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पीलीभीत टाइगर रिज़र्व में बाघ का शिकार, महकमा लाचार : एक रिपोर्ट

पीलीभीत टाइगर रिज़र्व में बाघ का शिकार, महकमा लाचार : एक रिपोर्ट

Apr 24, 2015

पीलीभीत: रिजर्व होने के बावजूद तराई के जंगल में बाघ महफूज नहीं हैं। गुरुवार को डगा और माधौटांडा के मध्य हरदोई ब्रांच नहर में एक बार फिर बाघ का शव मिलने से इस दुर्भाग्यपूर्ण स्थिति पर मुकम्मल मुहर लग गई। बाघ के शिकारियों से लेकर खाल, हड्डी, पंजों के तस्करों तक का पूरे जंगल में मजबूत संजाल है। इसमें कई बार रक्षकों की भूमिका भी भक्षक के रूप में सामने आई। प्राय: नहरों में बाघ के शव मिलने पर वन विभाग इसे महज हादसा साबित करने में जुट जाता है। लेकिन शिकारी अब बाघ मारने के लिए जिस इंडोसल्फास नामक जहर का इस्तेमाल करते हैं। बाघ प्यास से आकुल होकर जलस्नोत के पास पहुंच जाता है और वहीं दम तोड़ देता है। तराई के जंगल में बाघ के शिकार की परंपरा हरियाणा से आने वाले कंजड़ों ने शुरू की थी। ये कंजड़ हजारा क्षेत्र के नहरौसा गांव में डेरा डालते थे। जंगल में विचरण करते हुए कंजड़ बाघ संभावित इलाके में कड़का (लोहे का शिकंजा) जमीन पर डाल देते थे और उसके आगे कोई जानवर बांध देते थे। बाघ जब शिकार के चक्कर में कड़के पर पैर रखता था तो शिकंजा कस जाता था और बाघ छुड़ाने के लिए जितना जोर लगाता था वह कड़का कसता जाता था। इसके कड़ाहे को लंबी चेन से बांध कर रखते थे और बाघ के फंसते ही चेन के सहारे उसे घसीटकर कंबल डालकर लाठियों से पीटकर मार डालते थे ताकि उसकी खाल खराब न हो। इसके बाद पीटकर मारने के बजाय इंजेक्शन से बेहोश कर खाल उतारने लगे। पुलिस ने कंजड़ों पर शिकंजा कसा तो उनका आना-जाना बंद हो गया, लेकिन इसके बाद स्थानीय लोग इस काले कारोबार में लिप्त होने लगे। जंगल के बाहरी इलाकों में स्थानीय लोगों की गौड़ियां (पशुशाला) होती है। अगर किसी गांव में कोई पशु बाघ का शिकार बनता है तो शिकारी तुरंत सक्रिय हो जाते हैं और वे समझ जाते हैं कि बाघ का लोकेशन इर्द-गिर्द ही है। इसके बाद जंगल में भैंस का बच्चा (पांड़ा) बांध देते हैं। बाघ मौका देखकर पांडा का शिकार करता है, लेकिन पांडा का पूरा मांस एक बार में नहीं खा पाता, इसलिए वहां से चला जाता है। वैसे भी बाघ की आदत होती है कि वह अपने शिकार पर दोबारा जरूर आता है। इस बीच शिकारी पांड़ा के बचे मांस पर आसमानी रंग का इंडोसल्फास नामक जहर डाल देते हैं, जिसमें किसी भी प्रकार की गंध नहीं होती। बाघ जब दोबारा बचा मांस खाता है तो उसके पेट में भयंकर जलन होती है और वह प्यास से आकुल हो उठता है। इसके बाद वह सीधे जलस्नोत की ओर भागता है। ऐसे में कई बार तो जलस्नोत तक पहुंचने से पहले ही दम तोड़ देता है और कई बार जलस्नोत (नहर) तक पहुंचकर दम तोड़ता है। फिर उसका शव नहर में बहता हुआ पाया जाता है। बाघ के दोबारा मांस खाने के बाद ही शिकारी उसके शव की खोजबीन शुरू कर देते हैं। कई बार नहर में बहने के कारण शव दूर चला जाता है और किसी अन्य की निगाह में आ जाता है तो वे शव नही हासिल कर पाते। गुरुवार को भी हरदोई ब्रांच नहर में जिस बाघ का शव मिला है, आशंका है कि उसे भी जहर देकर ही मारा गया है। यह भी गौरतलब है कि जिस हरदोई ब्रांच नहर में बाघ का शव मिला है, उसकी क्षमता 5000 क्यूसेक की है, लेकिन इन दिनों बमुश्किल 1400 क्यूसेक जल ही छोड़ा जा रहा है। इन दिनों तो आदमी पैदल नहर पार कर जाता है। ऐसे में प्रथम दृष्टया जो संकेत मिले हैं वे शिकार की ओर ही इशारा कर रहे हैं।

