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ये कैसी विडंबना: एक भाई शिकारी दूसरे पर बाघ बचाने की जिम्मेदारी

ये कैसी विडंबना: एक भाई शिकारी दूसरे पर बाघ बचाने की जिम्मेदारी

Apr 25, 2015

इसे विडंबना नहीं तो आखिर क्या कहेंगे। तीन जिन लोगों को पुलिस एवं वन विभाग की टीम ने बाघों के शिकार मामले में गिरफ्तार किया है और निशानदेही पर बाघों के अंग भी बरामद किए हैं, उनके परिजन आज भी वन विभाग में मुलाजिम हैं। उनके खिलाफ न तो कोई विभागीय कार्रवाई की गई और न ही जांच के दायरे में लिया गया। 19 मार्च को पुलिस ने हजारा थाना क्षेत्र के ग्राम नहरौसा के फरियाद, मुश्ताक व रिजवान को बाघ के अंगों की तस्करी के आरोप में तीन लोगों को गिरफ्तार किया था। बाघों के नाखून व हड्डियां भी मिली थीं। वन विभाग की टीम ने रिमांड पर लेकर पूछताछ की तो उन्होंने चार बाघों की खाल होने की बात भी स्वीकारी। एसटीएफ ने जब इन तस्करों का मोबाइल सर्विलांस पर लगा रखा था तो चार बाघों की खाल के सौदे की बात प्रकाश में आई थी। प्रत्येक खाल की कीमत 16 लाख रुपये बताई गई थी। बाद में पुलिस ने इन्हें गिरफ्तार कर जेल भेज दिया। खुद एसटीएफ ने वन विभाग को सूचित किया था कि आरोपी की कुछ वनकर्मियों से बातचीत होती रही। वन विभाग इसका विवरण भी एसटीएफ से मांगा, लेकिन वन विभाग के मुताबिक अभी तक विवरण नहीं मिल सका। दो आरोपी फरियाद एवं मुश्ताक सगे भाई हैं। फरियाद पहले वन विभाग में वाचर भी रहा। बड़ा भाई ताज मोहम्मद व भतीजा रियाज अभी भी संपूर्णानगर रेंज (लखीमपुर खीरी) में वन विभाग में कार्यरत है। इधर बीते दिनों जब पुलिस अधीक्षक ने तीनों आरोपी तस्करों के खिलाफ गैंगस्टर एक्ट के तहत कार्रवाई करते हुए धारा 14 (1) के तहत संपत्ति जब्त ने की कार्रवाई शुरू की तो उनके परिजनों उल्टे पुलिस पर ही उत्पीड़न का आरोप लगाते हुए सत्ताधारी पार्टी के स्थानीय विधायक की शरण में पहुंच गए। विधायक ने उन्हें मदद का आश्वासन भी दिया। खास बात यह भी है कि पिछले दिनों एसटीएफ, डब्लूसीसीबी व वन विभाग की संयुक्त कार्रवाई में पाया था कि वन दारोगा शिवपाल व वन रक्षक सियाराम की शिकारियों के साथ मोबाइल पर बात होती थी। इसके बाद वन दारोगा शिवपाल को निलंबित कर दिया गया और सियाराम को टाइगर रिजर्व के हेड क्वार्टर से अटैच कर दिया गया।

नहर पटरी पर जमीन में दबी हड्डियां बरामद

बाघ का शव पाए जाने के दूसरे दिन ही हरदोई ब्रांच नहर पटरी पर जमीन में किसी वन्यजीव की अस्थियां दबी होने से सनसनी फैल गई। अस्थियों को जब बाहर निकाला गया तो वह नीलगाय की होना बताया गया है। मामले को लेकर वनाधिकारी अनजान बने रहे।1डगा पुल के पास बाइफरकेशन मार्ग पर गुरुवार को बाघ का शव बरामद किया गया था। शुक्रवार को फिर कुछ लोगों ने दूसरी और कच्ची नहर पटरी पर एक स्थान पर जमीन में दबी अस्थियों को देखा। इसकी जानकारी पर कुछ वन कर्मियों ने मौके पर जाकर देखा भी लेकिन बताने के नाम पर अनजान बन गए। इसके बाद चर्चा बाघ की अस्थियां होने पर मौके पर टरक्वाइज वाइल्ड लाइफ सोसायटी के अध्यक्ष अख्तर मियां खां टीम के साथ पहुंच गए। उनके द्वारा जांच के बाद अस्थियों को बाहर निकाला गया तो बाघ की नहीं पाई गई। उन्होंने अस्थियां बाघ की न होना बताते हुए किसी अन्य वन्यजीव का होना बताया है। इस मामले की खासी चर्चा रही। उधर डीएफओ कैलाश प्रकाश ने बताया कि जंगल में अस्थियां पाने की कोई जानकारी नहीं है।

कैबिनेट मंत्री मेनका ने सीएम को लिखा पत्र

पीलीभीत : केंद्रीय महिला एवं बाल विकास मंत्री मेनका संजय गांधी ने पीलीभीत टाइगर रिजर्व में बाघ की मौत पर दु:ख जताया है। कैबिनेट मंत्री ने सूबे के मुख्यमंत्री अखिलेश यादव को पत्र भेजकर बाघों के संरक्षण की दिशा में कदम उठाने की मांग की है। 1पीलीभीत टाइगर रिजर्व की बराही रेंज के हरदोई ब्रांच नहर में बाघ का शव उतराता हुआ मिला था। बाघ का पोस्टमार्टम हो चुका है। केंद्रीय महिला एवं बाल विकास मंत्री मेनका गांधी ने उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री अखिलेश यादव को पत्र भेजकर बाघों की हत्याओं की ओर ध्यान दिलाया है। मुख्यमंत्री को भेजे गए पत्र में कहा गया है कि टाइगर रिजर्व क्षेत्र में आएदिन बाघों व अन्य जानवरों के आकस्मिक मृत्यु हो रही है, जो वन्यजीव संरक्षण के लिए सही नहीं है। आपको संज्ञान दिलाना चाहती हूं कि यह क्षेत्र जब से टाइगर रिजर्व घोषित हुआ है, तब से यहां पर आएदिन एक न एक घटना घटित हो रही है, लेकिन कोई भी अधिकारी इस ओर ध्यान नहीं दे रहे हैं। इस संबंध में कोई आवश्यक कदम उठाए जा रहे हैं। कैबिनेट मंत्री श्रीमती गांधी ने मांग की है कि बाघ संरक्षण की दिशा में आवश्यक कार्यवाही की जाए, जिससे जंगल में रहने वाले शेष जानवरों को बेहतर ढंग से संरक्षित किया जा सकेगा।

 

 

As posted in Jagran.com

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