ का शव बरामद किया गया था। इस घटना के बाद वन्यजीव बोर्ड ने टाइगर रिजर्व से किसी प्रकार का कोई संपर्क करना उचित नहीं समझा। बाघ की मौत को एक सप्ताह से अधिक का समय हो गया है, लेकिन वन्यजीव बोर्ड से कोई भी टीम जांच के लिए नहीं पहुंची है। ऐसे में वन्यजीव बोर्ड की खामोशी ही कही जाएगी। घटना के बाद सिर्फ रुहेलखंड जोन के मुख्य वन संरक्षक एमपी सिंह व प्रभारी वन संरक्षक धर्म सिंह ने घटनास्थल का जायजा लिया था।

बाघ की मौत के बाद नहीं भेजी गई कोई टीम

वन्यजीव संरक्षण का बोर्ड पर है जिम्मेदारी

राज्य वन्यजीव बोर्ड के सदस्य और विधायक सुनील भार्गव के मुताबिक पीलीभीत टाइगर रिजर्व में बाघ मरने की घटना की जानकारी लगी है। इस मामले की पूरी रिपोर्ट जिला प्रशासन से तलब की जाएगी। बाघ क मौत किन हालातों में हुई। अब तक क्या प्रगति हुई है। वहां की रिपोर्ट मिलने के बाद ही अगला कदम उठाया जाएगा। वन्यजीव संरक्षण की दिशा में वन्यजीव बोर्ड लगातार काम कर रहा है। वन्य जीवों की सुरक्षा से कोई समझौता नहीं होगा। संरक्षण की दिशा में हरसंभव मदद की जाएगी।

 

 

As posted in Jagran.com

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