बाघ की गर्दन पर मिले घाव के निशान

पीलीभीत के ज़िलाधिकारी ओम नारायण सिंह का कहना है कि बाघ के शव का पोस्टमार्टम कराया जा रहा है ताकि हत्या के कारण की पुष्टि हो सके। उन्होंने यह भी स्वीकार किया चूंकि यह बाघ मात्र 5 वर्ष का जवान था। ऐसे में स्वाभाविक मौत की आशंका कम है। वैसे भी बाघ पानी में जरूरत भर को तैर भी लेता है। अगर यह शिकार का मामला है तो शिकारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।

 पीसीसीएफ व एनटीसीए को भेजी गई रिपोर्ट

पीलीभीत : पीलीभीत टाइगर रिजर्व की बराही रेंज में मृत बाघ के शव की रिपोर्ट प्रमुख वन संरक्षक व नेशनल टाइगर कंजरवेशन अथारिटी आफ इंडिया नई दिल्ली को भेज दी गई है। बाघ की मौत से टाइगर रिजर्व प्रशासन सन्न है। बराही रेंज में डगा-माधोटांडा मार्ग के समीप प्रवाहित हो रही हरदोई ब्रांच नहर की झाल में एक बाघ का शव गुरुवार को सुबह बरामद किया गया। उसके शरीर पर एकाध निशान को छोड़कर सभी अंग सुरक्षित थे। जिला मुख्यालय पर डीएफओ की अध्यक्षता में बनी कमेटी ने बाघ के शव का निरीक्षण किया था। इसके बाद बाघ के शव को पोस्टमार्टम कराने के लिए आईवीआरआई बरेली भेज दिया गया। बाघ की मौत पर टाइगर रिजर्व प्रशासन सन्न रह गया है। टाइगर रिजर्व के प्रभागीय वनाधिकारी कैलाश प्रकाश ने बताया कि बाघ की मौत की विस्तृत रिपोर्ट बनाकर प्रदेश के प्रमुख वन संरक्षक डॉ.रूपक डे व नेशनल टाइगर कंजरवेशन अथारिटी आफ इंडिया के सदस्य सचिव को भेज दी गई है। घटनास्थल के आसपास जंगल में निगरानी कड़ी कर दी गई है। स्टाफ को डे-नाइट पेट्रोलिंग तेज करने के निर्देश दिए गए हैं। वह खुद भी जंगल का निरीक्षण कर रहे हैं। अगर बगैर परमीशन कोई घूमता हुआ पाया जाएगा, तो उसके खिलाफ वन्यजीव संरक्षण अधिनियम में कार्रवाई की जाएगी।

 

-File Photo

दो वन दरोगा समेत चार वनकर्मी निलंबित

पीलीभीत : पीलीभीत टाइगर रिजर्व की बराही रेंज में मृत बाघ मामले में दो वन दरोगा समेत चार वन कर्मियों को निलंबित कर दिया गया है। इन कर्मचारियों पर लापरवाही का आरोप लगाया गया। गुरुवार को हरदोई ब्रांच नहर से बाघ का शव बरामद किया गया। बाघ का शव दोपहर पौन बजे टाइगर रिजर्व कार्यालय लाया, जहां पर वनकर्मी देखने के लिए उमड़ पड़े। बाघ अंग तस्करी मामले में वन दरोगा शिवपाल को पहले ही निलंबित किया जा चुका है, जबकि वनरक्षक टाइगर रिजर्व कार्यालय से संबद्ध चल रहा है। टाइगर रिजर्व के प्रभागीय वनाधिकारी कैलाश प्रकाश ने बताया कि टाइगर रिजर्व के वन दरोगा कैलाशबाबू, वनरक्षक सत्तार खां व सामाजिक वानिकी प्रभाग के वन दरोगा राकेश वर्मा, निकासी मुंशी शिवदयाल को निलंबित कर दिया गया है। इन वन कर्मियों ने अपने कर्तव्यों के प्रति लापरवाही बरती है। अब लापरवाही बरतने वाले किसी भी वन कर्मचारी को बख्शा नहीं जाएगा।

बाघों की मौत दर मौत

2012 में

24 मई को हरीपुर रेंज की धनारा बीट में

25 मई को पुन: हरीपुर रेंज की धनारा बीट में

12 अगस्त को हरीपुर रेंज की नहर में

2013 में

4 नवंबर को हरीपुर रेंज के महोफ कंपार्टमेंट 98 बी में

26 नवंबर को बराही रेंज के कंपार्टमेंट 71 बी में

 2014 में

महोफ रेंज की फैजुल्लागंज बीट में

2015 में

जनवरी में चार बाघ मारे गए, दो का मांस जमीन में गड़ा मिला। इससे पहले एक बाघ का नदी में बहता मिला।

