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जीव विज्ञानी का आदेश जिनजिन की जान पर पड़ा भारी

जीव विज्ञानी का आदेश जिनजिन की जान पर पड़ा भारी

Apr 30, 2014

राष्ट्रीय प्राणी उद्यान यानी दिल्ली के चिड़ियाघर में शुक्रवार देर शाम मारी गई बाघिन जिनजिन के मामले में बड़ी लापरवाही उजागर हुई है। जीव विज्ञानी डॉक्टर यदि समझदारी से काम लेते तो बाघिन (बंगाल टाइगर) की जान नहीं जाती। सूत्रों का कहना है कि जीव विज्ञानी बंगाल टाइगर रामा व जिनजिनको रात भर के लिए एक साथ छोड़ने के निर्देश देकर स्वयं घर चले गए। इसके दो घंटे बाद ही बाघ ने बाघिन पर हमला कर उसे मार डाला।

दिल्ली के चिडि़याघर में बंगाल टाइगर कुनबे में एक भी बाघ नहीं था। बंगाल टाइगर का कुनबा बढ़ाने के लिए एनीमल एक्सचेंज प्रोग्राम के तहत 30 मार्च को मैसूर चिड़ियाघर के रामा (3) व एक अन्य तीन माह का बाघ लाया गया था। चिड़ियाघर मे अभी तक केवल तीन ही बाघिन थीं। जिसमें प्रिया (15) रानी (12) व जिंगजिंग (6) शामिल थीं। शुक्रवार को उपयुक्त समय और माहौल बनने की सूचना बाड़ा नंबर पांच के कर्मचारियों ने चिडि़याघर के डॉक्टर पन्नीर सिल्वम को दी। जिस पर डॉ. सिल्वम ने चिडि़याघर के निदेशक से अनुमति लेकर दोपहर साढ़े तीन बजे बाड़ा परिसर में जिनजिन व रामा को मिलवाने के लिए छुड़वाया। साढ़े चार बजे जीव विज्ञानी डॉ. मनोज कुमार व चिड़ियाघर के डॉक्टर इंजार्च पन्नीर सिल्वम के बीच इस बात को लेकर विचार विमर्श हुआ कि इन्हें बाड़े में रात भर के लिए एक साथ छोड़ा जाए या नहीं।

क्योंकि अभी तक बाघ बाघिन एक दूसरे के निकट नहीं आए थे। डॉक्टर मनोज ने कहा कि दोनों में दोस्ताना माहौल लग रहा है इसलिए इन्हें रात भर के लिए बाड़े में छोड़ दिया जाए। हालांकि उस समय बाघों की देखरेख करने वाले कर्मचारियों ने भी कहा कि ऐसा ठीक नहीं रहेगा। रात भर का समय बहुत लंबा है। मगर डॉ.मनोज के निर्देश पर दोनों को रात भर के लिए छोड़ा गया। डॉक्टर के निर्देश पर बाड़ा में रात भर के लिए एक कर्मचारी की ड्यूटी लगाई गई। अभी शाम के साढ़े पांच बजे थे कि बाड़ा परिसर में शांत बैठी जिंगजिंग पर पीछे से अचानक बाघ रामा ने हमला कर दिया। रामा ने जिनजिन की गर्दन पकड़ ली और उसके ऊपर बैठ गया। इस दौरान जिनजिन छटपटाती रही। अकेला कर्मचारी बाड़े के बाहर से शोर मचाता रहा और ईट पत्थर बाड़ा के अंदर फेंकता रहा। मगर बाघ ने जिंगजिंग की गर्दन उस समय तक नहीं छोड़ी जब तक वह मर नहीं गई।

इस बारे में चिड़ियाघर के उप संरक्षक रियाज खान ने कहा कि मामले की जांच की जा रही है। यदि इस मामले में किसी की लापरवाही उजागर हुई है तो उसके खिलाफ कार्रवाई होगी।

भावुक हो गया कर्मचारी

खतरनाक पशुओं से भी कर्मचारियों को काफी लगाव हो जाता है। शनिवार को जिनजिन के बारे में बताते हुए इस बाड़े की देखरेख करने वाला कर्मचारी भावुक हो गया। उसने कहा कि हम सभी को जिनजिन के मरने का दुख है। वह अन्य बाघों की तरह व्यवहार नहीं करती थी।

जिंगजिंग की मौत से उठे सवाल

-बाघ बाघिन को एक साथ रात भर छोड़ने का फैसला कैसे ले लिया गया?

-रात भर के लिए केवल एक कर्मचारी की ड्यूटी क्यों लगाई गई?

-बाघ बाघिन के झगड़ने पर उन्हें बचाने के लिए क्या उपाय किए गए?

 

As posted in Jagran.com

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