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पीलीभीत में विश्व प्रकृति निधि गोद लेगा छह गांव

पीलीभीत में विश्व प्रकृति निधि गोद लेगा छह गांव

Apr 24, 2014

पीलीभीत: जंगल के निकट के गांवों में रहने वाले अक्सर जंगली जानवरों के आवागमन में बाधा बनते रहते हैं। इसलिए विश्व प्रकृति निधि जंगल के किनारे के छह गांवों को गोद लेगा। उन गांवों के लोगों की जंगल पर निर्भरता कम करेगा और उन्हें रोजगार मुहैया कराएगा। दरअसल तराई के इस जिले में फैले 71 हजार 228 हेक्टेयर क्षेत्रफल जंगल को पांच रेंज में विभाजित किया गया है। बराही रेंज के लग्गा भग्गा-किशनपुर सेंचुरी एवं माला रेंज में गढ़ा-लालपुर को वन्य जीवों के भ्रमण के लिए प्रमुख कॉरीडोर माना जाता है। इन दोनों स्थानों से वन्य जीवों का सबसे अधिक आवागमन होता है। लग्गा भग्गा वन क्षेत्र से होकर खीरी जिले में आने वाले किशनपुर सें चुरी तक नेपाल से हाथी, गैंडा आदि वन्य जीव गुजरते रहते हैं। यहां से बाघ, तेंदुआ, भालू आदि नेपाल के शुक्ला फांटा सेंचुरी की ओर निकल जाते हैं।

इसी तरह से माला रेंज के गढ़ा-लालपुर कॉरीडोर से बाघ, तेंदुआ एवं दूसरी तरह के वन्य जीव आवागमन करते हैं। वन्य जीवों के भ्रमण में जंगल के निकट के गांवों में रहने वाले बाधा बनते हैं। इसलिए विश्व प्रकृति निधि ने छह गांवों को गोद लेने का फैसला किया है। लेकिन अब तक चुनाव नहीं किया है। कुछ दिन बाद सर्वे होगा। चूंकि इन गांवों के लोग अपनी जरूरतों को पूरा करने के लिए जंगल पर आश्रित है। उन्हें जलौनी लकड़ी इसी जंगल से हासिल होती है। जब वह जंगलों में जाते हैं और पशुओं के आवागमन में बाधा बनते हैं। विश्व प्रकृति निधि के परियोजना अधिकारी नरेश कुमार ने बताया कि इन गांवों के लोगों की जंगलों पर निर्भरता खत्म कराने के लिए उन्हें रोजगार दिलाया जाएगा। साथ ही गैस कनेक्शन भी दिया जाएगा। विश्व प्रकृति निधि के परियोजना अधिकारी नरेश कुमार के मुताबिक दोनों कॉरीडोर के आसपास दो दर्जन से अधिक गांव हैं लेकिन पहले चरण में छह गांवों का चयन करके उन्हे आत्मनिर्भर बनाया जाएगा। जिससे वन्य जीव बिना बाधा के भ्रमण कर सकेंगे।
As posted in Jagran.com

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