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देश का राष्ट्रीय पशु बाघ ही रहेगा, शेर पर फैसले को लेकर कोई प्रस्ताव नहीं

देश का राष्ट्रीय पशु बाघ ही रहेगा, शेर पर फैसले को लेकर कोई प्रस्ताव नहीं

Jul 6, 2015

बाघ प्रेमियों की बेचैनी को शांत करने के लिए ये खबर काफी असरदार साबित हो सकती है… अप्रैल महीने में केन्द्र सरकार द्वारा बाघ की बजाए शेर को राष्ट्रीय पशु घोषित किए जाने पर देश ही नहीं बल्कि दुनिया के कई लोग परेशान थे.. लखनऊ निवासी 13 साल के ऐश्वर्या पाराशर द्वारा दायर एक आरटीआई अर्जी पर भारत सरकार के पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय द्वारा दिए गए जबाब से यह साफ हो गया है कि फिलहाल राष्ट्रीय पशु की पद्वी पर बाघ की बादशाहत कायम रहेगी. ऐश्वर्या बताती हैं कि बीते अप्रैल महीने में उन्होंने समाचार पत्रों में केंद्र सरकार द्वारा बाघ की बजाए शेर को राष्ट्रीय पशु बनाने पर विचार करने की खबरें पढ़ने के बाद परेशान हो गई थीं. इसके बाद मामले की तह तक जाने के लिए उन्होंने प्रधानमंत्री कार्यालय में आरटीआई अर्जी लगाकर राष्ट्रीय पशु को बदलने की कार्यवाहियों के रिकॉर्ड की मांग की थी. प्रधानमंत्री कार्यालय ने ऐश्वर्या की आरटीआई अर्जी को भारत के गृह सचिव को अंतरित किया था. ऐश्वर्या ने बताया कि अब भारत सरकार के पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय के अधीन कार्यरत राष्ट्रीय व्याघ्र संरक्षण प्राधिकरण ने उसे बताया है कि प्राधिकरण को राष्ट्रीय पशु बदलने के संबंध में कोई प्रस्ताव नहीं मिला है.

-File Photo

ऐश्वर्या की आरटीआई के खुलासे से उन अटकलों पर पूर्णविराम लग गया है, जिनमें कहा गया था कि झारखंड से राज्यसभा सांसद परिमाल नाथवानी ने राष्ट्रीय पशु को बाघ से बदलकर शेर को बनाने का एक प्रस्ताव पर्यावरण मंत्रालय के अधीन काम करने वाले ‘नेशनल बोर्ड फॉर वाइल्ड लाइफ’ को भेजा था और मंत्रालय ने इस प्रस्ताव में रुचि दिखाई थी. आरटीआई जबाब से खुश ऐश्वर्या ने बताया कि वो खुश है कि साल 1972 में राष्ट्रीय पशु घोषित किया गया बाघ ही राष्ट्रीय पशु बना रहेगा और भारत के 17 राज्यों में पाए जाने बाले बाघों को बचाने का अभियान बदस्तूर जारी रहेगा.

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