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बाघों को जंगल मे पहुंचाने की दोबारा बनाई जाएगी योजना

बाघों को जंगल मे पहुंचाने की दोबारा बनाई जाएगी योजना

Feb 7, 2014

पीलीभीत : जंगल से निकलकर विभिन्न स्थानों पर घूम रहे बाघ ग्रामीणों के लिए महीनों से समस्या का सबब बने हुए हैं। अब मौसम अनुकूल हो जाने के बाद इन बाघों को पुन: जंगल में छोड़ने की योजना बनाई जाएगी। उत्तराखंड की सुरई व यहां के महोफ रेंज के सीमावर्ती जंगल से पिछले साल एक बाघिन अपने तीन शावकों के साथ बाहर निकल आई थी। वह अमरिया क्षेत्र के खेतों में कई महीने घूमती रही। इसे ट्रंकुलाइज करने के लिए दिल्ली से एक्सपर्ट बुला दिए गए थे। दुधवा नेशनल पार्क से दो प्रशिक्षित हाथी भी लाए गए लेकिन मौके का सर्वेक्षण करने के बाद शावकों के साथ रहने की वजह से बाघिन को ट्रंकुलाइज करने का इरादा छोड़ दिया गया। कुछ दिनों दो शावकों को साथ लेकर बाघिन वापस उसी रास्ते से जंगल में लौट गई लेकिन तीसरा नर शावक इसी क्षेत्र में रहा। कुछ दिनों बाद दोनों शावक के साथ बाघिन फिर इसी इलाके में आ गई। संभावना जलाई जा रही है कि जिले की सीमा से सटे नवाबगंज क्षेत्र में जो बाघ देखा गया, वह वही नर शावक है जो अब बड़ा हो चुका है। एक अन्य बाघ दियोरिया रेंज के जंगल से निकलकर उसी इलाके के गांवों के आसपास खेतों में घूमता देखा जा रहा है। दियोरिया क्षेत्र में तो पिछले दिनों देर शाम बाइक पर जा रहे लोगों पर बाघ ने छलांग लगा दी। सवार बाइक छोड़कर भागे। इस बीच बाघ सड़क के दूसरी ओर गन्ने के खेतों में चला गया था। सामाजिक वानिकी के प्रभागीय निदेशक रामेश्वर राय का कहना है कि जहां से भी बाघ देखे जाने की सूचना आती है तो तुरंत ही टीम भेजकर पग चिन्ह की पहचान कराते हैं। हालांकि अभी किसी बाघ ने मानव पर कोई हमला नहीं किया है। जंगल से बाहर बाघ घूमने संबंधी रिपोर्ट उच्चाधिकारियों को लगातार भेजी जा रही है। उधर, विश्व प्रकृति निधि के प्रोजेक्ट अफसर नरेश कुमार कहते हैं कि पालतू गाय पर हमले की सूचना के बाद जांच के लिए मौके पर टीम भेजी है। उन्होंने बताया कि अब मौसम अनुकूल हो रहा है। कोहरा की समस्या नहीं रही। ऐसे में जंगल से बाहर घूम रहे बाघों को ट्रंकुलाइज करने संबंधी अपनी रिपोर्ट उन्होंने उच्चाधिकारियों के माध्यम से मुख्यालय भेज दी है। उम्मीद है कि जल्द ही वन विभाग के अफसरों से समन्वय कायम कर बाघों को जंगल में पहुंचाने के लिए आपरेशन चलाया जाएगा।

As posted in Jagran.com

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