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क्या कठघरे में है पीलीभीत टाइगर रिज़र्व की ‘दहाड़’ का दम?

क्या कठघरे में है पीलीभीत टाइगर रिज़र्व की ‘दहाड़’ का दम?

Jan 27, 2015

पीलीभीत : चार साल में बाघों का कुनबा सवा गुना होने पर भले ही केंद्र सरकार और पर्यावरणविद् इतरा रहे हों, लेकिन ‘दहाड़’ की दम कठघरे में भी खड़ी हो गई है। जिस गणना के आधार पर बाघों की संख्या का तर्क दिया जा रहा है, असल में वह पूरी ही नहीं है। हाल ही में घोषित देश के 45वें पीलीभीत टाइगर रिजर्व की गणना को उसमें शामिल ही नहीं किया गया है। इससे साफ है, केंद्रीय वन पर्यावरण मंत्रालय और डब्ल्यूडब्ल्यूएफ ने जो आंकड़े पेश किए हैं वह अधूरे हैं। हाल ही में डब्ल्यूडब्ल्यूएफ (व‌र्ल्ड वाइड फंड), एनटीसीए (नेशनल टाइगर कंर्जेवेशन एथॉरिटी) दिल्ली और केंद्रीय पर्यावरण मंत्री प्रकाश जावड़ेकर ने यह आंकड़े पेश किए थे। बताया गया कि 2010 में भारत में 1706 बाघ थे, जो 2014 की गणना में 2226 हो गए। इन आंकड़ों के साथ ही अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सेव टाइगर मुहिम मुस्कुरा उठी है। इसलिए भी क्योंकि अभी तक चार साल में 30 फीसद वृद्धि पहली बार जो दर्ज हुई थी। हालांकि, इन आंकड़ों पर सवाल भी उठने में ज्यादा वक्त नहीं लगा। पीलीभीत जिसे हाल ही में देश का 45 वां टाइगर रिजर्व घोषित किया गया है, उसके आंकड़े पूरी मुहिम से गायब हैं। टाइगर रिजर्व बनने के बाद यहां जून 2014 में बाघों की गणना हुई थी, लेकिन उसका कोई आंकड़ा सार्वजनिक नहीं किया गया। यही वजह है, बरखेड़ा क्षेत्र से सपा विधायक हेमराज वर्मा ने बाघों की असल संख्या पर सवाल खड़े किए हैं।

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आंकड़ों पर सवाल

सपा विधायक के मुताबिक, 2010 में जब बाघों की गणना हुई तो पीलीभीत के जंगल में 40 से अधिक बाघ मौजूद होने की जानकारी आई। इसके बाद 2012 की गणना में बाघों की संख्या 30 बताई गई। इसके बाद 2013 में यह संख्या घटकर अचानक 23 रह गई। हालांकि, इस गणना के अलावा विश्व प्रकृति निधि के कैमरे में कुछ शावक भी दिखे थे। उनका तर्क है, अगर 2012 से लेकर 2014 के बीच हुई गणना के मध्य छह बाघों की आपसी संघर्ष के दौरान मौत होना भी घटा दें तो शावकों को जोड़कर 33 बाघों का आंकडा होना चाहिए। विधायक कहते हैं, बाघों की यह संख्या अपने आप में अच्छी खासी है। इसे शामिल किए बिना पूरे देश के आंकडे़ कैसे पूरे हो सकते हैं? सपा विधायक हेमराज वर्मा के मुताबिक गणना में गोलमाल है। डब्ल्यूडब्ल्यूएफ और केंद्र सरकार अपनी पीठ थपथपा रही है। बाघों की सही गणना सामने आनी चाहिए। इस मामले में मुख्यमंत्री से शिकायत कर दी है। वहीं पीलीभीत टाइगर रिज़र्व के डीएफओ कैलाश प्रकाश का कहना है कि यह सच है कि इस दफा की गणना में पीलीभीत के आंकडे नहीं दिए गए हैं। ओवरआल यूपी का आंकड़ा है। हालांकि, यह कहना भी गलत है कि पीलीभीत टाइगर रिजर्व में बाघ की संख्या घटी है।

 

 

As posted in Jagran.com

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