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नहीं खोई है मगरमच्छ मारने वाली “मछली”

नहीं खोई है मगरमच्छ मारने वाली “मछली”

Jan 30, 2014

नहीं खोई है मगरमच्छ मारने वाली "मछली"

जयपुर। अपनी अद्भुत क्षमताओं के कारण देश भर में चर्चित रणथम्बौर नेश्नल पार्क की बाघिन ‘मछली’ के लापता होने की खबरों के बीच पार्क प्रशासन उसे लेकर बिल्कुल आश्वस्त है। पार्क प्रशासन का मानना है कि ऐसा कुछ भी नहीं कि मछली कहीं खोई या लापता हो गई है। मछली के पगमार्क पार्क में मिले हैं, जिससे साबित होता है कि वो
पार्क में ही विचरण कर रही है

रणथम्भौर नेशनल पार्क के डिप्टी कन्जर्वेटर (डीसीएफ) राहुल भटनागर ने पत्रिका डॉट कॉम से बातचीत में मछली के लापता होने की आशंका को सिरे से नकार दिया है। उन्होंने दावा किया कि मछली वहीं है। उसके ताजा पगमार्क प्रशासन को मिले हैं। भटनागर ने कहा कि ऎसा कई बार हो जाता है कि टाइगर कई कई दिनों तक दिखाई नहीं देते। लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि वह गायब या लापता हो गया है। उन्होंने बतौर उदाहरण बताया कि बूंदी में एक टाइगर तो आठ माह बाद मिला था।

गौरतलब है कि हाल ही मीडिया में ऎसी खबरें आई थीं कि रणथम्भौर की रानी के नाम से मशहूर बाघिन मछली नौ जनवरी के बाद से दिखाई नहीं दी है।

सर्दी तो नहीं कारण?

वन्य जीवों के जानकारों का कहना है कि तेज सर्दी के दिनों में टाइगर कई बार कोई सुरक्षित ठिकाना ढूंढ लेते हैं। ऎसे में वे कई दिनों तक सामान्य विचरण के लिए बाहर नहीं आते। पिछली बार रणथम्भौर की ही एक और बाघिन टी-13 भी कई दिनों तक दिखाई नहीं दी थी। ऎसा ही कारण मछली के साथ भी हो सकता है।

जब मछली ने मगरमच्छ को मार गिराया 

वर्ष 1997 में पार्क में पहली बार दिखी मछली को यहां टी-16 नाम से जाना जाता है। मछली का सबसे सनसनीखेज कारनामा तब सामने आया जब उसने पार्क में स्थित झील में रहने वाले एक 14 फुट लम्बे दैत्याकार मगरमच्छ को “जंगली जंग” के दौरान मार दिया था।

जानकारों के अनुसार यह संभवत: दुनिया में अपनी तरह का पहला युद्ध था, जब एक बाघ ने मगरमच्छ को मारा हो। और भी अनूठा यह है कि वन्यजीव प्रेमी इस जंग का लाइव वीडियो भी बनाने में भी सफल रहे। इस कारनामे के बाद मछली रणथम्भौर की रानी कहाने लगी। मछली ने जब सबसे पहले अपने दो शावकों को जन्म दिया तो इनकी रक्षा के तरीकों को लेकर भी वह खासी चर्चित रही है।

As posted in patrika.com

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