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पीलीभीत के जंगलों के बजाए फाइलों में विचरण कर रहे असम के गैंडे

पीलीभीत के जंगलों के बजाए फाइलों में विचरण कर रहे असम के गैंडे

Apr 9, 2015

पीलीभीत : पीलीभीत टाइगर रिजर्व की महोफ रेंज में गैंडा पुर्नवास परियोजना लागू की गई। मगर फाइलों से जंगल तक असम से गैंडे नहीं पहुंच सके हैं। इस संबंध में टाइगर रिजर्व प्रशासन ने कोई कठोर कदम नहीं उठाए हैं। इसी वजह से गैंडा परियोजना फलीभूत होती नजर नहीं आ रही है। टाइगर रिजर्व अफसरों ने राज्यमंत्री के प्रयासों का भी ख्याल नहीं रखा गया। राज्य सरकार ने नौ जून 2014 को पीलीभीत टाइगर रिजर्व घोषित किया गया था। इसमें शाहजहांपुर का कुछ जंगल शामिल किया गया। इस जंगल में लुप्तप्राय बाघ, हिरन, सांप, बंगाल फ्लोरिकन समेत कई प्रजातियों की चिड़ियां पाई जाती हैं। वन्यजीव सप्ताह में डीएम ओम नारायण सिंह ने अन्य वन्यजीवों के दर्शन कराने पर जोर दिया था। इस पर वन अफसरों को नए वन्यजीवों को लाकर बसाने के निर्देश दिए गए। इसी दौरान सेव इन्वायरंमेंट वेलफेयर सोसाइटी ने प्रमुख वन संरक्षक को पत्र भेजकर गैंडा पुर्नवास परियोजना पीलीभीत टाइगर रिजर्व में लागू करने की मांग की। इसी दौरान खादी एवं ग्रामोद्योग राज्यमंत्री हाजी रियाज अहमद ने असम सरकार से पांच गैंडे मंगाने की बात की, जिस पर सहमति बन गई।

राज्यमंत्री ने स्थानीय मीडिया को गैंडों के बारे में जानकारी दी। इसके बाद महोफ रेंज के चौगुर्जी में जगह तलाश ली गई। इसकी रिपोर्ट शासन को भेज दी गई। इस बात को कई माह गुजर चुके हैं। मगर वन विभाग के अफसरों ने कोई प्रयास नहीं किए। राज्यमंत्री के प्रयासों का भी ख्याल नहीं आया। अब फाइलों से टाइगर रिजर्व जंगल तक असम के गैंडे नहीं आ पाए हैं। देखना यह है कि वन विभाग कितनी तेजी से काम करेगा। टाइगर रिजर्व के प्रभागीय वनाधिकारी कैलाश प्रकाश का कहना है कि महोफ रेंज में आने वाले गैंडा संबंधी रिपोर्ट काफी समय पहले भेज दी गई है। उसके बाद किसी भी तरह की कोई सूचना नहीं मिली है।

 

 

As posted in Jagran.com

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