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दुधवा के गैंडे पीलीभीत टाइगर रिज़र्व में करेंगे विचरण

दुधवा के गैंडे पीलीभीत टाइगर रिज़र्व में करेंगे विचरण

May 14, 2015

पीलीभीत : अब पीलीभीत टाइगर रिजर्व में दुधवा नेशनल पार्क के गैंडे जल्द ही विचरण करते नजर आएंगे। इसके लिए वन राज्यमंत्री से सैद्धांतिक सहमति मिल चुकी है। पहले ये गैंडे असम के काजीरंगा नेशनल पार्क से मंगाए जाने थे, जिस पर विराम लग गया है। गैंडों का आशियाना महोफ रेंज के चौगुर्जी में बनाया जाएगा। इसके लिए जगह पहले ही चिन्हित की जा चुकी है। तराई क्षेत्र के पीलीभीत का जंगल वन्यजीव और वन संपदा में बेहद खूबसूरत है। इस जंगल में लुप्तप्राय बाघ, बंगाल फ्लोरिकन, हिस्पिडहियर, हिरन समेत कई प्रजातियों के वन्यजीव पाए जाते हैं, जिनका पर्यटक भ्रमण करने के दौरान दीदार कर पाते है। बाघ के दीदार यदा कदा ही पर्यटकों को हो पाते हैं। वन्यजीव संरक्षण सप्ताह के समापन समारोह में डीएम ओम नारायण सिंह ने भी सहजता से दिखने वाले वन्यजीव को लाकर बसाया जाए। सेव इन्वायरंमेंट वेलफेयर सोसाइटी ने मुख्यमंत्री अखिलेश यादव को पत्र भेजकर पीलीभीत टाइगर रिजर्व को पांच गैंडा देने की मांग उठाई थी। इसके बाद प्रदेश शासन ने टाइगर रिजर्व प्रशासन से गैंडा पुनर्वास परियोजना की पूरी रिपोर्ट तलब की। पांच गैंडे असम के काजीरंगा नेशनल पार्क से मंगाए जाने थे, जिसमें काफी विलंब हो रहा है। दो दिन पहले एक समारोह में आए प्रदेश के वन, खेलकूद व युवा कल्याण राज्यमंत्री फरीद महफूज किदवई ने असम की बजाय दुधवा नेशनल पार्क से गैंडे मंगाने पर सहमति जताई। उन्होंने बताया कि असम से गैंडे मंगाने में यातायात पर काफी खर्च आएगा, लेकिन दुधवा से कम खर्चे पर आसानी से गैंडे आ जाएंगे। यहां पर गैंडों की संख्या भी काफी बढ़ रही है।

इस निर्णय के बाद दुधवा नेशनल पार्कके गैंडे जल्द ही पीलीभीत टाइगर रिजर्व के महोफ रेंज की चौगुर्जी ग्रासलैंड में घूमते नजर आएंगे। जंगल भ्रमण के दौरान पर्यटकों को गैंडे आसानी से नजर आ जाएंगे। प्रभागीय वनाधिकारी कैलाश प्रकाश के मुताबिक, गैंडा परियोजना लागू करने के लिए महोफ में जगह चिन्हित कर ली गई है। गैंडा मंगाने के संबंध में शासन से जैसा आदेश मिलेगा। उसी अनुरूप काम किया जाएगा। रहने के स्थान को उनके हैबीटेट के अनुसार बनाया जाएगा।

समय से आ जाएंगे गैंडे

प्रेमीसेव इन्वायरंमेंट वेलफेयर सोसाइटी के सचिन टीएच खान के मुताबिक पीलीभीत टाइगर रिजर्व में गैंडा पुर्नवास परियोजना लागू करने के लिए पहल की गई थी, जो सार्थक साबित हुई। इस पर शासन ने गंभीरता से कार्यवाही शुरू की है। जंगल में गैंडे जल्द आने चाहिए। अगर दुधवा से गैंडे आ जाएं, तो बहुत अच्छा होगा। इससे गैंडा मंगाने में खर्चा भी कम आएगा।

 

 

As posted in Jagran.com

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