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पीलीभीत टाइगर रिज़र्व में इंडो-नेपाल सीमा पर रोड बनाने पर मंथन

पीलीभीत टाइगर रिज़र्व में इंडो-नेपाल सीमा पर रोड बनाने पर मंथन

Apr 20, 2015

पीलीभीत : इंडो-नेपाल सीमा क्षेत्र में बनाई जाने वाली रोड को लेकर तराई क्षेत्र के वन अफसरों और डब्ल्यूडब्ल्यूएफ के अफसरों के बीच दिल्ली में बैठक संपन्न हुई। इसमें सीमा पार व जंगल के वन्यजीवों के सुरक्षा उपायों पर गहनता से मंत्रणा की गई। इंडो-नेपाल सीमा पर रोड बनाने के बजाय मौजूदा रोड को अपग्रेड कर सीमा चौकियों से लिंकअप करने का प्रस्ताव रखा गया, जिस पर विचार किया गया। अंतिम निर्णय केंद्र सरकार को लेना है। इस मामले में जल्द ही लखनऊ प्रदेश मुख्यालय पर चर्चा होने की संभावना है। इंडो-नेपाल सीमा पर रोड बनाने के लिए लोक निर्माण विभाग इंडो-नेपाल बार्डर का कार्यालय खोला गया, जहां से तराई क्षेत्र कवर किया जा रहा है। पीलीभीत टाइगर रिजर्व के लग्गा भग्गा जंगल से होकर रोड गुजरनी है। इसी क्षेत्र से हाथियों और गैंडों का स्वच्छंद विचरण रहता है।

-File Photo

 

अगर सीमा क्षेत्र में रोड बन जाती है, तो वन्यजीवों का स्वच्छंद विचरण पर प्रभाव पड़ सकता है। इस संबंध में स्थानीय स्तर पर कई बार बैठक हो चुकी हैं। इंडो-नेपाल रोड को लेकर शनिवार को दिल्ली में आयोजित बैठक में यूपी के प्रमुख वन संरक्षक डा. रूपक डे, इंडो-नेपाल के चीफ इंजीनियर अशोक कुमार मिश्रा, पीलीभीत टाइगर रिजर्व के डीएफओ कैलाश प्रकाश, दुधवा नेशनल पार्क के डिप्टी डायरेक्टर विनोद कृष्ण सिंह, गोंडा के मुख्य वनसंरक्षक के.थामस, डब्ल्यूडब्ल्यूएफ तराई आर्कलैंड स्केप के समन्वयक डा.मुदित गुप्ता, एनटीसीए, ग्लोबल टाइगर फंड, डब्ल्यूडब्लयूएफ नेपाल समेत कई सरकारी विभागों के अफसरों ने प्रतिभाग किया। बैठक में प्रस्ताव रखा गया कि इंडो-नेपाल सीमा क्षेत्र में बनने वाली रोड जंगल से जा रही है। अगर वर्तमान रोड को अपग्रेड कर सीमा क्षेत्र की बीओपी चौकियों को लिंकअप कर दिया जाए। ऐसे में वन्यजीवों की सुरक्षा हो सकेगी। सभी अफसरों ने इंडो-नेपाल रोड निर्माण पर गहनता से मंथन किया। जनपद में लग्गा-भग्गा जंगल से रोड निकलनी है। अंतिम निर्णय केंद्र सरकार को ही करना है।

 

 

As posted in Jagran.com

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