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पीलीभीत टाइगर रिज़र्व की सुरक्षा को लेकर उत्तराखंड, यूपी, नेपाल साझा करेंगे सूचनाएं

पीलीभीत टाइगर रिज़र्व की सुरक्षा को लेकर उत्तराखंड, यूपी, नेपाल साझा करेंगे सूचनाएं

Apr 11, 2016

पीलीभीत : उत्तराखंड राज्य की सुरई वनरेंज में उत्तर प्रदेश व उत्तराखंड के वन अफसरों की उच्चस्तरीय बैठक का आयोजन किया गया, जिसमें लुप्तप्राय बाघ के संरक्षण व शिकार की सूचनाएं साझा करने पर सहमति बनी। हिमालय की तलहटी में बसे पीलीभीत टाइगर रिजर्व के जंगल की सीमा उत्तराखंड की सुरई व नेपाल देश की शुक्ला फांटा सेंचुरी से छूती है। ये सीमाएं काफी संवेदनशील श्रेणी में आती है। खुली सीमा होने की वजह से शिकारी जमकर फायदा उठा रहे हैं। भारत-नेपाल के अफसरों के बीच समय-समय पर बैठक आयोजित होती रहती हे, जिस पर रणनीति बनाई जाती है। रविवार को उत्तराखंड राज्य की सुरई रेंज में वन अफसरों की उच्चस्तरीय बैठक का आयोजन किया गया। उत्तराखंड राज्य के प्रमुख वन संरक्षक (वन्यजीव) दिग्विजय सिंह खाती, मुख्य वन संरक्षक कुमायूं डा.राजेंद्र सिंह, कंजरवेटर सुरेंद्र मेहरा की मौजूदगी में बैठक शुरू हुई।

सबसे पहले उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड व नेपाल से वन्यजीवों के स्वच्छंद विचरण पर चर्चा की गई। बताया गया कि नेपाल, यूपी, उत्तराखंड के जंगल आपस में सटे हुए हैं, जहां पर वन्यजीवों का मूवमेंट रहता है। इन पर शिकारियों की पैनी नजर रहती है। वन अफसरों ने कहा कि नेपाल, यूपी, उत्तराखंड की टीमें संयुक्त रूप से पेट्रोलिंग कर शिकारियों पर अंकुश लगाया जा सकता है, जिस पर सभी ने सहमति दी। वन्यजीव संबंधी सूचनाओं का आदान प्रदान किया जाए। माह में एक बार बैठक अवश्य होनी चाहिए। ऐसा करने से लुप्तप्राय टाइगर समेत सभी वन्यजीवों का संरक्षण कर सकेंगे। इस मौके पर डीएफओ पराग मधुकर दकाते, पीलीभीत टाइगर रिजर्व के डीएफओ कैलाश प्रकाश, एसडीओ डीपी सिंह आदि मौजूद रहे।

 

 

 

 

As posted in Jagran.com

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