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जंगल में अपराध का दुस्साहस करने पर भरने होंगे पचास लाख!

जंगल में अपराध का दुस्साहस करने पर भरने होंगे पचास लाख!

Sep 17, 2014

पीलीभीत : जंगल के कोर एरिया में घुसकर अपराध करने से पहले अपराधियों को अब दस बार सोचना पड़ेगा। पीलीभीत टाइगर रिजर्व घोषित होने के बाद वन्य जीव संरक्षण अधिनियम के सख्त कानून प्रभावी हो गए हैं। कोर एरिया में पहली बार अपराध करने पर पचास हजार रुपये जुर्माना के साथ ही तीन से सात साल तक की सजा हो सकती है। अगर कोई अपराधी दोबारा जंगल में घुसकर अपराध करने का दुस्साहस करेगा तो उसे पचास लाख रुपया जुर्माना अदा करना होगा। सात साल की सजा भी काटनी पड़ेगी। जून में यहां के प्राकृतिक जंगलों को पीलीभीत टाइगर रिजर्व घोषित किया जा चुका है, इससे पहले जंगल में घुसकर अपराध करने पर अधिक सजा और जुर्माना का प्रावधान नहीं था। अब वन्य जीव संरक्षण अधिनियम के सख्त कानून लागू कर दिए गए हैं। टाइगर रिजर्व के तहत कुल 73 हजार 24, 98 हेक्टेयर क्षेत्र आता है। पीलीभीत जिले का 71 हजार 283.08 हेक्टेयर क्षेत्रफल है। पड़ोसी जिला शाहजहांपुर का 17.3690 हेक्टेयर जंगल शामिल है। पूरे जंगल में कोर एरिया 60 हजार 79.80 हेक्टेयर है। कोर एरिया में मानव के घुसने पर पाबंदी लगा दी गई है। पर्यटकों को भी कोर एरिया के जंगल में घूमने की इजाजत नहीं मिलेगी। ऐसे में अगर कोई व्यक्ति चोरी छिपे कोर एरिया में घुसकर वृक्ष काटने या शिकार करने का दुस्साहस करता है तो उसे सख्त सजा भुगतने के लिए भी तैयार रहना चाहिए। पहली बार कोर एरिया में अपराध करने वाले से पचास हजार रुपये जुर्माना वसूला जाएगा। साथ ही तीन से सात साल तक तक उसे जेल में काटने पड़ेंगे। वही व्यक्ति अगर दोबारा कोर एरिया के जंगल में किसी अपराध में लिप्त पाया गया तो फिर जुर्माना भरने में ही उसका घर व अन्य संपत्ति बिक जाएगी। दोबारा अपराध पर जुर्माना राशि बढ़कर पचास लाख रुपये हो जाएगी। सात साल की सजा अलग से भुगतनी पड़ेगी। वन्य जीव संरक्षण अधिनियम 2006 के अनुसार वन अपराध के लिए किसी दूसरे को उकसाने वाले लोगों को भी यही सजा दी जाएगी। दरअसल जंगल का कोर एरिया वह स्थान होता है, जहां बाघों समेत दूसरे वन्य जीवों का वास स्थल रहता है।

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शिकार का प्रयास भी दंडनीय

पीलीभीत टाइगर रिज़र्व के डीएफओ कैलाश प्रकाश के मुताबिक अगर कोई व्यक्ति जंगल में किसी वन्य जीव का शिकार करने का प्रयास करता है लेकिन उसमें सफल नहीं हो पाता तो भी वन्य जीव संरक्षण अधिनियम के तहत सजा मिलेगी और जुर्माना भी भरना पड़ेगा। सजा के लिए यह जरूरी नहीं कि शिकार हुआ हो। इसके लिए प्रयास किया जाना भी दंडनीय अपराध की श्रेणी में शामिल किया गया है।पीलीभीत टाइगर रिजर्व घोषित होने के बाद वन्य जीव संरक्षण अधिनियम 2006 के सभी प्रावधान भी लागू हो चुके हैं। सख्त सजा और भारी जुर्माना का प्रावधान इसीलिए किया गया है कि शिकारी एवं लकड़ी तस्कर जंगल में घुसने का प्रयास न करें। कोर एरिया के अलावा बफर एरिया के जंगल में भी शिकार या पेड़ कटान के मामलों में अब सिर्फ जुर्माना वसूलकर नहीं छोड़ा जा सकता बल्कि केस काटने के बाद चालान करके जेल भेजा जाएगा।

 

 

 

As posted in Jagran.com

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