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बगैर फील्ड डायरेक्टर के ही चल रहा है पीलीभीत टाइगर रिजर्व

बगैर फील्ड डायरेक्टर के ही चल रहा है पीलीभीत टाइगर रिजर्व

Apr 8, 2015

पीलीभीत : पीलीभीत टाइगर रिजर्व बगैर फील्ड डायरेक्टर के चल रहा है। वन विभाग के आला अफसरों ने दस महीने बाद भी फील्ड डायरेक्टर तैनाती की दिशा में कोई कदम नहीं उठाए हैं। ऐसे में बाघ संरक्षण पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा है। टाइगर रिजर्व के अफसरों को बरेली के चक्कर लगाने पड़ते हैं। राज्य सरकार ने नौ जून को पीलीभीत टाइगर रिजर्व की घोषणा की थी। इसके बाद नेशनल टाइगर कंजरवेशन अथारिटी के सदस्य सचिव ने अपनी टीम के साथ जंगल का भ्रमण किया था। अब टाइगर रिजर्व संसाधन जुटाने में लगा हुआ है। टाइगर रिजर्व घोषित हुए दस महीने का समय पूरा हो चुका है। नियमों के मुताबिक, कंजरवेटर रैंक के अधिकारी को फील्ड डायरेक्टर पद पर तैनात किया जाता है। मगर फील्ड डायरेक्टर तैनाती की दिशा में कोई सार्थक प्रयास नहीं किए गए। दो माह पहले एक बैठक में खादी एवं ग्रामोद्योग राज्यमंत्री रियाज अहमद ने टाइगर रिजर्व में फील्ड डायरेक्टर की तैनाती की जानकारी दी थी। इस संबंध में प्रमुख वन संरक्षक का आदेश का हवाला दिया था। फील्ड डायरेक्टर की तैनाती हो जाने से टाइगर रिजर्व के अफसरों को बर ली के बेवजह चक्कर नहीं लगाने पड़ेगा। बाघ संरक्षण पर फील्ड डायरेक्टर की निर्णय लेने में सक्षम होंगे। इस दिशा में सरकार को सकारात्मक कदम उठाने होंगे।

उत्तर प्रदेश के प्रमुख वन संरक्षक डा.रूपक डे के मुताबिक पीलीभीत टाइगर रिजर्व में फील्ड डायरेक्टर तैनाती का मामले पर कार्यवाही चल रही है। इस मामले में जल्द ही निर्णय लेकर अंतिम निर्णय लिया जाएगा। तबादले के दौरान किसी न किसी सीनियर वन अफसर की टाइगर रिजर्व के फील्ड डायरेक्टर पद पर तैनाती कर दी जाएगी।

डीएफओ का नहीं बदला पदनाम

पीलीभीत टाइगर रिजर्व में प्रभागीय वनाधिकारी का पद है। इस पद का नाम बदलकर डिप्टी डायरेक्टर हो जाना चाहिए। मगर वन विभाग ने प्रभागीय वनाधिकारी के पदनाम में भी बदलाव नहीं किया। पुराने पदनाम से सरकारी कामकाज को निपटाया जा रहा है। इस संबंध में वन राज्यमंत्री ने भी जल्द पदनाम बदलने का आश्वासन दिया था।

 

As posted in Jagran.com

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