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जंगल में अपराध हुए कम, अपराधी भी गए जेल – डीएफओ कैलाश

जंगल में अपराध हुए कम, अपराधी भी गए जेल – डीएफओ कैलाश

Sep 23, 2014

पीलीभीत जैसे छोटे से शहर को टाइगर रिज़र्व  का दर्जा मिलना किसी सपने के पूरे होने से कम नहीं है। इस उपलब्धि से पहले इस शहर का वजूद एक दायरे तक ही सिमटा हुआ था। कोई इसे बांसुरी का शहर कहकर पुकारता था, तो कोई इसे प्रसिद्ध राजनेता घराने की बहू मेनका गांधी के शहर के नाम से जानता था। हां, पीलीभीत का घना जंगल भी लोगों की ज़ुबान पर चढ़ा हुआ था लेकिन अब शहर के इसी जंगल को एक नई पहचान मिली है। अब पीलीभीत, पीलीभीत टाइगर रिज़र्व के नाम से जाना जाएगा। एक राष्ट्रीय निशानी के तौर पर। यहां तक पहुंचने में भी पीलीभीत को बरसों का इंतज़ार करना पड़ा। लेकिन अब पीलीभीत अपनी असल पहचान हासिल करने के मुकाम पर खड़ा है जहां लोगों की सहभागिता, उनकी मेहनत और जागरुकता ही इस शहर को वैश्विक पटल पर ला सकती है।  पीलीभीत टाइगर रिज़र्व की वेब टीम ने पीलीभीत के डीएफओ कैलाश प्रकाश से खास बातचीत की, जिसमें उन्होंने बताया कि आने वाले दो वर्षों में पीलीभीत में पर्यटन की अपार संभावनाएं खुल जाएंगी। पेश हैं पीलीभीत के डीएफओ यानी प्रभागीय वनाधिकारी कैलाश प्रकाश के साथ बातचीत के कुछ अंश –

प्रश्न – पीलीभीत टाइगर रिज़र्व का प्रस्ताव तो कई वर्षों से था लेकिन इसे अब जाकर मंज़ूरी मिली है, आपकी देखरेख में इस काम को आगे बढ़ाया जा रहा है, कितना उत्साह है और साथ ही ये आपके लिए कितनी बड़ी चुनौती है?

उत्तर – पीलीभीत टाइगर रिज़र्व, शासन द्वारा विज्ञप्ति सं0 1783/14-4-2014-872/2007 टी0सी0आई0 दिनांक 09.6.2014 को घोषित किया गया है। मेरे द्वारा पीलीभीत टाइगर रिज़र्व, का चार्ज 19.7.2014 को ग्रहण किया गया है। पीलीभीत टाइगर रिर्ज़व में काम करना काफी चुनौतीपूर्ण कार्य है। लेकिन विश्वास है कि प्रभाग में तैनात समस्त कर्मचारियों के सहयोग एंव पीलीभीत की जनता के सहयोग से काफी हद तक आने वाली चुनौतियों का सामना करते हुए पीलीभीत टाइगर रिज़र्व के कार्यों को आगे बढ़ाया जायेगा तथा वन अपराधों पर नियन्त्रण करने का प्रयास किया जायेगा।

प्रश्न – जंगल में कई तरह की आपराधिक गतिविधियां लगातार चल रही हैं, कभी जानवर का शिकार किया जा रहा है तो कभी अवैध कटान देखने को मिल रहा है, इसके जल्द रोकने के लिए क्या क़दम उठाए जा रहे हैं?

उत्तर – जगंल में कोई अपराधिक गतिविधि नहीं चल रही है। यदा-कदा अपराधियों द्वारा जानवरों का शिकार व अवैध कटान की शिकायते मिलती हैं । मेरे द्वारा पीलीभीत टाइगर रिज़र्व का चार्ज 19.7.2014 को लिया गया था तब से अब तक 15 मामले प्रकाश में आये हैं जिन्में 30 अपराधियों को नामित किया गया है। 30 अपराधियों में से 13 अपराधियों को जेल भेजा जा चुका है। दिनांक 6.9.2014 को 3 व्यक्तियों को माला रेंज के अन्तर्गत सागौन के पेड़ काटते पकडा गया था तीनों अपराधियों को पब्लिक द्वारा दी गयी सूचना के आधार पर पकड़ा गया तथा समस्त प्रकाष्ठ व अपराधियों द्वारा लाई गई गाड़ी पिकप को भी मौके से पकड़ा गया तथा अपराधियों को जेल भेजा गया । अपराधियों की ज़मानत मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट तथा दिनांक 19.9.2014 को मा0 जि़ला जज पीलीभीत द्वारा खारिज की जा चुकी है। मौके से पकड़ी गयी पिकप वाहन को ज़ब्ती की कार्यवाही की जा रही है।

