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देश में तो बढ़े लेकिन यूपी में घटते गए बाघ, पीलीभीत में भी बढ़ा संकट

देश में तो बढ़े लेकिन यूपी में घटते गए बाघ, पीलीभीत में भी बढ़ा संकट

Jul 28, 2015

देश में तो बाघ की संख्या बढ़ रही है, लेकिन यूपी में इनकी संख्या घट गई है। 2010 में देश में 1706 बाघ थे, जो 2014 में 2226 हो गए। यूपी में 2010 में 278 बाघ थे, जो घटकर 2014 में 118 रह गए। पीलीभीत टाइगर रिजर्व में 2010 में 38 बाघ थे जो वर्ष 2014 की गणना में 28 हो गए। दुधवा में 2010 की गणना में बाघों की संख्या 30 थी, जो अब 20 हो गई है।

2001-284

2003-283

2005-273

2010-117

2014-118

नदियों की कटान से मुसीबत : दुधवा में नेपाल से आने वाली मोहना नदी के कटान और पीलीभीत में शारदा नहर के कटान से जंगल के बड़े हिस्से में वन कर्मियों का जाना मुश्किल है। इसकी वजह से शिकारियों ने अपना ठिकाना बना लिया है। पीलीभीत टाइगर रिजर्व में बाघ, तेंदुआ और जंगली बिल्ली के साथ ही 325 प्रजातियों पर संकट है।

निगरानी तंत्र है कमजोर : पीलीभीत टाइगर रिजर्व में फॉरेस्ट गार्ड के 60 पद हैं लेकिन तैनात केवल 30 हैं। दुधवा के निदेशक संजय सिंह भी मानते हैं कि उनके यहां कर्मचारियों की कमी है।

वन विभाग की भी मिली भगत : पीलीभीत में 23 अप्रैल 2015 को शारदा में बाघ का शव मिला। अफसरों ने मौत का कारण फेफड़े में पानी भर जाना बताया। दुधवा में मई में शिकारियों का जाल मिला। मामला यह कहकर दबाने की कोशिश की गई कि वहां कर्मचारी काम कर रहे थे जो अपना जाल भूल गए। 2011 और 2013 में बिजनौर के जंगल में तस्करों से बाघ की खालें मिलीं। उन्होंने ने दुधवा के अंदर शिकारियों के सक्रिय होने की बात कही। फरवरी 2015 में नेपाल पुलिस ने दो भारतीयों को पकड़ा जिनके पास बाघ की खाल बरामद हुई थी। वन विभाग के कर्मचारियों के नाम भी सामने आए, लेकिन ऐक्शन नहीं लिया गया।

जहर देकर मार देते हैं बाघ : पीलीभीत के जंगल में बसने वाले गद्दी जाति के लोग बाघ के शिकार के लिए जहर का उपयोग करते हैं। जहर बाघ के पेट में जलन पैदा करता है और पानी की ओर भागता है। बाघ मैदान में मरा तो शिकारी उठा ले जाते हैं, लेकिन अगर शारदा में मरता है, तो शव नहीं ले पाते हैं। पीलीभीत में एक साल में चार मामले पाए गए हैं, जहां बाघ का शव शारदा के किनारे मिला है। दुधवा में थारू जनजाति शिकार करती है।

2009 में ही टाइगर प्रोटेक्शन फोर्स बनाने की बात हुई थी। इस पर काम हुआ होता, तो बाघों की संख्या में कमी नहीं आती। वन विभाग के अफसरों ने कई बार बाघ के बच्चों को देखने का दावा किया, लेकिन वो कहां गए, किसी को पता नहीं।

कौशलेंद्र सिंह, वाइल्ड लाइफ एक्सपर्ट

As posted in Navbharattimes.indiatimes.com
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