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भारतीय बाघों पर तस्करों की नजर!

भारतीय बाघों पर तस्करों की नजर!

Aug 25, 2014

लखनऊ। यौन शक्तिवर्धक दवाएं बनाने के लिए अब बाघों की धड़ल्ले से हत्या की जा रही है। चीन में बाघ की हड्डियों, नाखूनों व अन्य उनके शरीर के अंगों से ऐसी दवाएं बनाई जा रही हैं। बाघों की हड्डियों के सौदागर दुधवा टाइगर रिजर्व व कतर्नियाघाट वन्य जीव विहार को अपनी पंसदीदा शिकारगाह मान रहे हैं। लंदन की एनवायरमेंट इन्वेस्टिगेशन एजेन्सी ने एक अपनी रिपोर्ट में खुलासा किया चीन में बाघ की हड्डियों से यौनशक्ति वर्धक दवाएं धड़ल्ले से बनायी जा रही हैं। जबकि चीन में 1993 से बाघ के किसी भी अंग का दवा के लिए उपयोग प्रतिबंधित है। एक आंकड़े के मुताबिक चीन में लगभग 200 फार्म हाउस व चिडि़याघरों में लगभग 5000 बाघ पाले गये हैं। यहां इनके मरने पर इनकी सभी अंग बेच दिये जाते हैं। इनकी हड्डियों का प्रयोग यौनशक्ति वर्धक दवाएं बनाने के लिए किया जाता है। एक रिपोर्ट के मुताबिक सौ वर्षो में एशिया से लगभग एक लाख बाघ थे मगर दवा के नाम पर मारे जाने के कारण इनकी संख्या अब नाम मात्र रह गयी है। जानकारों के मुताबिक यौनशक्ति वर्धक दवाएं बनाने के लिए बाघ के कंकाल को गला दिया जाता है। एक रिपोर्ट के मुताबिक टाइगर के हड्डी से बनने वाली दवा की कीमत100 पाउण्ड से अधिक है। बाघ को बचाने व उनकी जनसंख्या को बढ़ाने के लिए पूरी दुनिया चिन्तित है, लेकिन आज भी बाघ का शिकार करने वाले महीनों-महीनों तक जंगल के आसपास भटकते रहते हैं तथा मौका मिलते ही वे इन्हें अपना शिकार बना लेते हैं। बाघों का शिकार करने वाले शिकारी दुधवा टाइगर रिजर्व, कतर्नियाघाट वन्य जीव विहार, पीलभीत वन प्रभाग समेत नेपाल से सटे जंगल के आसपास अपना ठिकाना बनाते हैं तथा वहां पर सबसे पहले जंगल के आसपास रहने वाले चरवाहों से मिलकर बाघों के आमदरफ्त की जानकारी करते हैं उसके बाद इनको अपने जाल में फंसाकर इनकी हत्या कर नेपाल के रास्ते उठा ले जाते हैं।

एक आंकड़े के मुताबिक 28 अक्टूबर 2007 को दुधवा नेशनल पार्क के समीप संसारपुर बाघ की खाल बरामद की गयी थी लेकिन मौके से बाघ के और हिस्से गायब थे। इसी तरह 14 अगस्त 2010 को दुधवा से ही एक बाघ का पंजा बरामद किया गया था जबकि उसके अन्य हिस्से गायब थे। वर्ष 2011 में 30 जुलाई को गर्भवती बाघिन चार पहिया वाहन के चपेट मे आने से मौके पर मर गयी थी मौके पर से फरार वाहन व वाहन चालक पूरनपूर (पीलीभीत) मे पकड़ा गया था। सूत्र बताते हैं कि एक बाघ की कीमत एक करोड़ रुपये मिलती है। यही वजह है शिकारी महीनों-महीनों तक जंगल के आसपास रेलवे स्टेशन पर भीखमंगों की तरह पूरे परिवार के साथ रहते हैं। उल्लेखनीय है कि टुधवा टाइगर रिजर्व 884 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में फैला हुआ है। इसमें 10 रेंज हैं। कतर्नियाघाट वन्य जीव विहार 4009 हेक्टेयर में फैला प्राकृतिक जंगल है। यहां पर वनकर्मियों की भी कमी है।

 

 

 

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