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मुद्दा: जल स्तर बढऩे से रॉयल बंगाल टाइगर को खतरा

मुद्दा: जल स्तर बढऩे से रॉयल बंगाल टाइगर को खतरा

Aug 2, 2015

जलवायु परिवर्तन के कारण भारत और बांग्लादेश के सुन्दरवन इलाके में ग्लोबल अनुपात के मुकाबले दोगुनी गति से बढ़ रहे समुद्री जल स्तर से विश्व के सबसे बड़े मैनग्रोव जंगल पर खतरा मंडरा रहा है। इसके साथ ही सुन्दरवन में रह रही रॉयल बंगाल टाइगर की आबादी पर भी संकट के बादल छा रहे हैं। पर्यावरण वैज्ञानिकों ने चेतावनी दी है कि अगर समय रहते ठोस कदम नहीं उठाए गए तो सुन्दरवन के अधिकांश हिस्सों को समुद्र लील जाएगा। बाघों का आशियाना भी नष्ट हो जाएगा। वल्ड्र वाइल्डलाइफ फंड के अध्ययन का हवाला देते हुए इंटरनेशनल यूनियन फॉर कंजरवेशन ऑफ नेचुरल (आईयूसीएन) ने बुधवार को अपनी वेबसाइट पर लिखा है कि वर्ष 2070 तक सुन्दरवन इलाके का समुद्र जलस्तर एक फुट बढऩे का अनुमान है। हिंद महासागर के उत्तर तटीय इलाके के इस जंगल में दुनिया के सबसे बड़ी बाघों की आबादी रहती है। सुन्दरवन तटीय क्षेत्र को तूफान और इससे होने वाली हानि से बचाता है, लेकिन जलवायु परिवतर्न के कारण समुद्री जल स्तर बढऩे से इसके जलसमाधि में समाने और बाघों के आशियाने खत्म होने का खतरा बढ़ता जा रहा है। प्रकृति के संरक्षण करने की दिशा में काम कर रहे आईयूसीएन ने वल्र्ड टाइगर्स डे के मौके पर जारी अपनी चेतावनी भरी रिपोर्ट में कहा है कि विश्व के 70 प्रतिशत बाघ भारत में है। अभी देश में सिर्फ 3000 जंगली बाघ हैं। इनकी संख्या बहुत ही धीमी गति से बढ़ रही है। आईयूसीएन ने रिपोर्ट में कहा है कि अब समय बहुत ही कम है। फिलहाल देश में जंगली बाघों की संख्या पिछले 100 वर्षो में सबसे कम हैं। पिछले एक सौ साल में 97 प्रतिशत जंगली बाघ घट गए हैं। रिपोर्ट के अनुसार 1 लाख जंगली बाघों की जगह इन दिनों 3 हजार जंगली बाघ बचे हैं। पिछले साल यह संख्या 3200 थी। वर्ष 2014 की बाघ गणना रिपोर्ट के अनुसार वर्ष 2010 से अब तक देश में बाघों की संख्या में 30 प्रतिशत वृद्धि हुई है।
विश्व बैंक ने भी किया सतर्क
विश्व बैंक ने भी अपनी हाल की रिपोर्ट में सुन्दरवन इलाके में तेजी से बढ़ रहे समुद्री जल स्तर से बढ़ रहे खतरे की चेतावनी दी है। बिल्डिंग रिजिलिअन्स फॉर सस्टनेबल डेवलपमेन्ट ऑफ द सुन्दरवन शीर्षक अपनी रिपोर्ट में सुन्दरवन को बाढ़ और तूफान से खतरा बरकरार होने की बात कही गई है। रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि समुद्री जल स्तर बढऩे से भारत और बांग्लादेश, दोनों देशों में पडऩे वाला सुन्दरवन खत्म हो जाएगा। रिपोर्ट के अनुसार सुन्दरवन इलाके में 12.9 बिलियन रुपए की पर्यावरण की क्षति हुई है। यह रकम क्षेत्र के प्रति वर्ष जीडीपी की 10 प्रतिशत है। वर्ष 2013 में लंदन प्राणी सोसाइटी की ओर किए गए अध्ययन के अनुसार सुन्दरवन इलाके में तटीय रेखा प्रति वर्ष 200 मीटर (650 फीट) पीछे हटती जा रहा है।
भारतीय प्राणी सर्वेक्षण कर रहा है निगरानी
भारतीय प्राणी सर्वेक्षण संस्थान ने जलवायु परिवर्तन का सुन्दरवन के जंगली जानवरों पर हो रहे असर पर निगरानी शुरू कर दी है। संस्थान ने क्षेत्र की विविधता और जनसंख्या इंडेक्स की जांच के लिए सुन्दरवन के बाली, गोसावा, बासंति, सागर और सतजेलिया टापू पर निगरानी केन्द्र स्थापित किया है।

As posted in Patrika.com

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