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पीलीभीत में शुरू हुआ बाघों की गणना का कार्य

पीलीभीत में शुरू हुआ बाघों की गणना का कार्य

May 8, 2014

पीलीभीत : आरक्षित वन प्रभाग के तीन रेंजों में बाघों की गणना का कार्य शुरू करा दिया गया है। इस कार्य के लिए विश्व प्रकृति निधि की दो टीमें लगाई गई हैं। प्रत्येक टीम में पांच सदस्यों को शामिल किया गया है। गणना कार्य में वन विभाग के बीट कर्मचारी टीमों के सदस्यों का सहयोग करेंगे। शासन की ओर से पीलीभीत के जंगलों को वन्य जीव विहार घोषित किए जाने के बाद पहली बार बाघों की गणना कराई जा रही है। यहां के जंगलों को टाइगर रिजर्व घोषित किए जाने का प्रस्ताव स्वीकृति मिलने के करीब है। शासन से अनुमोदन के उपरांत पीलीभीत टाइगर रिजर्व का प्रस्ताव राष्ट्रीय बाघ प्राधिकरण में मंजूरी के लिए काफी पहले ही भेजा जा चुका है लेकिन इसी बीच लोकसभा चुनाव की घोषणा हो जाने की वजह से प्रस्ताव को औपचारिक मंजूरी का मामला अटक गया। उम्मीद की जा रही है कि लोकसभा चुनाव संपन्न होने के तुरंत बाद प्राधिकरण से टाइगर रिजर्व को मंजूरी मिल जाएगी। करीब तीन साल पहले हुए गणना में यहां के जंगलों में चालीस से अधिक बाघ होने की पुष्टि हुई थी। हालांकि इसके बाद दो बाघों के शव जंगल में पाए गए थे। एक अन्य बाघ का शिकार किए जाने का मामला भी प्रकाश में आया था।

इसके बावजूद वर्तमान में बाघों की संख्या बढ़ने की उम्मीद जताई जा रही है। इसी वजह से इस बार की गणना को टाइगर रिजर्व के मद्देनजर काफी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। फिलहाल विश्व प्रकृति निधि की ओर से महोफ, माला एवं दियोरिया रेंज में बाघों की गणना के लिए दो सौ लेजर कैमरे लगाए गए हैं। प्रभागीय वनाधिकारी राजीव मिश्रा के अनुसार गणना कार्य शुरू हो चुका है। इसमें विभागीय कर्मचारी विश्व प्रकृति निधि की टीम का सहयोग कर रहे हैं। विश्व प्रकृति निधि के परियोजना अधिकारी नरेश कुमार ने बताया कि सभी कैमरे चालू करा दिए हैं। वन विभाग के बीट कर्मचारी अपने-अपने क्षेत्र के जंगल में इन कैमरों की सुरक्षा का दायित्व संभालने के साथ ही बाघ गणना में उनकी टीम का सहयोग कर रहे हैं। उन्होंने बताया कि तीनों रेंजों में बाघों की गणना का कार्य पूरा हो जाने के बाद बराही व हरीपुर रेंज में कैमरे लगाकर बाघों की गणना की जाएगी। उन्होंने बताया कि बाघों की गणना का कार्य जून के पहले हफ्ते तक पूरा हो जाने की संभावना है।

जंगल में कैमरे लगाने का कार्य पूर्ण

परियोजना अधिकारी नरेश कुमार के अनुसार जिले में 71 हजार 228 हेक्टेयर क्षेत्रफल में फैले जंगल में करीब दो सौ कैमरे लगा दिए गए हैं।

 

As posted in Jagran.com

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