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प्रश्न – पीलीभीत  टाइगर रिज़र्व घोषित होने के बाद जंगल में शिकारियों की गतिविधियां तेज़ हो गईं हैं क्या वो इसलिए क्योंकि टाइगर रिज़र्व घोषित होने के बाद यहां सख़्ती हो जाएगी लिहाज़ा इससे पहले ही अपने काम को वो अंजाम देना चाहते हैं? ऐसा है तो इसको रोकने के लिए क्या इंतज़ाम किए गए हैं?

उत्तर – पीलीभीत टाइगर रिज़र्व में शिकारियों की कोई गतिविधियां नहीं चल रही हैं । यदि ऐसा कोई मामला प्रकाश में आयेगा तो अपराधियों के विरूद्ध वन्य जीव संरक्षण अधिनियम के प्राविधानों के तहत कार्यवाही की जायेगी। वन्य जीव अपराधों को रोकने हेतु मेरे द्वारा स्वंय तथा अन्य अधिकारियों व कर्मचारियों द्वारा लगातार गश्त की जा रही है। इसी वजह से 2 माह में 30 अपराधियों के विरूद्ध सख्त कार्यवाही की गयी है। यह प्रयास आगे भी जारी रहेंगे।

प्रश्न – पीलीभीत की सीमा नेपाल से भी जुड़ती है जहां से भी शिकारी और कई तरह की आपराधिक गतिविधियां संचालित होती हैं उसको रोकने के लिए सरकार की तरफ से क्या क़दम उठाए गए हैं?  

उत्तर- पीलीभीत टाईगर रिजर्व की सीमा नेपाल तथा लखीमपुर के जंगलों से मिलती है। इसके लिए विशेष निगरानी रखी जा रही है तथा लगातार गश्त की जा रही है।

प्रश्न- जंगल के आसपास कई गांव हैं जिनकी निर्भरता जंगल पर है। इन गांव और गांववालों के रोज़गार के लिए क्या सरकार के पास कोई प्लान है?

उत्तर – पूर्व में जंगल के आस-पास के गांव के ग्रामीण जंगलों से जलौनी लकड़ी व अन्य लघु वन उपज प्राप्त करते रहे होगें लेकिन पीलीभीत टाइगर रिज़र्व बनने के बाद परिस्थितियाॅं बदल चुकी हैं तथा ग्रामीणों को प्रचार-प्रसार के माध्यम से बदले हुए कानून का प्रचार-प्रसार किया जा रहा है। जिससे ग्रामीण जागरूक हो सकें। टाइगर रिज़र्व के विकास हेतु योजना भारत सरकार को भेजी गयी है। बजट अनुमोदन उपरान्त स्थानीय नागरिकों को रोज़गार उपलब्ध कराया जायेगा। ग्रामीणों को अन्य रोज़गार जैसे टूरिस्ट गाइड का प्रशिक्षण दिलाया जायेगा।

प्रश्न – गांववाले घर के खाने के लिए लकड़ियों का इस्तेमाल करते हैं और इसके लिए वो जंगल में जाकर या तो लकड़ियां बीनते हैं या फिर पेड़ काटते हैं, इसके लिए क्या प्रबंध किए गए हैं?

