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पीलीभीत टाइगर रिज़र्व में शावकों को शिकार मे एक्सपर्ट बना रही बाघिन

पीलीभीत टाइगर रिज़र्व में शावकों को शिकार मे एक्सपर्ट बना रही बाघिन

Nov 9, 2014

पीलीभीत : कोई चीता कहीं उसके शावकों की ¨जदगी के लिए खतरा न बन जाए। इसीलिए माला रेंज के जंगल से अपने दो शावकों को लेकर बाघिन बाहर आ गई है। शुक्रवार की शाम बाघिन और दोनों शावक तकिया गांव के पास दिखे तो ग्रामीणों में खलबली मच गई। पूरी रात ग्रामीणों में बाघिन की दहशत रही। दरअसल बाघिन अपने शावकों को जीने की कला के साथ ही शिकार करना सिखाने के लिए जंगल से बाहर आ जाती है। अमरिया क्षेत्र में तो एक बाघिन करीब साल भर से दो मादा शावकों के साथ घूम रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि बाघिन लगभग दो साल तक शावकों को साथ रखकर उन्हें पूरी तरह ट्रेड करने के बाद छोड़ देती है। जवान हो रहे शावक तब जंगल में जाकर खुद अपना इलाका तय करके अपने बलबूते शिकार करने लगते हैं। अलबत्ता मादा शावक ज्यादा समय तक अपनी मां के साथ रहना पसंद करती है। गजरौला क्षेत्र के गांव तकिया में शुक्रवार को शाम ढलने से पहले कुछ लोगों ने खेतों की ओर एक बाघिन और दो शावकों को घूमते हुए देखा। इससे पूरे गांव में खलबली मच गई। ग्रामीणों ने तुरंत ही इसकी सूचना वन विभाग को दी। इस पर वन विभाग के कर्मियों की टीम गांव पहुंच गई। तब पता चला कि बाघिन दोनों शावकों के साथ हरप्रीत सिंह के गन्ने के खेत में जाकर छिप गई है। गांव में आबादी के निकट बाघिन की मौजूदगी की वजह से बा¨शदे पूरी रात दहशत में रहे। पीलीभीत टाइगर रिजर्व के डीएफओ कैलाश प्रकाश के अनुसार बाघिन की निगरानी के लिए टीम की ड्यूटी रहेगी। इस दौरान ग्रामीणों को सचेत कर दिया गया है कि कोई गन्ने के उस खेत के आसपास न जाए। डीएफओ के मुताबिक बाघिन दोनों शावकों को लेकर रात के समय किसी दूसरे स्थान की ओर निकल सकती है।

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विश्व प्रकृति निधि के परियोजना अधिकारी नरेश कुमार का कहना है कि जंगल में बाघिन को अपने शावकों की सुरक्षा का खतरा रहता है। वहां बाघ इन शावकों को मार सकते हैं। आमतौर पर बाघिन तब तक शावकों को लिए जंगल से बाहर स्थान बदल-बदलकर घूमती रहती है, जब तक शावक बड़े नहीं हो जाते। इस दौरान शावकों को ¨जदगी जीने की कला एवं शिकार करना सिखाती है। जब बाघिन इस बात से पूरी तरह संतुष्ट हो जाती है कि उसके शावक अब खुद शिकार करने में पूरी तरह सक्षम हो गए हैं तथा जंगल में अपना इलाका तय करने की उनमें कुव्वत पैदा हो चुकी है तभी वह शावकों को स्वतंत्र करती है। शावक जब 18 से 24 महीनों की आयु पूरी कर लेते हैं, तभी मां उन्हें अपने से जुदा करती है। खास बात यह है कि नर शावक की अपेक्षा मादा शावक ज्यादा समय तक अपनी मां के साथ रहना पसंद करती है। अमरिया ब्लाक क्षेत्र में गजरौला फार्म के निकट नरकुल की झाड़ियों में करीब साल भर से अपना ठिकाना बनाए हुए हैं। उसका नर शावक तो अब अपने बलबूते शिकार करने के लिए दूर तक निकल जाता है लेकिन दो मादा शावक बाघिन के साथ ही घूमते देखे जाते हैं। सामाजिक वानिकी प्रभाग के रेंजर वीरपाल ¨सह का कहना है कि बाघिन और उसके शावकों की सुरक्षा एवं निगरानी के लिए एक टीम रोज ही उस क्षेत्र में भेजी जा रही है।

 

 

As posted in Jagran.com

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