Roar for Tigers

पीलीभीत टाइगर रिज़र्व में वन दारोगा व वनरक्षक को समझाई गई प्राथमिक चिकित्सा

पीलीभीत टाइगर रिज़र्व में वन दारोगा व वनरक्षक को समझाई गई प्राथमिक चिकित्सा

May 31, 2015

पीलीभीत : डब्ल्यूडब्ल्यूएफ के तत्वावधान में पशु चिकित्सालय ललौरीखेड़ा में एक दिवसीय कार्यशाला का आयोजन किया गया, जिसमें घायल वन्यजीवों को प्राथमिक चिकित्सा देने के बारे में जानकारी दी गई। सामाजिक वानिकी प्रभाग में काले हिरन, सारस, मोर समेत कई प्रजातियों के वन्यजीव पाए जाते हैं। इनके संरक्षण के लिए कोई व्यवस्था नहीं है। कभी कभार ये वन्यजीव घायल हो जाते हैं। समय रहते इलाज न मिल पाने की वजह से वन्यजीवों की मौत हो जाती है। शनिवार को डब्ल्यूडब्ल्यूएफ की ओर से घायल वन्यजीवों को प्राथमिक चिकित्सा मुहैया कराने के संबंध में ललौरीखेड़ा में कार्यशाला आयोजित की गई। प्रभारी पशु चिकित्सा अधिकारी डा.राजुल सक्सेना ने वन कर्मचारियों को घायल वन्यजीवों को प्राथमिक चिकित्सा देने के बारे में विस्तार से बताया।

-File Photo

 

घायल वन्यजीवों के इलाज की दी जानकारी

उन्होंने बताया कि अगर कोई वन्यजीव घायल हो जाता है, तो उसे प्राथमिक इलाज देने के बाद अस्पताल ले जाना चाहिए। सबसे पहले घटनास्थल का निरीक्षण कर वन्यजीव के अंगों को सही करना चाहिए। अगर शरीर से रक्तस्नाव हो रहा है, तो उसे रोकने के लिए उपाय किए जाए। पैर की हड्डी टूटने पर लकड़ी बांध दी जाए। वन्यजीवों के शरीर का बाया हिस्सा ऊपर रखकर लाना चाहिए। घायल हिरन को काले कपड़े में ढककर लाया जाना चाहिए, जिससे उसे मौत से बचाया जा सकेगा। इस मौके पर प्रभागीय निदेशक आदर्श कुमार, नरेश कुमार, रेंजर वीरपाल सिंह, कुंज मोहन वर्मा आदि मौजूद रहे।

सहायक निदेशक ने पशु अस्पताल का किया निरीक्षण

पीलीभीत : सहायक निदेशक (पशुपालन) बरेली मंडल डा.एनपीएस गहलौत ने शनिवार को सदर पशु अस्पताल का औचक निरीक्षण किया। उन्होंने सदर अस्पताल के कामकाज के बारे में कर्मचारियों से जानकारी हासिल की। पशुपालकों को गर्मी के मौसम में सावधानी बरतने की सलाह दी है। शनिवार को बरेली मंडल के सहायक निदेशक (पशुपालन) डा. गहलौत सदर पशु अस्पताल पहुंचे। उन्होंने सबसे पहले पशु अस्पताल का निरीक्षण किया। अस्पताल परिसर में जर्जर भवनों के बारे में जानकारी हासिल की। इसके बाद सहायक निदेशक ने विभागीय योजनाओं की प्रगति की समीक्षा की। अस्पताल में पशुओं के होने वाली इलाज के बारे में कर्मचारियों से पूछा। डा. गहलौत ने पशु चिकित्सा अधिकारी को बेहतर इलाज दिए जाने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि गर्मी के मौसम में पशुओं को सूखी चरी नहीं खिलानी चाहिए। इससे पशुओं में विभिन्न प्रकार के रोग लग सकते हैं। पशुओं को ठंडे स्थान पर बांधना चाहिए। पशुओं को दिन में दो बार नहलाना चाहिए। उन्होंने पशुपालकों को सलाह दी है कि अगर नया भूसा है, तो पानी में भिगोकर और ठंडा कर पशुओं को खिलाना चाहिए।

 

 

As posted in Jagran.com

468 ad

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *