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पीलीभीत टाइगर रिज़र्व के जंगल के संरक्षण पर खर्च होंगे 9.75 करोड़

पीलीभीत टाइगर रिज़र्व के जंगल के संरक्षण पर खर्च होंगे 9.75 करोड़

Sep 11, 2014

पीलीभीत : टाइगर रिजर्व में वन्य जीवों के संरक्षण एवं सुरक्षा पर करीब 9.75 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे। इसके लिए राष्ट्रीय बाध संरक्षण प्राधिकरण को कार्य योजना भेजी जा चुकी है। इसमें 6 करोड़ 69 लाख 83 हजार की धनराशि केंद्र सरकार देगी। राज्य सरकार का अंशदान तीन करोड़, पांच लाख, पचासी हजार रुपये का रहेगा। जल्द ही बजट आवंटित होने की उम्मीद है। दैनिक जागरण कार्यालय में बुधवार को प्रश्न पहर कार्यक्रम के दौरान पीलीभीत टाइगर रिजर्व के डीएफओ कैलाश प्रकाश ने टेलीफोन के माध्यम से सुधी पाठकों के सवालों के जवाब देकर उन्हें संतुष्ट किया। साथ ही जंगल एवं वन्य जीवों की सुरक्षा के लिए आम लोगों से सहयोग का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि जंगल में किसी तरह की अवांछित घुसपैठ अथवा वन अपराध के संबंधित किसी को कोई जानकारी मिलती है तो वह इसकी सूचना तुरंत उनके मोबाइल नंबर 9415212714 पर दें। जिससे वन अपराध रोकने के लिए त्वरित कार्रवाई की जा सके।

पीलीभीत टाइगर रिज़र्व से जुड़े जिज्ञासुओं के सवालों के जवाब दिए पीलीभीत टाइगर रिजर्व के डीएफओ कैलाश प्रकाश ने।

सवाल : टाइगर रिजर्व के जंगल के आसपास बसे गांवों के लिए क्या योजना है। ग्रामीणों को इससे क्या फायदा मिलेगा। – शैलेंद्र शर्मा, कली नगर

जवाब : बाहर से जंगल में घूमने के लिए आने वाले पर्यटकों के लिए स्थानीय ग्रामीण गाइड की भूमिका निभा सकते हैं। इससे उन्हें अतिरिक्त आमदनी होगी। जंगल के आसपास बसे गांवों के लोगों को आवागमन के लिए एक मार्ग निर्धारित कर दिया जाएगा।

सवाल : जंगल के किनारे स्थित गांव से फैजुल्ला गंज तक लोक निर्माण विभाग ने कच्ची सड़क बनाई है। क्या वन विभाग मार्ग को पक्का कराएगा। – सतीश गिरि, भगवंतापुर

जवाब : वन विभाग किसी तरह का कोई मार्ग निर्माण नहीं कराएगा। जो मार्ग पहले से बने हैं। यदि वे जंगल से सटे हैं तो मार्ग पर बैरियर लगेंगे।

सवाल : जंगल में अवैध कटान या शिकार होने की सूचना विभाग को किस माध्यम से भेज सकते हैं। – आजिम रजा, पूरनपुर

जवाब : जंगल में किसी तरह के अपराध की कोई सूचना मिले तो तुरंत सीधे संपर्क करके अथवा मोबाइल फोन पर जानकारी दें। इसके अलावा कार्यालय में ई-मेल पर भी सूचना प्रेषित की जा सकती है।

सवाल : जंगल से सटे गांवों के लोगों को आवागमन की सुविधा कैसे मिलेगी। – सुरेंद्र कुमार पत्ता बोझी

जवाब : एक ही रास्ता दिया जाएगा। उसी से आवागमन करना होगा। हालांकि सभी मार्गो पर बैरियर लगेंगे। मार्ग का पक्का निर्माण नहीं होगा।

सवाल : माधोटांडा-पीलीभीत मार्ग के दोनों ओर घना जंगल है। इस मार्ग की हालत बहुत खराब हो चुकी है। ऐसे में क्या वन विभाग इसकी मरम्मत कराएगा। – राम बहादुर, गजरौला

जवाब : मार्ग की मरम्मत संबंधित विभाग के माध्यम से ही होगी लेकिन इस मार्ग के दोनों ओर जंगल है। इसलिए बैरियर लगाने का काम विभाग की ओर से किया जाएगा।

सवाल : पीलीभीत टाइगर रिजर्व बन जाने के बाद महिलाओं को किसी तरह का रोजगार मिलने की कोई उम्मीद है या नहीं। – रंजना यादव, पिपरिया संतोष

जवाब : वन विभाग के पास महिलाओं को रोजगार देने की कोई योजना नहीं है। जंगल से सटे गांवों के परिवार पर्यटकों को सुविधाएं देकर स्वरोजगार तलाश सकते हैं।

सवाल : टाइगर रिजर्व बनने के बाद जंगल के किनारे बसे किसानों के लिए क्या योजना है। – रामबाबू, गजरौला

जवाब : किसानों के लिए फिलहाल कोई योजना नहीं है लेकिन यदि वन्य जीव उनकी फसलों को नुकसान पहुंचाते हैं तो जांच के बाद उन्हें आर्थिक मदद दी जाएगी। इसी प्रकार टाइगर के हमले से मौत होने पर पांच लाख रुपये मुआवजा दिया जाएगा।

सवाल : आसाम हाईवे पर सड़क के दोनों ओर माला रेंज का जंगल है। टाइगर रिजर्व बन जाने से यातायात पर क्या असर पड़ेगा। – रामपाल, बिठौरा कलां

जवाब : इस हाईवे पर यातायात सामान्य ही रहेगा। हालांकि जंगल वाले इलाके में हाईवे पर बैरियर लगाए जाएंगे। लोगों से इसके लिए आग्रह किया जाएगा कि वे वाहनों की गति कम रखें। साथ ही अनावश्यक रूप से हार्न न बजाएं।

सवाल : बरसात के बाद जंगल के रास्ते बदहाल हो जाते हैं। ऐसे में पर्यटन पर भी असर पड़ेगा। इसके लिए विभाग की क्या योजना है। – राजीव कुमार, नई बस्ती

जवाब : जंगल के अंदर सभी मार्गो की जल्द ही मरम्मत कराई जाएगी। इसके लिए योजना तैयार कर ली गई है। जंगल में रास्तों के रखरखाव की पूरी जिम्मेदारी विभाग की है।

 

 

 

As posted in Jagran.com

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