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पीलीभीत में पर्यटन की अपार संभावनाएं

पीलीभीत में पर्यटन की अपार संभावनाएं

Jun 3, 2014

पीलीभीत : तराई के इस जिले को प्रकृति ने जैव विविधता एवं अनेक प्रकार के वन्य जीवों के साथ ही सदानीरा नदियों से नवाजा है। इसी वजह से यहां पर्यटन की अपार संभावनाएं हैं। केंद्र सरकार में काबीना मंत्री का ओहदा संभालने वाली यहां की सांसद मेनका गांधी की पहचान राजनीति के अलावा अंतर्राष्ट्रीय पर्यावरणविद एवं लेखिका की भी रही है। भले ही केंद्र सरकार में उन्हें महिला एवं बाल कल्याण विभाग की जिम्मेदारी मिली लेकिन वह दिलचस्पी दिखाएं तो यह जिला ईको टूरिज्म के तौर पर देश-विदेश में अपनी अलग पहचान कायम कर सकता है। इससे न सिर्फ पीलीभीत को नई पहचान मिलेगी, बल्कि पर्यटन व्यवसाय बढ़ने से रोजगार के साधन भी बढ़ेंगे। जिले के 71 हजार 228 हेक्टेयर क्षेत्रफल में फैले प्राकृतिक जंगल में दुर्लभ वनस्पतियों के साथ ही विभिन्न प्रजातियों के वन्य जीवों की भरमार है। दुनिया भर में विलुप्त हो रहे बाघों की यहां के जंगलों में अच्छी खासी तादात है। तेंदुआ, भालू, विभिन्न प्रजाति के हिरन, जंगली बिल्ली, विलुप्त हो रही खरगोश की प्रजाति हिस्पिड हीयर, बंगाल फ्लोरिकन पक्षी समेत अन्य कई प्रकार की दुर्लभ चिड़ियों का भी बसेरा है। काफी लंबे प्रयासों के बाद यहां जिलाधिकारी रहीं अदिति सिंह के प्रस्ताव पर शासन ने पीलीभीत को टाइगर रिजर्व बनाने के प्रस्ताव का अनुमोदन किया।

जंगल को वन्य जीव विहार भी घोषित किया जा चुका है। टाइगर रिजर्व की घोषणा राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण से होनी है। इससे पहले यहां जिलाधिकारी रहीं रितु माहेश्वरी ने पर्यटन को बढ़ावा देने की योजना तैयार कराई थी। यहां के जंगल के बीच चूका स्पॉट एवं वाइफरकेशन पर्यटन स्थल के तौर पर ख्याति पा चुके हैं। ऐसे में श्रीमती गांधी के लिए यहां ईको टूरिज्म को बढ़ावा देना कोई मुश्किल काम नहीं है। क्योंकि अब केंद्र में उनकी पार्टी की भारी बहुमत वाली सरकार है। ऐसे में पर्यावरण एवं पर्यटन विकास मंत्रालयों के माध्यम से उनके प्रयासों को सफलता मिल सकती है।

 

As posted in Jagran.com

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