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रात नौ बजे बाद न बस न ट्रेन, पीलीभीत में कैसे बढ़ेगा टूरिज्म?

रात नौ बजे बाद न बस न ट्रेन, पीलीभीत में कैसे बढ़ेगा टूरिज्म?

Apr 1, 2014

पीलीभीत : कौन सुनेगा किसे सुनाएं, इसीलिए चुप..? यह मुद्दा ही ऐसा है। बड़ी लाइन की ट्रेन में बैठने की हसरत पाले यहां के लोगों को तो सड़क का सफर तक ठीक से मयस्सर नहीं है। सीधे तौर पर मानें तो पीलीभीत जिला पहाड़ों की तलहटी में बसा हुआ छोटा सा शांत प्रिय जिला है। अगर बनाया जाए तो यह जिला छोटो होने के कारण व्यवस्थित और खूबसूरत बन सकता है। पर किसी को फिक्र नहीं है। यहां रात में नौ बजे के बाद ट्रेन और बस मिलना किसी सपने से कम नहीं है। जिले में यातायात के साधन इस जिले की किस्मत की तरह ही हैं। परिस्थितियां कैसी भी हों यहां रात में अपने जिले से आस पड़ोस के जिलों में संपर्क करना दु:स्वप्न सरीखा है। रात में यातायात के साधन एक दम नगण्य है। मसलन रात के वक्त आपात परिस्थितियों में अगर बरेली, शाहजहांपुर या टनकपुर या लखनऊ जाने का मौका आ जाए जो इसके लिए सौ बार सोचना पडे़गा। निजी वाहन ही इसका जरिया है। बस सेवा केवल दिल्ली के लिए रात में दस बजे अंतिम है। बात करें तो टनकपुर के लिए अंतिम ट्रेन शाम को पांच बजे, शाहजहांपुर के लिए शाम छह बजे और लखनऊ के लिए रात में बारह बजे वह भी एक्स्प्रेस ट्रेन है।

ऐसे में यहां तरक्की के लिए साधनों को पूरी तरह से अकाल है। पर माननीय हैं कि इस तरफ भी ध्यान देने को कतई तैयार नहीं है। इस मुद्दे पर हर दूसरा शख्स चर्चा करता है पर जाने क्यूं माननीयों के कानों तक यह चर्चा की बात नहीं पहुंच पाती। ऐसे में लोगों का मानना है कि सियासी लोगों के कान तक केवल वह बात पहुंचती है जो उनके काम की होती है। इसके अलावा तो जो उन्हें नहीं सुनना है वह तो ठीक उनसे मुखातिब होकर भी कही जाए तो सुनाई नहीं देती किसी को। जिले में यातायात के साधनों पर पूरा जोर देते हुए हमारे माननीयों को प्रयास करने चाहिए ताकि तकदीर और तस्वीर बदल सकें।

As posted in Jagran.com

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