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पीलीभीत टाइगर रिज़र्व में बढ़ा बंगाल फ्लोरिकन का कुनबा

पीलीभीत टाइगर रिज़र्व में बढ़ा बंगाल फ्लोरिकन का कुनबा

May 6, 2015

पीलीभीत: जंगल के लिए यह शुभ संकेत है कि यहां विलुप्तप्राय पक्षी बंगाल फ्लोरिकन्स का कुनबा बढ़ रहा है। इधर लगातार जंगल में लगे कैमरों में कैद हुए इन पक्षियों के चित्रों से माना जा रहा है कि पिछले तीन वर्षों में इनकी संख्या में दोगुना से ज्यादा इजाफा हुआ है। पूरी दुनिया में इस प्रजाति के बमुश्किल एक हजार पक्षी ही शेष बचे हैं। आइयूसीएन ने अपनी रेड डाटा बुक में इसे क्रिटिकली एन्डेंजर्ड की श्रेणी में रखा है। अब टाइगर रिजर्व प्रशासन ने बंगाल फ्लोरिकन्स के संरक्षण की विशेष तैयारी शुरू की है। बंगाल फ्लोरिकन्स पक्षी हबरोपसिस वर्ग का इकलौता सदस्य है, जो भारतीय उपमहाद्वीप के अलावा दक्षिण पूर्व एशिया के कुछ और देशों में पाया जाता है। भारत में भी इसकी सर्वाधिक संख्या बंगाल में पाई जाती है, इसीलिए इसे बंगाल बस्टर्ड भी कहते हैं। इस पक्षी की ऊंचाई करीब 22 इंच तक होती है। नर पक्षी के पर काले होने के साथ ही सिर पर लंबी कल्ली होती है। मौर की भांति चमकीले पंख बेहद सुंदर दिखते हैं। आम तौर पर यह पक्षी शांत रहते हैं। छेड़ने पर चिक-चिक की आवाज करते हैं। ज्यादा नमी या बारिश के दिनों में पानी से दूर चले जाते हैं। हालाकि इनके उड़ने की क्षमता मात्र कुछ किलोमीटर की ही होती है। पीलीभीत टाइगर रिजर्व के प्रभागीय वनाधिकारी कैलाश प्रकाश के मुताबिक पूरी दुनिया में बंगाल फ्लोरिकन्स की संख्या मात्र एक हजार ही बची है। इसमें भी करीब 400 पक्षी भारत में हैं।

bengla florican

तीस साल पहले 40 थे अब 200 हैं

तराई के जंगल में 1985 से 1991 के बीच गणना में 40 पक्षी पाए गए। 2001 में तराई के जंगलों में इनकी संख्या बढ़कर सौ पहुंच गई। इसमें भी पीलीभीत के माला, महोफ और बराही रेंज इनकी संख्या सात रही। इधर, जंगल के कैमरों में कई बार बंगाल फ्लोरिकन्स के चित्र कैद हुए हैं। ऐसे में अनुमान है कि इस प्रजाति के पक्षियों के कुनबे में दो गुना तक वृद्धि हुई है।

बंगाल फ्लोरिकन के लिए मुफीद है तराई का जंगल

विश्व प्रकृति निधि संस्था के तराई आर्कलैंड ने वर्ष 2013 में बंगाल फ्लोरिकन्स के संरक्षण के लिए टाइगर रिजर्व जंगल में प्रयास किया था। उस वक्त इंग्लैंड के प्रख्यात पक्षी विज्ञानी ई. बारबर ने जंगल का भ्रमण भी किया था। तब यह बात सामने आई थी कि दुर्लभ प्रजाति के इस पक्षी के लिए तराई का जंगल बेहद मुफीद साबित हो रहा है। तराई में सोनारीपुर व किशनपुर की झाड़ियों के अलावा पीलीभीत, गोंडा, बहराइच, श्रावस्ती व नेपाल के शुक्ला फांटा लाइल्ड लाइफ रिजर्व में भी बंगाल फ्लोरिकन्स पक्षी पाए गए थे। तराई नेचर कंजरवेशन सोसायटी के सचिव डा. विजय प्रकाश ने बताया कि यह खुशी की बात है कि दुनिया के इस विलुप्तप्राय प्रजाति के पक्षी का कुनबा तराई के जंगल में लगातार बढ़ रहा है। इसे संरक्षित किए जाने की आवश्यकता है।

 

 

As posted in Jagran.com

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