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पीलीभीत टाइगर रिजर्व को संसाधनों से करना होगा लैस

पीलीभीत टाइगर रिजर्व को संसाधनों से करना होगा लैस

Jan 11, 2016

पीलीभीत : डेढ़ साल पुराने पीलीभीत टाइगर रिजर्व को संसाधनों से लैस करना होगा, तभी लुप्तप्राय बाघ को शिकारियों से बचाया जा सकेगा। इस दिशा में कोई सार्थक कदम नहीं उठाए जा रहे हैं। फील्ड स्टाफ में अफसरों से लेकर वनरक्षकों के पद खाली पड़े हैं, जिससे वन्यजीवों की बेहतर ढंग से सुरक्षा नहीं हो पा रही है।

पिछले साल नौ जून को पीलीभीत जंगल को टाइगर रिजर्व का दर्जा दिया गया था। टाइगर रिजर्व में उप प्रभागीय वनाधिकारी, वन दरोगा, वनरक्षक आदि के पचास से अधिक पद रिक्त पड़े हैं। इन पदों के खाली होने की वजह से जंगल के वन व वन्यजीवों की बेहतर ढंग से सुरक्षा नहीं हो पा रही है। जंगल की खुली सीमा होने के कारण हर समय शिकारियों का खतरा मंडराता रहता है। इसी वजह वर्ष 2012 से 2015 तक बाघों की किसी न किसी कारण से मौत होती रही। मौत के बाद जांच और प्रकरण को बंद कर दिया जाता है। बाघों की मौत के बाद टाइगर रिजर्व में सुरक्षा के बेहतर इंतजाम करने की दिशा में प्रयास नहीं किए गए। इससे शिकारियों के हौंसले बुलंद होते गए। डे-नाइट की पेट्रो¨लग के लिए स्टाफ की किल्लत बनी हुई है। केंद्र व राज्य सरकार को मिलकर टाइगर रिजर्व के रिक्त पड़े पदों को भरना चाहिए, तभी बाघ समेत सभी वन्यजीवों की अच्छे ढंग से सुरक्षा हो सकेगी।

फील्ड डायरेक्टर तक नहीं हो पाया तैनात

पीलीभीत टाइगर रिजर्व बनने को डेढ़ साल बीत गए हैं, लेकिन फील्ड डायरेक्टर की तैनाती नहीं हो सकी है। अभी भी मंडलीय अफसर ड्यूटी निवर्हन कर रहे हैं। अगर फील्ड डायरेक्टर की तैनाती हो जाए, तो वन्यजीव सुरक्षा प्रबंधन बेहतर ढंग से हो सकेगा। इस दिशा में सरकार को सख्ती से कदम उठाना चाहिए।

वन कर्मियों को दिए जाएं नए हथियार

पीलीभीत टाइगर रिजर्व के वन कर्मचारियों को नए हथियारों से लैस किया जाए, जिससे जंगल में गश्त के समय शिकारियों के साथ अच्छे ढंग से निपटा जा सकेगा। वर्तमान समय में 35 बंदूक व 46 राइफल है, जिनसे कई सालों से फाय¨रग तक नहीं हुई हैं। ऐसे में ये हथियार धोखा भी दे सकते हैं।

 

 

As posted in Jagran.com

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