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बाघ की पोस्टमार्टम रिपोर्ट पता नहीं, अफसरों व कर्मचारियों पर बेधड़क कार्रवाई

बाघ की पोस्टमार्टम रिपोर्ट पता नहीं, अफसरों व कर्मचारियों पर बेधड़क कार्रवाई

May 7, 2015

पीलीभीत : पीलीभीत टाइगर रिजर्व की बराही रेंज में हुए बाघ मौत मामले में पोस्टमार्टम रिपोर्ट का अता-पता नहीं है, लेकिन वन अफसरों व कर्मचारियों पर बेधड़क कार्रवाई की जा रही हैं। निलंबन से पहले नोटिस देना भी उचित नहीं समझा जा रहा है। इससे वन महकमे में हड़कंप मचा हुआ है। टाइगर रिजर्व अपने स्थापना काल से ही ऊहापोह की स्थिति से गुजर रहा है। पिछले साल जुलाई महीने में डीएफओ राजीव मिश्रा समेत 23 वन अफसर और कर्मचारियों को अवैध कटान का आरोप लगाते हुए निलंबित कर दिया गया था। 23 अप्रैल को बराही रेंज की हरदोई ब्रांच नहर में पांच साल का बाघ का शव बरामद हुआ था। इसके अगले दिन चार वन कर्मचारियों को सस्पेंड कर दिया गया। अभी तक टाइगर रिजर्व प्रशासन को बाघ के शव की पोस्टमार्टम रिपोर्ट प्राप्त नहीं हुई है। बाघ की मौत का कारण स्पष्ट नहीं है। वन महकमे ने आनन-फानन में वन कर्मियों को निलंबित करने का सिलसिला शुरू कर दिया है। पांच मई को बराही रेंजर मोहम्मद शाहनियाज निलंबन की भेंट चढ़ गए। इस कार्रवाई से वन महकमे में हड़कंप मचा है। शासन के सख्त रवैए की चपेट में कई लोगों के आने की संभावना जताई जा रही है। मगर बाघ के शव की पोस्टमार्टम रिपोर्ट का कहीं कोई अता पता नहीं लग पा रहा है। इधर, वन अफसर ने पोस्टमार्टम रिपोर्ट न आने की पुष्टि की है।

गणना के दौरान बंद हो आवागमन

पीलीभीत टाइगर रिजर्व में बाघ गणना का कार्य लेजर कैमरों से की जा रही है। मगर जंगल के अंदर किसी का आवागमन प्रतिबंधित नहीं किया गया है। ऐसे में बाघ गणना में बाधा पैदा हो रही है। जंगल का आनंद उठाने के लिए हर कोई चूका समेत कई स्पाटों की ओर रुख कर लेता है, जो वन्यजीवों के वासस्थल को डिस्टर्ब करता है। इस दिशा में टाइगर रिजर्व प्रशासन को कड़े कदम उठाने चाहिए। बाघ गणना कार्य के दौरान हर किसी के जंगल में प्रवेश पर पाबंदी लगना चाहिए, तभी बेहतर ढंग से गणना का कार्य हो सकेगा। बाघों की संख्या भी सही आ सकेगी।

 

 

As posted in Jagran.com

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