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बाघ की मौत पर बवाल: पीसीसीएफ व एनटीसीए को भेजी गई रिपोर्ट

बाघ की मौत पर बवाल: पीसीसीएफ व एनटीसीए को भेजी गई रिपोर्ट

Apr 24, 2015

पीलीभीत : पीलीभीत टाइगर रिजर्व की बराही रेंज में मृत बाघ के शव की रिपोर्ट प्रमुख वन संरक्षक व नेशनल टाइगर कंजरवेशन अथारिटी आफ इंडिया नई दिल्ली को भेज दी गई है। बाघ की मौत से टाइगर रिजर्व प्रशासन सन्न है। बराही रेंज में डगा-माधोटांडा मार्ग के समीप प्रवाहित हो रही हरदोई ब्रांच नहर की झाल में एक बाघ का शव गुरुवार को सुबह बरामद किया गया। उसके शरीर पर एकाध निशान को छोड़कर सभी अंग सुरक्षित थे। जिला मुख्यालय पर डीएफओ की अध्यक्षता में बनी कमेटी ने बाघ के शव का निरीक्षण किया था। इसके बाद बाघ के शव को पोस्टमार्टम कराने के लिए आईवीआरआई बरेली भेज दिया गया। बाघ की मौत पर टाइगर रिजर्व प्रशासन सन्न रह गया है। टाइगर रिजर्व के प्रभागीय वनाधिकारी कैलाश प्रकाश ने बताया कि बाघ की मौत की विस्तृत रिपोर्ट बनाकर प्रदेश के प्रमुख वन संरक्षक डॉ.रूपक डे व नेशनल टाइगर कंजरवेशन अथारिटी आफ इंडिया के सदस्य सचिव को भेज दी गई है। घटनास्थल के आसपास जंगल में निगरानी कड़ी कर दी गई है। स्टाफ को डे-नाइट पेट्रोलिंग तेज करने के निर्देश दिए गए हैं। वह खुद भी जंगल का निरीक्षण कर रहे हैं। अगर बगैर परमीशन कोई घूमता हुआ पाया जाएगा, तो उसके खिलाफ वन्यजीव संरक्षण अधिनियम में कार्रवाई की जाएगी।

मेनका ने बाघ की मौत पर जताई चिंता

स्थानीय सांसद व केंद्रीय महिला एवं बाल विकास मंत्री मेनका गांधी ने पीलीभीत टाइगर रिजर्व के जंगल में एक और बाघ की मौत को काफी चिंताजनक माना। उन्होंने कहा कि बाघों की हो रही मौत से साफ है कि जंगल में सुरक्षा के प्रति लापरवाही बरती जा रही है। श्रीमती गांधी ने टेलीफोन पर वन विभाग के उच्चाधिकारियों से बातचीत कर पूरे मामले की गहराई से जांच कराने को कहा। उन्होंने कहा कि जंगल में शिकारियों का दखल रुक नहीं रहा है। कहीं न कहीं गंभीर लापरवाही हो रही है। इसकी जांच करने के साथ ही सुरक्षा के पूरे प्रबंध किए जाएं। बाघों को बचाना बहुत जरूरी है। क्योंकि पीलीभीत के जंगल और बाघ यहां की पहचान हैं। सेव इन्वायरंमेंट वेलफेयर सोसाइटी के सचिन टीएच खान के मुताबिक रिजर्व जंगल में कई सालों से बाघ की मौत हो रही है। यह विस्तृत जांच का विषय है। टाइगर रिजर्व प्रशासन को फोरेंसिक एक्सपर्ट की टीम बुलाकर जांच करानी चाहिए, तभी सच्चाई सामने आ सकेगी। इसी तरह बाघों की सुरक्षा के लिए टाइगर प्रोटेक्शन फोर्स तैनात किए जाने की जरूरत है, तभी जंगल के प्रत्येक क्षेत्र की हरकतों पर पैनी निगाह रखी जा सकेगी। इस संबंध में समिति कई बार लिखकर दे चुकी है।

 

 

As posted in Jagran.com

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