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वनकर्मियों को पीटने के बाद बनाया बंधक, 12 लोगों के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज

वनकर्मियों को पीटने के बाद बनाया बंधक, 12 लोगों के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज

Jan 31, 2015

माधोटांडा: बराही रेंज की फैजुल्लागंज बीट के जंगल से लकड़ी ला रहे दो युवकों को वनकर्मियों ने पकड़ लिया। इस दौरान युवकों के शोर मचाने पर ग्रामीणों ने वनकर्मियों को घेर लिया और उनकी पिटाई कर स्कूल में बंधक बना लिया। सूचना पर वनाधिकारी और पुलिसकर्मियों के पहुंचने पर वनकर्मी छूटे। वनकर्मी की ओर से मूसेपुर के 12 लोगों के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कराई गई है। घटना गुरुवार देर शाम की है। टाइगर रिजर्व की बराही रेंज में तैनात वनरक्षक सुरेंद्र गौतम शाम को फैजुल्लागंज चौकी पहुंचा और स्टाफ के राजेंद्र कुमार के साथ गश्त पर निकल गया। इस दौरान उन्हें दो युवक जंगल से जलौनी लकड़ी ले जाते मिले, जिन्हें वनकर्मियों ने रोक लिया। पकड़े जाने पर दोनों युवकों ने शोर मचा दिया जिस पर तमाम ग्रामीण पहुंच गए। ग्रामीण युवकों को छुड़ाने लगे। असफल रहने पर दोनों वनकर्मियों को घेरकर पिटाई कर दी। बाद में एक स्कूल में बंद कर दिया। घटना की जानकारी मिलने पर रात में ही डीएफओ कैलाश प्रकाश एवं अन्य स्टाफ बराही रेंज पहुंचे और पुलिस को सूचना दी। पुलिस व वन विभाग के अधिकारियों के गांव पहुंचने पर दोनों वनकर्मियों को छोड़ा गया। रात में ही दोनों वनकर्मियों ने थाने पहुंचकर ग्राम मूसेपुर निवासी सुरेश कुमार, चंद्र्रप्रभा सिंह, ब्रजेश, हरकेश, कंधई, मदन, संतराम, प्रेमराज, जीवन, मंजनू, मुन्ना, श्यामलाल शमा, राजेश के खिलाफ मारपीट और बंधक बनाने की तहरीर दी। पुलिस ने सभी 12 लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर लिया है। वहीं दूसरी ओर ग्रामीणों का कहना है कि दोनों वनकर्मी शराब के नशे में थे। युवकों को पीटने पर उन्होंने दोनों को स्कूल में बैठाकर खुद अधिकारियों को सूचना दी, लेकिन उन्हें उल्टा फंसाया जा रहा है।
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बराही रेंज में कई बार हो चुकी हैं घटनाएं
टाइगर रिजर्व बनने के बाद वन विभाग ने जंगल में प्रवेश बंद कर दिया है। जंगल किनारे बसे ग्रामीणों के पास ईधन का कोई साधन न होने के कारण जंगल से जलौनी की लकड़ी लाना मजबूरी है। इसी मजबूरी के चलते वह जंगल आते हैं जिससे वनकर्मियों व ग्रामीणों में मारपीट की घटनाएं कई बार हो चुुकी हैं। फैजुल्लागंज में वनकर्मियों से हुई मारपीट की घटना नई नहीं है। इससे पूर्व भी तत्कालीन वन दरोगा आरिफ जमाल, सत्तार एवं अन्य के साथ भी इसी बीट में मारपीट हुई थी। उस समय भी जंगल से लकड़ी लाने पर ही विवाद हुआ था। दरअसल टाइगर रिजर्व घोषित होने से पूर्व जंगल किनारे बसे गांव के लोग जंगल से जलौनी की लकड़ियां लाते थे, लेकिन अब इस पर रोक लगा दी गई है। फिलहाल ग्रामीणों के पास ईधन का कोई दूसरा विकल्प नहीं है। विवश होकर बराही रेंज के फैजुल्लागंज, नौजल्हा नकटा, बूंदीभूड़, सेल्हा सहित दर्जनों गांव के लोग जंगल से लकड़ियां लाकर चूल्हा जलाते हैं। इस बारे में लोगों का कहना है कि जब तक जंगल के किनारे रहने वाले सभी परिवारों को ईधन का विकल्प नहीं मिल जाता तब तक इस तरह की घटनाएं होती रहेंगी। प्रशासन को इसके लिए प्रयास करना चाहिए। वहीं ग्रामीणों को भी टाइगर रिजर्व के महत्व को समझाते हुए अपनी व्यवस्था करनी होगी।
As posted in Amarujala.com
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