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तो फिर कैसे होंगे पीलीभीत टाइगर रिज़र्व में बाघों के दीदार!

तो फिर कैसे होंगे पीलीभीत टाइगर रिज़र्व में बाघों के दीदार!

Nov 23, 2014

पीलीभीत : टाइगर रिजर्व में पर्यटक खासतौर पर बाघ देखने ही आएंगे। अभी तक वनविभाग ऐसा कोई खास क्षेत्र विकसित नहीं कर सका है जहां पर्यटकों को वनराज के दर्शन हो सकें। पीलीभीत टाइगर रिजर्व में प्रदेश का सर्वाधिक वन क्षेत्र तो है ही यहां प्रदेश के इकलौते दुधवा नेशनल पार्क से काफी बाघ हैं। पिछली गणना के अनुसार यहां के वनों में 40 बाघ थे। इनकी संख्या और अधिक बढ़ना माना जा रहा है। सबसे अहम बात तो यह है कि दुधवा में हाथी एवं जिम कार्बेट पार्क में बनाई गई लॉयन सफारी में बाघ के दर्शक पर्यटक करते हैं लेकिन अपने यहां ऐसी कोई व्यवस्था अबतक नहीं है। वन अफसरों को भी नहीं मालूम कि बाघ कहां दिखेगा। ऐसे में पर्यटकों को वनराज के दर्शन कैसे होंगे। वाइफरकेशन से चूका जाने वाले छह किमी लम्बे मार्ग पर अक्सर लोगों को वनराज के दर्शन होते हैं लेकिन बरसात में मार्ग के दोनों तरफ खरपतवार उग आने से वाहन ही नहीं निकल पा रहे हैं। मार्ग भी जर्जर है।

इन स्थानों पर दिखता है बाघ

बराही गेस्ट हाउस से रेशम फॉर्म की ओर, हल्दीडेंगा पुल मार्ग पर, बराही से लेहारी मार्ग, चूका से वाइफरकेशन रोड, वाइफरकेशन से मुस्तफाबाद मार्ग, पूरनपुर-खटीमा मार्ग, वाइफरकेशन से हरदोई ब्रांच नहर के किनारे का रोड, धमेला कुआं से मुस्तफाबाद मार्ग, चूका से शारदा सागर डैम के किनारे का मार्ग। रुहेलखंड के मुख्य वन संरक्षक एम पी सिंह के मुताबिक घने जंगल में बाघ दिखना अपने आप में मुश्किल है। पर्यटकों को वनराज के दर्शन कराने के लिए पीलीभीत टाइगर रिजर्व में जिम कार्बेट पार्क की तरह सफारी विकसित करने की कार्ययोजना तैयार की जा रही है।

 
As posted in Jagran.com

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