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किसानों के लिए मित्र साबित हो रहा बाघ

किसानों के लिए मित्र साबित हो रहा बाघ

Jan 20, 2014

महीनों से जंगल के बाहर घूम रहा एक बाघ क्षेत्र के किसानों का मित्र साबित हो रहा है। जहां बाघ ने अपना डेरा जमा रखा है, उस क्षेत्र में किसानों के खेतों में खड़ी फसलें जंगली जानवरों से पूरी तरह महफूज हैं। बाघ किसानों की फसलों की हिफाजत कर रहा है। पिछले दिनों एक मादा बाघ का मुरादाबाद एवं बिजनौर जिलों में काफी आतंक रहा। उस बाध को अंतत: आदमखोर घोषित कर करना पड़ा लेकिन यहां जंगल से निकलकर अमरिया क्षेत्र में घूम रहा एक बाघ किसानों का मित्र साबित हो रहा है। इस क्षेत्र के शुक्ला फार्म के निकट देवहा नदी की तलहटी में नरकुल की झाड़ियों में बाघ ने अपना बसेरा बना रखा है। यह बाघ पिछले कई महीनों से इसी क्षेत्र में घूम रहा है परंतु उसने अभी तक किसी मानव अथवा पालतू पशुओं पर हमला नहीं किया। शुरू में तो किसान काफी दहशत में रहे। मजदूरों ने तो खेतों में काम करना बंद कर दिया था लेकिन फिर धीरे-धीरे बाघ की मौजूदगी को किसानों ने सामान्य मान लिया। बाघ की निगरानी करने वाली विश्व प्रकृति निधि एवं सामाजिक वानिकी टीम के सदस्यों से किसानों ने बताया कि पहले नीलगाय, जंगली सुअर, पाड़ा, चीतल आदि उनके खेतों में घुसकर फसलों को नुकसान पहुंचाते थे। अब बाघ की मौजूदगी की वजह से जंगली जानवर खेतों में नहीं घुसते। इससे उनकी फसलें महफूज हैं। सामाजिक वानिकी के प्रभागीय निदेशक रामेश्वर राय एवं विश्व प्रकृति निधि के प्रोजेक्ट अफसर नरेश कुमार का कहना है कि अमरिया क्षेत्र के शुक्ला फार्म के आसपास काफी दिनों से घूम रहे इस बाघ ने अभी तक किसी को कोई नुकसान नहीं पहुंचाया है।

As posted in Jagran.com

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