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पीलीभीत टाइगर रिज़र्व में वाइल्ड लाइफ वार्डन की तैनाती नहीं

पीलीभीत टाइगर रिज़र्व में वाइल्ड लाइफ वार्डन की तैनाती नहीं

May 17, 2015

पीलीभीत : पीलीभीत टाइगर रिजर्व में वन्यजीव संरक्षण के लिए वाइल्ड लाइफ वार्डन की तैनाती नहीं की गई है। इस दिशा में वन विभाग ने कोई प्रयास नहीं किए हैं। इस वजह से वन्यजीव घटनाओं में बढ़ोत्तरी हो रही है। तराई बेल्ट के जंगल में वन्यजीव और वन संपदा का अकूत भंडार है। इस भंडार को सहेजने के लिए पीलीभीत टाइगर रिजर्व के पास संसाधनों की कमी है। इस वजह से वन्यजीवों का बेहतर ढंग से संरक्षण नहीं हो पा रहा है। तीन दशक पहले पीलीभीत वन प्रभाग में वाइल्ड लाइफ वार्डन की तैनाती थी। उसके बाद वाइल्ड लाइफ वार्डन को हटा दिया गया। मगर पीलीभीत टाइगर रिजर्व घोषित होने के बाद वाइल्ड लाइफ वार्डन की तैनाती की जानी चाहिए।

वाइल्ड लाइफ वार्डन अपने क्षेत्र में विशेषज्ञ के रूप में काम करता है। टाइगर रिजर्व को एक साल होने को आ रहा है। मगर वार्डन तैनाती की दिशा में कोई प्रयास नहीं किए गए। इस दिशा में शासन भी सुस्त रवैया अपना रहा है। सिर्फ जनपद को टाइगर रिजर्व का तमगा दे दिया गया है। वार्डन न होने की वजह से वन्यजीव संरक्षण का कार्य बेहतर ढंग से नहीं हो पा रहा है। ताजा उदाहरण है बराही रेंज के हरदोई ब्रांच नहर में 23 अप्रैल को पांच साल के बाघ का शव बरामद किया गया था। इसके बाद उसी नहर से दो चीतलों के शव बरामद हुए थे। इधर, वन संरक्षक वीके चोपड़ा का कहना है कि वार्डन की तैनाती राज्य सरकार की नीति है। मगर अभी एसडीओ से ही काम चलाया जा रहा है। वन और वन्यजीव संरक्षण की दिशा में जागरुकता से काम किया जा रहा है।

 

 

As posted in Jagran.com

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