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ढाई हेक्टेअर में थी आग, डीएफओ को सौंपी जांच

ढाई हेक्टेअर में थी आग, डीएफओ को सौंपी जांच

May 14, 2015

पीलीभीत : जंगल में आग प्रकरण पर अब वन विभाग के आला अधिकारियों में हड़कंप मच गया है। वनकर्मी की ओर से काबीना मंत्री मेनका संजय गांधी पर मारपीट व गाली-गलौज का आरोप लगाए जाने के बाद 48 घंटे तक जहां पूरा विभाग सांसद की शिकायत को ही अनसुना किए बैठा था। मंगलवार को थप्पड़ की गूंज में जंगल की आग गुम शीर्षक से जागरण में खबर प्रकाशित होने के बाद महकमे की तंद्रा टूटी। प्रमुख वन संरक्षक ने डीएफओ के साथ टाइगर रिजर्व के मालारेंज में गढ़ा चेकपोस्ट पहुंच कर उस स्थल का भी मुआयना किया, सोमवार को जहां पर आग लगने की शिकायत खुद मेनका गांधी ने की थी। इधर, वनकर्मी की ओर से सांसद पर लगाए गए मारपीट के आरोपों की पुलिस जांच अभी भी जहां की तहां ठहरी है। बता दें कि रविवार को काबीना मंत्री मेनका गांधी ने पूरनपुर जाते वक्त जंगल में आग देखी तो टाइगर रिजर्व के गढ़ा चेकपोस्ट पहुंच गईं।

वहां पर उन्होंने वनकर्मियों को लापरवाही के लिए फटकार लगाई और इसकी शिकायत जिलाधिकारी व वन विभाग के अधिकारियों से भी की। इसके कुछ देर बाद ही एक संविदा वनकर्मी ने मेनका गांधी पर गाली-गलौज व मारपीट का आरोप लगाते हुए प्रदेश सरकार के राज्यमंत्री हाजी रियाज से शिकायत की। इस मामले की तहरीर भी गजरौला थाने में दी गई, इसके बाद पुलिस ने एसआइ जोगन यादव को जांच सौंप दी। इधर, जिले में प्रदेश सरकार के वन राज्यमंत्री की मौजूदगी के बावजूद केंद्रीय मंत्री की शिकायत पर पूरा महकमा खामोश बैठा रहा। 36 घंटे तक वन विभाग के किसी स्थानीय अधिकारी ने भी मौका मुआयना तक की जरूरत नहीं समझी। मंगलवार को जागरण में खबर प्रकाशित होने के बाद प्रमुख वन संरक्षक बरेली रुहेलखंड जोन एमपी सिंह ने डीएफओ कैलाश प्रकाश व एसडीओ डीपी ¨सह ने माला रेंज के गढ़ा चेकपोस्ट पहुंचकर मौका मुआयना किया। बताया गया है कि वहां करीब ढाई हेक्टेअर में राख मिलने से आग लगने की पुष्टि हुई। वन विभाग के अधिकारियों ने चेकपोस्ट पर तैनात कर्मचारियों से पूछताछ भी की। प्रमुख वन संरक्षक ने डीएफओ टाइगर रिजर्व से पूरे मामले की जांच के बाद रिपोर्ट मांगी है। डीएफओ ने बताया कि मामले की जांच कराई जा रही है। इधर वनकर्मी रूपलाल की ओर से केंद्रीय मंत्री मेनका गांधी के खिलाफ लगाए गए मारपीट के आरोपों के मामले में गजरौला पुलिस की जांच अभी ठहरी हुई है। दूसरे दिन भी शिकायतकर्ता का बयान नहीं हो सका। बता दें कि इस मामले में मेनका गांधी ने पहले ही आरोप के पीछे बचाव की पेशबंदी बताते हुए मुख्यमंत्री से व विभाग की लापरवाही पत्र भी भेजा है।

 

 

 

As posted in Jagran.com

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