23 अप्रैल : डगा माधौटांडा के मध्य हरदोई ब्रांच नहर में शव मिला

 

कब कितने बाघ

वर्ष 2006 में 36 बाघ

वर्ष 2010-11 में 40 बाघ

वर्ष 2014 में 28 बाघ

 

बराही व महोफ रेंज में शुरू की गई कांबिंग, टाइगर रिजर्व में एलर्ट

पीलीभीत : पीलीभीत टाइगर रिजर्व के बराही रेंज के हरदोई ब्रांच नहर में उतराते पाए गए बाघ के शव से हड़कंप मच गया। इस घटना के बाद बराही व महोफ रेंज में वन अफसरों ने कां¨बग शुरू कर दी है। फील्ड कर्मचारियों को एलर्ट कर दिया गया है। टाइगर रिजर्व बनने के बाघों की मौत होने का सिलसिला जारी है, जो कम होने का नाम नहीं ले रहा है। जंगल क्षेत्र में अमूमन बाघ की नहर में डूबने से मौत होना बताया गया। गुरुवार को टाइगर रिजर्व कार्यालय में प्रभागीय वनाधिकारी कैलाश प्रकाश ने अधीनस्थ अफसरों की बैठक लेने के बाद क्षेत्रीय वनाधिकारियों को सतर्कता के निर्देश दिए। बराही, महोफ, माला क्षेत्रीय वनाधिकारियों को सावधानी बरतने के लिए कहा गया। हरदोई ब्रांच नहर में बाघ का शव मिलने से टाइगर रिजर्व प्रशासन थर्रा गया है। प्रभागीय वनाधिकारी श्री प्रकाश ने बताया कि बाघ की मौत काफी दुखद घटना है। घटना के बाद स्टाफ को एलर्ट कर दिया गया है। इसके बावजूद जंगल क्षेत्र में निगरानी करने की जरूरत है। उन्होंने बताया कि महोफ व बराही रेंज में सर्वे शुरू करा दिया गया है। रेंज के प्रत्येक कंपार्टमेंट में तलाशी अभियान चालू कर दिया गया है, जिससे हकीकत सामने आ सकेंगी। मृत बाघ के शव की नाप करते वनकर्मी।

..तो चुल्लू भर पानी में डूब गए वनराज

पूरनपुर: चुल्लू भर पानी में डूबकर वनराज की मौत होना सुनकर सभी को अटपटा तो जरूर लगेगा लेकिन ऐसा दावा वन विभाग का है। अधिकारी बाघ की मौत डूबने से होना मान रहे हैं और हत्या की कहीं से कहीं तक चर्चा ही नहीं है। बाघ का शव जिस नहर में पाया गया है उसमें इस समय पानी भी नाममात्र का ही चल रहा है।1टाइगर रिजर्व में लगातार बाघों का शिकार और मौत की घटनाओं से वन विभाग के अधिकारी अभी उबर नहीं पा रहे हैं। अब गुरुवार को फिर बाघ का शव नहर में पाए जाने से खलबली मची हुई है। शव को लेकर अधिकारियों का दावा है कि बाघ की मौत नहर में डूबकर हुई है और शरीर पर किसी प्रकार के चोट के निशान नहीं है लिहाजा हत्या की आशंका नहीं जताई जा सकती है।

मौत के दावों पर संशय के बादल

नाममात्र का ही चल रहा था नहर में पानी

जानकारों की माने तो अच्छा तैराक होता है बाघ

उधर वन्यजीव प्रेमियों ने इस दावे पर सवाल खड़े कर दिए हैं। कहा गया कि बाघ में इतनी क्षमता होती है कि वह चौबीस घंटे तक पानी में तेज रफ्तार भाग सकता है। पानी जितना भी हो बाघ के डूबने का सवाल ही नहीं उठता है। सांप और बाघ पानी को बड़ी आसानी से चीर सकता है। जब बाघ धार को चीर सकता है तो डूबने की बात कहां से आ गई। वन विभाग के अधिकारियों का दावा उनकी बात पर संशय और भी बढ़ा रहा है। बाघ का शव जहां मिला है वहां पानी भी इतना तेज गति से नहीं चल रहा था। मौजूदा समय में हरदोई ब्रांच नहर में मात्र 14 सौ क्यूसेक का फ्लो है जबकि इसकी क्षमता पांच हजार क्यूसेक की है। सेव इन्वायरंमेंट वेलफेयर सोसाइटी के सचिव टीएच खान के मुताबिक रिजर्व जंगल में कई सालों से बाघ की मौत हो रही है। यह विस्तृत जांच का विषय है। टाइगर रिजर्व प्रशासन को फोरेंसिक एक्सपर्ट की टीम बुलाकर जांच करानी चाहिए, तभी सच्चाई सामने आ सकेगी। इसी तरह बाघों की सुरक्षा के लिए टाइगर प्रोटेक्शन फोर्स तैनात किए जाने की जरूरत है, तभी जंगल के प्रत्येक क्षेत्र की हरकतों पर पैनी निगाह रखी जा सकेगी। इस संबंध में समिति कई बार लिखकर दे चुकी है।

