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शिकारियों की निगरानी कर रही तीसरी आंख

शिकारियों की निगरानी कर रही तीसरी आंख

May 10, 2014

पीलीभीत : जंगल में इन दिनों लकड़ी काटने या शिकार के लिए घुसपैठ करने वालों पर तीसरी आंख की भी नजर है। बाघों की गणना के लिए जंगल में लगाए गए लेजर कैमरों में प्रत्येक गतिविधि कैद हो रही है। इस बीच कैमरों में विभिन्न तरह के वन्य जीवों की तस्वीरें आने लगी हैं। आरक्षित वन प्रभाव के महोफ, माला एवं दियोरिया रेंज में लगे दो सौ कैमरे सिर्फ वन्य जीवों की गतिविधियों की तस्वीरें ही नहीं ले रहे हैं बल्कि इस दौरान जंगल में बगैर अनुमति घुसकर शिकार अथवा लकड़ी निकासी करने वालों की भी निगरानी कर रहे हैं। इन तीनों रेंजों में बीस मई तक सभी कैमरे चालू रहेंगे। इसके बाद इन कैमरों को उन स्थानों से हटा लिया जाएगा। द्वितीय चरण में बराही व हरीपुर रेंज के जंगलों में इन्हीं कैमरों को लगाया जाना है। विश्व प्रकृति निधि के परियोजना अधिकारी नरेश कुमार का कहना है कि दस से पंद्रह जून के बीच बाघों की गणना का कार्य पूर्ण हो जाएगा। गणना की रिपोर्ट फिलहाल सार्वजनिक नहीं की जाएगी। सबसे पहले विश्व प्रकृति निधि के मुख्यालय को रिपोर्ट दी जाएगी।

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वहां से राज्य के प्रमुख वन्य जीव संरक्षक को ब्योरा उपलब्ध कराया जाएगा। उन्हीं के माध्यम से वन विभाग को पूरी रिपोर्ट जारी की जाएगी। बहरहाल जब तक जंगल में बाघ गणना का कार्य चलेगा, जब तक शिकारियों एवं चोरी छिपे जंगल से लकड़ी निकासी करने वालों पर भी कैमरों की नजर रहेगी। इस दौरान जंगल में घूमते अवांछित लोगों की तस्वीरें इन कैमरों में कैद हो जाएंगी, जिससे बाद में उनकी आसानी से पहचान हो सकेगी। हालांकि जंगल में अवांछित गतिविधियों की निगरानी के लिए नियमित रूप से वन विभाग के कर्मचारी जीपीएस के साथ गश्त करते हैं लेकिन अक्सर शिकारी या लकड़ी चोर उन्हें चकमा देकर अपना काम कर जाते हैं। पिछली बार बाघ गणना के लिए लगाए गए दो कैमरे भी चोरी हो गए थे। इसीलिए इस बार कैमरों की देखभाल करने की जिम्मेदारी वन विभाग के बीट कर्मचारियों के हवाले की गई है।

 

As posted in Jagran.com

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