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प्रकृति-जीवों का संरक्षण जरूरी : जिलाधिकारी

प्रकृति-जीवों का संरक्षण जरूरी : जिलाधिकारी

Jan 23, 2014

पीलीभीत के जिलाधिकारी ने कहा कि विकास की कीमत पर जैव विविधता को संरक्षित नहीं किया जा सकता। विकास के साथ ही प्रकृति एवं जीव-जंतुओं का संरक्षण होना चाहिए। प्रकृति के संसाधनों पर सभी का हक है। चाहें इंसान हो या जीव-जंतु। उन्होंने जैव विविधता के संरक्षण के लिए जन जागरुकता बढ़ाने पर विशेष जोर दिया। बुधवार को अपराह्न प्रभागीय वन विभाग कार्यालय से सभागार में हुई जैव विविधता संरक्षण जागरुकता कार्यशाला में बतौर मुख्य अतिथि जिलाधिकारी ओम नारायण सिंह ने कहा कि प्रकृति ने धरती पर जो कुछ भी दिया है, उससे कोई वंचित नहीं रहना चाहिए। विकास कार्यो में भी इसका ध्यान रखा जाना जरूरी है। सामाजिक वानिकी विभाग के प्रभागीय निदेशक रामेश्वर राय ने कहा कि अक्सर लोग अपनी खुशियों के लिए दूसरी चीजों को नजरंदाज कर जाते हैं। इसका असर वनस्पति के साथ ही जीव-जंतुओं पर भी पड़ रहा है। इसलिए ऐसे कृत्य नहीं होने चाहिए, जिससे विभिन्न तरही वनस्पतियों एवं जीवों को नुकसान पहुंचता हो। उन्होंने कहा कि फसलों की अधिकाधिक पैदावार हासिल करने के लिए रसायनिक उर्वरक एवं कीटनाशकों का इस्तेमाल काफी बढ़ गया। इससे जमीन में जो अनुकूल तत्व थे वे तेजी से नष्ट होने लगे। अब समाज में उच्च वर्ग के लोग ऐसे अनाज की मांग करते हैं जो जैविक खाद से तैयार हो। ऐसा अनाज बाजारों में काफी मंहगा बिकता है जबकि रसायनिक खाद वाला सस्ता। इसलिए लोगों की सोच बदलनी चाहिए। बगैर रसायनिक खाद के भले ही पैदावार कम हो लेकिन उसकी कीमत तो अच्छी मिल रही है। उन्होंने टाइगर का उदाहरण देते हुए कहा कि यदि उसने ऐसे जीव का शिकार किया, जिससे वह चार दिनों तक भोजन प्राप्त कर सकता है तो फिर वह भोजन के रहने तक दूसरे जीव का शिकार नहीं करेगा। इंसान को इससे सीख लेनी चाहिए। प्रभागीय वनाधिकारी राजीव मिश्रा ने कहा कि जैव विविधता के लिए जन जागरुता को बढ़ावा दिए जाने की जरूरत है। इसके लिए पर्यावरण संरक्षण के लिए कार्य कर रही संस्थाओं को आगे बढ़कर कार्य करना होगा। पर्यावरण चिंतक परवेज हनीफ ने कहा कि स्कूलों में बच्चों के माध्यम से उनकी संस्था जैव विविधता संरक्षण का अभियान चला रही है। बच्चों के माध्यम से पूरे परिवार में संदेश पहुंचता है। उपाधि महाविद्यालय के प्राचार्य डा. पीके सिंह ने कहा कि छात्र-छात्राओं के माध्यम से इसके प्रति लोगों को जागरुक करने के लिए अभियान चलाया जा सकता है। वनस्पति और विभिन्न तरह के जीव-जंतु रहने से ही पर्यावरण संरक्षित रहेगा। पर्यावरण संरक्षित होने से ही मानव जीवन के लिए अनुकूल परिस्थितियां बनी रहेंगी। कार्यशाला में सभी वन क्षेत्राधिकारी, डिप्टी रेंजर, खंड शिक्षा अधिकारी एवं जाइका के तहत गठित ग्राम वन समितियों के पदाधिकारी शामिल रहे।

As posted in Jagran.com

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