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… तो क्या अब बाघ को हटाकर शेर होगा भारत का ‘राष्ट्रीय पशु’?

… तो क्या अब बाघ को हटाकर शेर होगा भारत का ‘राष्ट्रीय पशु’?

Apr 18, 2015

नरेन्द्र मोदी सरकार शेर को राष्ट्रीय वन्य जीव घोषित करने के प्रस्ताव पर विचार कर रही है। इस प्रस्ताव से बाघ अपनी वह हैसियत खो देगा जो उसे वर्ष 1972 से मिली हुई है । इस प्रस्ताव से वन्यजीव एक्टीविस्टों में बैचेनी फैल गई है जो इस प्रस्ताव को विलक्षण बता रहे है। इनका कहना है कि इससे बाघ बचाओ अभियान को धक्का लगेगा और बाघ अभ्यारण्यों में औद्योगिक परियोजनाओं को शुरू करने को मंजूरी मिलने का रास्ता खुल जाएगा। प्राप्त जानकारी के अनुसार झारखंड से राज्यसभा सांसद परिमल नथवानी ने इस तरह का एक प्रस्ताव पर्यावरण मंत्रालय को भेजा है।  नथवानी खुद एक उद्योगपति है। उनके प्रस्ताव को मंत्रालय ने वन्यजीव के राष्ट्रीय बोर्ड को विचारार्थ भेज दिया जो कि मंत्रालय के अन्तर्गत कार्यरत है और इसमें गुजरात से आए सदस्यों की भरमार है।

इस राष्ट्रीय मंडल के अध्यक्ष खुद पर्यावरण मंत्री प्रकाश जावडेकर है और इस बोर्ड की तदर्थ समिति की इस प्रस्ताव पर विचार करने के लिए मार्च में बैठक भी हुई थी। बोर्ड के सदस्य रमन सुकुमार के अनुसार समिति ने पर्यावरण मंत्री से अनुरोध किया था कि इस मामले में वे व्यापक परामर्श लें। सूत्रों के अनुसार तथ्य यह है कि शेर को भारत का राष्ट्रीय वन्य जीव बनाने के इस प्रस्ताव में प्रशासन की भी काफी दिलचस्पी बढ़ गई है। हालांकि बोर्ड के ही एक अन्य सदस्य एच एस सिंह का कहना है कि इस प्रस्ताव पर विचार करने से पहले सरकार को कई मुद्दों और तथ्यों पर विचार करना होगा। वे कहते है कि बाघ देश के 17 राज्यों में पाये जाते हैं जबकि शेर केवल एक राज्य में ही पाया जाता है। सांसद नथवाणी ने ऐसा ही एक प्रस्ताव वर्ष 2012 में भी लाने का प्रयास किया था लेकिन तब तत्कालीन पर्यावरण मंत्री जयंती नटराजन ने राज्य सभा में बताया था कि सरकार ऐसे किसी प्रस्ताव पर विचार नहीं कर रही है। पिछले साल दिसंबर में नथवानी ने फिर संसद में प्रश्रकाल के दौरान पूछा था कि क्या शेर को राष्ट्रीय वन्यजीव बनाने का कोई प्रस्ताव है ? इसके जवाब में पर्यावरण मंत्री प्रकाश जावडेकर ने जवाब दिया था कि ऐसा कोई प्रस्ताव नहीं है । इसके बावजूद इस मुद्दे पर एक समिति में 14 मार्च 2015 को चर्चा की गई जिसकी अध्यक्षता पर्यावरण मंत्री प्रकाश जावडेकर ने की।

Indian_Tiger_at_Bhadra_wildlife_sanctuary

इस समिति के एजेंडे में ये मुद्दा चौथे नंबर पर था। हाल ही देश भर में किए गए सर्वेक्षण में ये जानकारी मिली कि देश में वर्तमान में 2226 बाघ है जबकि एशियाई शेरों की संख्या अनुमानित 411 है और वह भी सिर्फ गुजरात के गिर जंगलों में सीमित है । वर्ष 1972 में भारतीय वन्यजीव बोर्ड ने बाघ के विश्वव्यापी महत्व , देश भर में इसकी उपस्थिति और इसका संरक्षण करने की जरूरत को देखते हुए बाघ को राष्ट्रीय वन्यजीव घोषित किया था। पर्यावरणविदों के अनुसार बाघ हमारा राष्ट्रीय गौरव है। भारत ही एकमात्र देश है जहां आप बाघ को जंगल में देख सकते हैं। हर साल देश में आने वाले विदेशी पर्यटकों के लिए ताजमहल के बाद बाघ ही आकर्षण का केंद्र है । हमें इसके गौरव को बनाए रखना होगा। वाइल्ड लाइफ कन्ज़र्वेशन ट्रस्ट के प्रेसिडेंट अनीश अंधेरिया का कहना है कि भारत का राष्ट्रीय वन्यजीव वो होना चाहिए जो भारत के ज्यादा से ज्यादा राज्यों में पाया जाता हो और जिससे ज्यादा से ज्यादा लोगों का जुड़ाव हो। भारत में बाघ 17 राज्यों में पाया जाता है जबकि शेर केवल गुजरात में गिर के जंगलों में। बाघ से भारत के लोगों का जुड़ाव ज्यादा है और इसीलिए भारत बाघ संरक्षण में दुनिया का अग्रणी देश बन पाया है।

 

 

As posted in Samacharjagat.com

 

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