उत्तर – गांव वाले घर में खाना बनाने हेतु लकडी लाते रहे होगें । वर्तमान में प्रचार-प्रसार के माध्यम से बताया जा रहा है कि टाइगर रिज़र्व होने के बाद लकड़ी का कटान व अन्य गतिविधियाॅ पूर्ण रूप से बन्द हो गयी हैं। जंगल के आस-पास रहने वाले ग्रामीणों को डब्लू0डब्लू0एफ0 (WWF) के सहयोग से सब्सिटी रेट पर गैस व चूल्हा उपलब्ध कराया जा रहा है। विभाग द्वारा भी जायका योजना में प्रावधान किया जायेगा। जंगल के आस-पास रहने वाले परिवारों को कम दर पर एल0पी0जी0 गैस सिलेण्डर व चूल्हा उपलब्ध कराया जायेगा जिससे ग्रामीणों के खाना बनाने हेतु ईधन पर निर्भरता जंगलों पर से कम हो सके।

प्रश्न – जंगल में अभी कई ऐसे रास्ते है जहां सीधे आसानी से प्रवेश किया जा सकता है.. इसके लिए क्या कोई कदम उठाए गए हैं?

उत्तर – जंगल के रास्तों पर सीधे प्रवेश नहीं किया जा सकता। कई रास्ते बन्द कर दिए गए हैं। यदि जनता को विषम परिस्थितियों में किन्ही रास्तों का प्रयोग करना हो तब अनुमति लेकर वे जा सकते हैं।

प्रश्न – पीलीभीत टाइगर रिज़र्व में टूरिज्म बढ़ाने के लिए आपके पास क्या प्लान है?

 उत्तर – पीलीभीत टाइगर रिज़र्व में टूरिज़्म बढ़ाने के उददेश्य से योजना बनाकर भारत सरकार को भेजी गयी जिससे रेस्ट हाउस, मरम्मत आदि का कार्य रखा गया है। 2 स्थानाों पर गढ़ा एंव महोफ मेे गेट बनाने तथा पर्यटकों को अन्य सुविधाये उपलब्ध कराने का कार्य किया जायेगा।

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प्रश्न – पीलीभीत टाइगर रिज़र्व अभी सिर्फ घोषित हुआ है, पर्यटकों को इस पार्क का पूरी तरह से आनंद उठाने में अभी कितना समय और लगने वाला है?

उत्तर –  पीलीभीत टाइगर रिज़र्व में वर्तमान में 7 वन विश्राम भवन उपलब्ध हैं। जिनमें 17 सूट पर्यटकों के ठहरने के लिए उपलब्ध हैं। पर्यटको को अन्य सुविधायें उपलब्ध कराने हेतु प्रयास किया जायेगा तथा लगभग 2 वर्षों पश्चात पीलीभीत टाईगर रिजर्व में समस्त सुविधायें उपलब्ध होगीं।

प्रश्न – WWF के साथ क्या आपकी भागीदारी है? अगर है तो किस तरह से पीलीभीत वन विभाग WWF के साथ मिलकर काम कर रहा है?

उत्तर – डब्लू0डब्लू0एफ0 (WWF) के द्वारा सहयोग किया जा रहा है। डब्लू0डब्लू0एफ0 द्वारा टाइगर गणना की जाती है तथा कर्मचारियों को बहुत सारी सुविधायें भी उपलब्ध करायी जा रही हैं। ग्रामीणों को सस्ते दर पर एल0पी0जी0 गैस व चूल्हे उपलब्ध कराये गये हैं।

प्रश्न – जंगल में ज्यादातर रात में कटान होते हैं या फिर पशुओं पर शिकारी हमला करते हैं क्या रात में आपकी कोई टीम तत्पर रहती है?

उत्तर – पीलीभीत टाइगर रिज़र्व में विभाग के अधिकारी एंव कर्मचारी टोली बनाकर रात मेें भी गश्त करते हैं तथा सूचना मिलने पर तुरन्त कार्यवाही करते हैं।

प्रश्न – क्या गांववाले भी आपकी टीम के साथ मिलकर काम करते हैं? गांववाले किस तरह अपनी भागीदारी निभाते हैं?

उत्तर – गांव वाले मुख्य रूप से वन अपराधों की सूचना देने का कार्य करते है।

प्रश्न – पीलीभीत टाइगर रिज़र्व की तरफ से पीलीभीत वासियों  को आप क्या संदेश देना चाहते हैं?          

उत्तर – पीलीभीत टाइगर रिज़र्व घोषित होने पर पीलीभीत वासियों को बहुत बधाई तथा समस्त जनपद वासियों से सहयोग की अपील की गयी है।

 

 

 

-पीलीभीत टाइगर रिज़र्व वेब टीम

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