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पीलीभीत टाइगर रिज़र्व में मरते रहे बाघ, देखते रहे अफसर

पीलीभीत टाइगर रिज़र्व में मरते रहे बाघ, देखते रहे अफसर

Jun 9, 2015

पीलीभीत : पीलीभीत टाइगर रिजर्व स्थापनाकाल के बाद साल भर झंझावतों से जूझता रहा। मगर समस्याओं के निस्तारण की दिशा में कोई स्थाई प्रयास नहीं किए गए। समस्याओं की वजह से सालभर में बाघ संरक्षण के कोई काम नहीं हो सके हैं। संसाधनों की किल्लत के बीच पीलीभीत टाइगर रिजर्व अपना पहला स्थापना दिवस नौ जून को मना रहा है। वर्ष 2004 में पीलीभीत टाइगर रिजर्व घोषित करने के लिए प्रयास शुरू किए गए। पीलीभीत वन प्रभाग से समय-समय पर प्रस्ताव मंगाए गए, लेकिन राज्य सरकार ने कोई फैसला नहीं लिया। वर्ष 2008 में केंद्र सरकार ने पीलीभीत टाइगर रिजर्व की सैद्धांतिक मंजूरी दे दी थी। सूबे में सपा सरकार आते ही मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने टाइगर रिजर्व बनाने की दिशा में दिलचस्पी दिखाई। राज्य सरकार ने पहले पीलीभीत वन्यजीव विहार घोषित किया। इसके बाद सरकार ने नौ जून को पीलीभीत टाइगर रिजर्व का नोटीफिकेशन किया। टाइगर रिजर्व घोषित होने के एक माह बाद 29 जुलाई को जंगल में पेड कटान मामले में डीएफओ राजीव मिश्रा, एसडीओ सुधाकर मिश्रा समेत 23 कर्मचारी सस्पेंड कर दिए गए, जो बाद में आरोप सिद्ध न होने पर बहाल कर दिए गए। महोफ रेंज में फाइटिंग में एक बाघ की मौत हो गई थी। नेपाल के कंचनपुर में पकड़ा गया तस्कर गभिया सहराई निवासी दुलाल मंडल ने दो बाघों के शिकार की बात स्वीकारी थी। अभी बाघों की मौत का सिलसिसला थमा नहीं है। बराही रेंज के हरदोई ब्रांच नहर से 23 अप्रैल को पांच साल के बाघ का शव बरामद किया गया था। इस मामले में प्रथम ²ष्टया बराही रेंजर समेत पांच कर्मचारियों को निलंबन का दंड झेलना पड़ा था। एक माह में ही रेंजर व वनकर्मियों को बहाल कर दिया गया। इस तरह सालभर टाइगर रिजर्व में उथल-पुथल होती रही, जिस वजह से बाघ संरक्षण की दिशा में कोई ठोस काम नहीं हो पाए। सिर्फ शिकारियों को पकड़ने में सारी ऊर्जा लगा दी गई।

 

-File Photo

 

पर्यटकों को लुभाने में नहीं रहा कामयाब

पीलीभीत टाइगर रिजर्व अपनी पहला स्थापना दिवस मना रहा है। जिस तरह टाइगर रिजर्व के बारे में प्रचार प्रसार होना चाहिए। मगर ऐसा नहीं किया जा सका है। टाइगर रिजर्व प्रशासन पर्यटकों को लुभाने में नाकाम रहा है। सिर्फ अफसरों के लिए सैरगाह बनकर रह गया। हर दिन किसी न किसी अफसर की गाड़ी धड़धड़ाती हुई जंगल में प्रवेश कर जाती हैं। मगर पर्यटकों को लुभाने की दिशा में कोई प्रयास नहीं किए गए।

फील्ड डायरेक्टर की नहीं हो पाई तैनाती

पीलीभीत टाइगर रिजर्व बनते ही पदों का सृजन कर तैनाती की जानी चाहिए। सुस्त गति से कार्रवाई होने की वजह से टाइगर रिजर्व में डीएफओ का पदनाम नहीं बदला जा सका। वहीं फील्ड डायरेक्टर पद पर किसी की तैनाती नहीं हो सकी है, जबकि वन्यजीव राज्यमंत्री फरीद महफूज किदवई कई बार भ्रमण करने के लिए आए। दस दिन में फील्ड डायरेक्टर तैनाती करने की बात कही थी। उसमें भी राज्यमंत्री खरे नहीं उतरे।

 

 

 

As posted in Jagran.com

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