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भारत में 3 साल में 30 फीसदी बढ़कर 2,226 हुए बाघ

भारत में 3 साल में 30 फीसदी बढ़कर 2,226 हुए बाघ

Jan 21, 2015

पर्यावरण, वन जीव और बाघ प्रेमी लोगों के लिए खुशखबरी है। देश में बाघों की तादाद 2011 में 1,706 थी, जो 2014 में बढ़कर 2,226 हो गई है। पर्यावरण मंत्री प्रकाश जावड़ेकर ने बाघों की नई संख्या के आंकड़े जारी किए हैं। भारत में दुनिया के कुल 70 फीसदी बाघ रहते हैं, जिसमें पिछले 3 सालों में 30 फीसदी की बढ़ोतरी हुई है। जावड़ेकर ने कहा कि दुनिया भर में बाघों की संख्या तेजी से घट रही है, लेकिन भारत में बढ़ रही है। यह बड़ी खुशखबरी है। बाघों की गिनती के बारे में बताते हुए उन्होंने कहा कि इतने बड़े स्तर पर ऐसा काम कभी नहीं किया गया था। आज हमारे पास भारत के 80 फीसदी बाघों की तस्वीरें हैं। अगर 2008 से तुलना की जाए, तो ताजा आंकड़े बेहतरीन लगते हैं। 2008 में बाघों की संख्या 1,411 थी। देश में बाघों की गिनती हर तीन साल बाद नैशनल टाइगर कंजर्वेशन अथॉरिटी (NTCA) करती है। 2011 की टाइगर सेंसस रिपोर्ट के मुताबिक, देश में 1,706 बाघ रह गए थे। ये बाघ देश के 17 राज्यों से थे। ताजा टाइगर सेंसस के आंकड़े बताते हैं कि कर्नाटक में सबसे ज्यादा टाइगर हैं जो कि 1.5 साल और उससे ज्यादा की उम्र के हैं।
राज्य में इस उम्र के 408 बाघ हैं और उसके बाद दूसरा नंबर उत्तराखंड का है जहां पर 340 बाघ हैं। मध्य प्रदेश में 308 बाघ, तमिलनाडु में 229, महाराष्ट्र में 190, असम में 167, केरल में 136 और यूपी में 117 हैं। 2008 की टाइगर सेंसस रिपोर्ट में बाघों के इलाके छह श्रेणियों में बांटे गए थे। ये थे – शिवालिक-गंगा का मैदान, मध्य भारत का इलाका, पूर्वी घाट, पश्चिमी घाट, उत्तर-पूर्वी पहाड़ियां और ब्रह्मपुत्र का मैदान और सुंदरबन। बाघों की संख्या में इजाफा के लिए जावड़ेकर ने अधिकारियों, वन्यकर्मियों, सामुदायिक भागीदारी और वैज्ञानिक सोच को श्रेय दिया। उन्होंने कहा कि यही वजह है कि हम अधिक बाघ अभयारण्य बनाना चाहते हैं। यह भारत की विविधता का प्रमाण है और यह दिखाता है कि हम किस तरह से जलवायु परिवर्तन को लेकर गंभीर हैं। मानव-पशु संघर्ष के बारे में बात करते हुए पर्यावरण मंत्री ने कहा कि इस संबंध में ‘प्रभावी’ कदम उठाए जा रहे हैं। जहां तक हाथियों की बात है तो यह समस्या और विकट हो जाती है। बाघों के साथ संघर्ष में जहां सात लोग मारे जाते हैं, वहीं हाथियों के संदर्भ में यह संख्या 100 के करीब पहुंच जाती है। पशुओं के रहने के लिए हम अधिक हरित क्षेत्र और जल क्षेत्र का निर्माण कर रहे हैं ताकि पशु वहां रह सकें।
As posted in Navbharattimes.indiatimes.com

 

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