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पीलीभीत टाइगर रिज़र्व : पेशानी पर बल और जंगल में मची हलचल

पीलीभीत टाइगर रिज़र्व : पेशानी पर बल और जंगल में मची हलचल

Apr 25, 2015

टाइगर रिजर्व जंगल में दूसरे दिन जारी रही कांबिंग,डे-नाइट पेट्रोलिंग के दिए गए सख्त निर्देश

प्राय: खामोश रहने वाले जंगल में अजीब हलचल है। हो भी क्यों न, जंगल के राजा की जो मौत हुई है। इससे जहां पूरा वन महकमा जंगल की खाक छान रहा है, वहीं कांबिंग के चलते दूसरे वन्य जीव भी किसी अनहोनी का अंदेशा भांपकर असहज हैं। राजा की मौत से जुड़े क्लू तलाशने के लिए संभावित घटनास्थल के इर्द-गिर्द चप्पे-चप्पे पर वनकर्मियों की पैनी नजरें दौड़ रही हैं, लेकिन अभी तक कुछ भी ऐसा नहीं मिल सका, जिससे बाघ के मौत की कड़ी जुड़ती हो। कांबिंग आगे भी जारी रहेगी। बैशाख में जेठ जैसी तपती दोपहरी में जंगल के भीतर जगह-जगह वन्य जीव पेड़ों के नीचे झुंड बनाकर आराम फरमाते रहते हैं। ऐसे में अचानक जब हाका लगाते हुए वन विभाग की टीम पहुंचती है तो किसी तरफ हिरनों के झुंड भागते नजर आ रहे हैं तो कहीं जंगली सुअर अजीब सी आवाज निकालते हुए दौड़ते हैं। पक्षियों का कोलाहल भी बढ़ जाता है। शांत जंगल में भगदड़ जैसी स्थिति नजर आने लगती है। वनकर्मी जगह-जगह वह कोई चिन्ह तलाश रहे थे। बता दें कि बराही रेंज में हरदोई ब्रांच नहर में पांच साल के बाघ का शव बरामद किया गया था। यह भी आशंका है कि बाघ की मौत जहर से हुई हो। यह भी हो सकता कि बाघ ने उस शिकार को खाया होगा, जिसके मांस में जहर मिलाया गया होगा। ऐसे किसी जानवर की हड्डी या सींग आदि बतौर साक्ष्य मिल सकती है। बाघों की अधिकांश मौतें बराही रेंज में ही हुई है। नेपाल के कंचनपुर में पकड़े गए गभिया सहराई निवासी शिकारी दुलाल मंडल ने कई बाघों की मौत की बात स्वीकारी थी, इसलिए शिकारियों की नजर बराही रेंज के बाघों पर है।

 

डीएफओ व कई अफसर छान रहे जंगल का कोना

वन विभाग के अधिकारी व कर्मचारी छान रहे जंगल की खाक

नहर में बाघ का शव मिलने के बाद वन अफसर सर्च अभियान में जुटे हुए हैं। टाइगर रिजर्व के प्रभागीय वनाधिकारी कैलाश प्रकाश के निर्देशन में वन अफसर और फील्ड स्टाफ महोफ व बराही जंगल में कांबिंग कर रहा है। कांबिंग के दौरान जंगल के संदेह वाले स्थानों का गौर से निरीक्षण किया गया, लेकिन किसी भी वन्यजीव के शिकार जैसी घटना नहीं मिली है। बराही का सबक लेते हुए माला, हरीपुर, दियोरिया कलां आदि के जंगलों में दिन-रात पेट्रोलिंग तेज कर दी गई है। हर संदिग्ध पर खास नजर रखी जा रही है। डीएफओ का कहना है कि जंगल में कांबिंग की जा रही है। अभी कोई खास उपलब्धि नहीं मिली है। ऐसे में कांबिंग जारी रहेगी, जिससे जंगल के अन्य भागों की मौजूदा स्थिति के बारे में पता चल सकेगा। डे-नाइट पेट्रोलिंग को कड़े निर्देश दिए जा चुके हैं। सबसे बड़ा सवाल यह है कि अभी तक कई बाघों की मौत हो चुकी है,लेकिन बाघों के शिकार पर अभी तक कड़ी नजर नहीं रखी जा रही है। सरकार बाघों की सुरक्षा पर हर साल लाखों रुपये का बजट खर्च करती है।

 बाघ की मौत का कारण अभी स्पष्ट नहीं

टाइगर रिजर्व के मृत बाघ का पोस्टमार्टम करने के बाद भी आइवीआरआइ कोई निष्कर्ष पर नहीं पहुंच सका है। मौत के कारणों के बारे में टाइगर रिजर्व के अफसरों को भी जानकारी नहीं दी गई है। ऐसे में पोस्टमार्टम रिपोर्ट के लिए टाइगर रिजर्व प्रशासन को दो सप्ताह का इंतजार करना पड़ेगा, इसके बाद ही बाघ की मौत की स्थिति साफ हो सकेगी। टाइगर रिजर्व की बराही रेंज में गुरुवार को डगा-माधोटांडा रोड पर पड़ने वाली हरदोई ब्रांच नहर की झाल में बाघ का शव मिला था। टाइगर रिजर्व मुख्यालय पर शव का निरीक्षण करने के बाद आइवीआरआइ बरेली पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया गया, जहां पर बाघ के शव का पोस्टमार्टम किया गया। पोस्टमार्टम होने के दौरान टाइगर रिजर्व के अफसर मौजूद रहे। आइवीआरआइ अफसरों ने पोस्टमार्टम करने के बाद बाघ की मौत के कारणों के बारे में किसी भी प्रकार की जानकारी नहीं दी। इस तरह टाइगर रिजर्व अफसर बैरंग लौट आए। अमूमन बाघ के पोस्टमार्टम होने के बाद मौत के कारण मौखिक रूप से बता दिया जाता है, लेकिन आइवीआरआइ अफसरों ने जानकारी क्यों नहीं दी। इस पर सवालिया निशान खड़ा हो गया है। टाइगर रिजर्व के प्रभागीय वनाधिकारी कैलाश प्रकाश का कहना है कि आइवीआरआइ से बाघ की मौत के बारे में कोई जानकारी नहीं दी गई है। पोस्टमार्टम रिपोर्ट दो सप्ताह बाद डाक से भेजने की बात कही है।

 

 

 

As posted in Jagran.com

 

 

 

 

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