स्वभाविक नहीं है बाघ की मौत:

टरक्वाइज वाइल्ड लाइफ सोसायटी के अध्यक्ष अख्तर मियां खान भी बाघ की मौत स्वाभाविक नहीं मान रहे है। उनका कहना है कि डूबने से भी बाघ की मौत नहीं हो सकती है। बाघ की हत्या भी संभावना है।

कहीं शिकारियों ने ही तो नहीं आजमाया हाथ

जेल भेजे गए कुछ शिकारियों की जमानत भी हो चुकी है। यदि बाघ की हत्या की पुष्टि होती है तो शकारियों का हाथ इसमें हो सकता है।

टाइगर रिजर्व में तेज रफ्तार में दौड़ते हैं वाहन

टाइगर रिजर्व के बीच से होकर वाइफरकेशन, रमनगरा तक जाती है। इस रोड पर 24 घंटे तेज रफ्तार वाहन दौड़ते रहते हैं और तेज ध्वनि के हार्न का प्रयोग प्रतिबंध के बाद भी करते हैं। कयास लगाया जा रहा है कि रात में किसी वाहन की टक्कर से अथवा तेज ध्वनि से भयभीत होकर हड़बड़ाहट में बाघ नहर में गिर गया होगा। चोट आदि लगने से डूबने की बात कही जा रही है। गर्दन व पंजे में चोट लगना इस आशंका को और बल देते हैं।

बरखेड़ा विधायक विधानसभा तक बुलंद कर चुके हैं आवाज

पीलीभीत टाइगर रिजर्व में बाघों की घटती संख्या और हत्या का मामला बरखेड़ा विधायक हेमराज वर्मा विधानसभा में उठा चुके हैं। मामला शासनस्तर तक पहुंचने के बाद भी अधिकारी इस ओर ध्यान नहीं दे पा रहे हैं। विधायक का आरोप था कि टाइगर रिजर्व में कम से कम 10 बाघ कम हो गए हैं। वन्यजीव प्रेमी भी बाघों की मौत से निराश हो रहे हैं।

कैमरे व कर्मियों की मौजूदगी में कैसे मर गया बाघ

जाका, पूरनपुर: नेपाल में पकड़े गए शिकारियों ने जब इस बात का खुलासा किया था कि पीलीभीत टाइगर रिजर्व में दो बाघों की हत्या उनके द्वारा ही की गई थी। इस खुलासे के बाद वनाधिकारियों ने निगरानी और सुरक्षा को बढ़ा दिया था और दर्जनभर शिकारियों को जेल भी भेजा था। इस कार्रवाई से भले ही टाइगर रिजर्व प्रशासन अपने मुंह मियां मिट्ठू बन गया हो लेकिन हकीकत आज भी जुदा है।  टाइगर रिजर्व में पाए जाने वाले बाघ यहां सुरक्षित नहीं हैं। किसी न किसी रेंज में शिकारी वनराज को मौत की नींद सुला देते हैं। दावा और संरक्षण की हामी भरने वाले अधिकारी सुरक्षा को लेकर कड़े बंदोबस्त नहीं कर पा रहे हैं। अभी हाल ही में चार चीतलों की मौत होने के बाद कहा जा रहा था कि अब सुरक्षा और संरक्षण पर विशेष ध्यान दिया जाएगा लेकिन ऐसा कुछ नहीं हो सका। टाइगर रिजर्व के इन दावों की पोल गुरुवार को हरदोई ब्रांच नहर में मिले बाघ के शव ने खोल दी है। बाघ की स्वाभाविक मौत है या इसके पीछे किसी शिकारी गैंग का हाथ है। यह भले ही जांच का विषय हो लेकिन गश्त व सुरक्षा पर एक सवाल है। मौजूदा समय में टाइगर रिजर्व में पाए जाने वाले बाघों की गणना के लिए कैमरे भी लगाए गए हैं। कैमरे चोरी होने की घटना के बाद गश्त भी बढ़ा दी गई तथा बाघों की मानीटरिंग भी कराई जा रही है। ऐसी दशा में बाघ की मौत कैसे हो गई। यह सब घटनाक्रम कैमरों में कैद होना चाहिए था। कैमरों के साथ निगरानी टीमें भी लगी हैं। घटना के बाद मौत की सच्चाई तक जाने के लिए टाइगर रिजर्व प्रशासन लगाए गए कैमरों को भी अहम कड़ी मान रहा है।

 

As posted in Jagran.com

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