Roar for Tigers

पीलीभीत टाइगर रिज़र्व का बफर बनेगा तराई का सुरई रेंज

पीलीभीत टाइगर रिज़र्व का बफर बनेगा तराई का सुरई रेंज

Sep 7, 2014

पीलीभीत : तराई पूर्वी वन प्रभाग की सुरई रेंज को पीलीभीत टाइगर रिजर्व का बफर क्षेत्र बनाने की कवायद चल रही है। अगले पांच में वन विभाग को दो चरणों में 120 रेंजर भी मिल जाएंगे। मुख्य वन्य जीव प्रतिपालक दिग्विजय सिंह खाती ने शुक्रवार को पत्रकारों से यह बात कही। खाती ने बताया, तराई पूर्वी वन प्रभाग की सुरई रेंज पीलीभीत टाइगर रिजर्व से मिली हुई है। इस रेंज को पीलीभीत टाइगर रिजर्व का बफर क्षेत्र घोषित करने का प्रस्ताव राष्ट्रीय बाघ सुरक्षा प्राधिकरण को गया है। यह रेंज बफर क्षेत्र घोषित होते ही वहां के रखरखाव के लिए वन विभाग को केंद्र से भी धनराशि मिलने लगेगी। वन विभाग में रेंजरों की कमी पर खाती बोले कि राज्य में लोक सेवा आयोग की डायरेक्ट डिप्लोमा रेंजरों की भर्ती हो गई है, जिनका प्रशिक्षण चल रहा है। प्रशिक्षण खत्म होते ही दो साल के भीतर 60 रेंजर वन विभाग को मिल जाएंगे। उसके बाद फिर 60 और रेंजर पांच साल में मिल जाएंगे। उन्होंने अक्सर अपने हितों के लिए बंद होते कार्बेट पार्क पर चिंता जताई। कहा, इससे पर्यटकों में पार्क के प्रति गलत संदेश जाता है। इस दौरान पार्क निदेशक समीर सिन्हा, उपनिदेशक साकेत बडोला, डीएफओ राहुल मौजूद रहे।

कार्बेट टाइगर रिजर्व सिखाएगा स्मार्ट पेट्रोलिंग

कार्बेट टाइगर रिजर्व राज्य के संरक्षित वन क्षेत्रों के वनाधिकारयों को गश्त की बारीकियां सिखाएगा। जिससे कि संरक्षित क्षेत्रों में भी कार्बेट टाइगर रिजर्व की तर्ज पर स्मार्ट पेट्रोलिंग की जा सकेगी। इसके लिए कार्बेट टाइगर रिजर्व के कालागढ़ वन्य जीव प्रशिक्षण संस्थान में 13 से 15 सितंबर को प्रशिक्षण होगा। जिसमें राज्य में स्थित राजाजी नेशनल पार्क, अस्कोट वन्य जीव बिहार, नंदा देवी बायोस्पयर रिजर्व, गंगोत्री नेशनल पार्क, गोविंद नेशनल पार्क पुरोला के वन क्षेत्रों के वनाधिकारियों को सीटीआर द्वारा जंगल में की जानी वाली स्मार्ट गश्त की जानकारियां दी जाएंगी। सीटीआर के उपनिदेशक साकेत बडोला ने बताया कि संरक्षित क्षेत्रों के एसडीओ व रेंजरों को प्रशिक्षण दिया जाए।

कार्बेट टाइगर रिजर्व का भी होगा रेस्क्यू सेंटर

वन्य जीवों के लिहाज से बेहद संवेदनशील कार्बेट टाइगर रिजर्व में लंबित रेस्क्यू सेंटर की मांग पूरी होती दिख रही है। सीटीआर निदेशक समीर सिन्हा ने बातचीत में इसके संकेत दिए। सीटीआर में अक्सर बाघ, गुलदार, हाथी समेत अन्य वन्य जीवों के घायल होने पर उनके उपचार की कोई स्थायी व्यवस्था नहीं है। घायल होने पर वन्य जीवों को उपचार के लिए पंतनगर, नैनीताल भेजना पड़ता है। सिन्हा ने बताया, सीटीआर क्षेत्र में जल्द ही रेस्क्यू सेंटर बनाए जाने की औपचारिक घोषणा होने वाली है।

 

 

As posted in Jagran.com

468 ad

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *