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पीलीभीत टाइगर रिज़र्व में बाघों के रक्षक ही बन गए भक्षक

पीलीभीत टाइगर रिज़र्व में बाघों के रक्षक ही बन गए भक्षक

Apr 4, 2015

पीलीभीत : एक तरफ देश भर के टाइगर रिजर्व में लुप्तप्राय बाघों की संख्या में इजाफा हो रहा है, वहीं तराई के पीलीभीत टाइगर रिजर्व में बाघों की संख्या में निरंतर घटती जा रही है। खास बात यह है कि यहां पर बाघों के शिकार के मामले में महकमे से जुड़़े लोगों की भूमिका पर ही सवाल उठ रहे हैं। बाघ अंग तस्करी मामले में एक वन दरोगा को सस्पेंड किया जा चुका है, जबकि एक निरक्षक टाइगर रिजर्व कार्यालय से सबंद्ध कर उसकी भूमिका की जांच चल रही है। इधर, संपूर्णानगर में एक वाचरमैन की लटकी मिली लाश के मामले में हत्या की पुष्टि होने के बाद सीधे रेंजर पर अंगुली उठी है। यह भी आशंका व्यक्त की जा रही है कि हो सकता है किसी राज को छिपाने के लिए वाचर मैन की हत्या कराई गई हो। अमूमन जंगल का राजा बाघ तराई बेल्ट में पाया जाता है, जो उनके रहने के लिए मुफीद माना जाता है। देहरादून से लेकर बिहार तक बाघों की आमद है। नेपाल सीमा सटी होने की वजह से बाघों की मौजूदगी पर संकट के बादल मंडराते रहते हैं।

इंटरनेशनल सीमा लगी होने की वजह से बाघों का आसानी से शिकार हो जाता है, जिसमें आसपास के गांवों के लोग ही शामिल रहते हैं। जनवरी महीने में नेपाल के कंचनपुर में गभिया सहराई निवासी दुलाल मंडल से पूछताछ में गंभीर जानकारी मिली है। उसने पीलीभीत टाइगर रिजर्व की बराही रेंज से चार बाघों को मारने की बात कही थी। इस पर यूपीएसटीएफ, डब्ल्यूसीसीबी के साथ टाइगर रिजर्व के कर्मचारियों ने आबादी वाले क्षेत्रों में छापामार कार्रवाई की थी। इस दौरान एक दर्जन से अधिक शिकारियों को गिरफ्तार कर जेल भेजा गया। बाघ खाल व हड्डी तस्करी मामले में बराही रेंज के वन दारोगा शिवपाल व वनरक्षक सियाराम का नाम प्रकाश में आया। इन दोनों ने शिकारियों से मोबाइल से बातें की थी, जो सर्विलांस में पकड़ में आई। इसके बाद वन दारोगा को वन संरक्षक कार्यालय बरेली से संबद्ध कर दिया गया, जिसे बाद में वन संरक्षक वीके चोपड़ा ने उसे निलंबित कर दिया। मगर वनरक्षक के मामले में टाइगर रिजर्व प्रशासन कार्रवाई करने के मूड में नहीं लग रहा है, जबकि शिकारियों को जेल भेजने में ज्यादा तेजी दिखाई। बाघ हत्या मामले में वन कर्मियों की संलिप्तता से यही कहा जा सकता है कि बाघों के रक्षक ही भक्षक बन गए हैं। उप प्रभागीय वनाधिकारी पूरनपुर डीपी सिंह का कहना है कि वनरक्षक के मामले में एसटीएफ से जानकारी नहीं मिली है। एसटीएफ से जानकारी मिलने के बाद कार्रवाई अमल में लाई जाएगी। अभी तक मिली जानकारी में आरोप स्पष्ट नहीं हो रहे हैं। उन्होंने बताया कि शिकारियों के पकड़े जाने के बाद जंगल गश्त तेज कर दी गई है।

बाघों की संख्या में आई गिरावट

अभी पीलीभीत टाइगर रिजर्व एक साल का भी नहीं हुआ है, लेकिन टाइगर रिजर्व में बाघों की संख्या बढ़ने के बजाय घटती जा रही है। चार साल पहले बाघ गणना में 40 से अधिक बाघ पाए गए थे, जो घटना वर्ष 2014 में 30 रह गए। इस पर टाइगर रिजर्व प्रशासन ने मंथन करना भी उचित नहीं समझा। सिर्फ अपनी पीठ थपथपाने में जुटा हुआ है।

बाघों को बचाने के लिए नहीं है स्टाफ

पीलीभीत टाइगर रिजर्व में बाघों की कभी अच्छी खासी संख्या होती थी, लेकिन बीते कुछ सालों से बाघों की संख्या घटती जा रही है। इसकी खास वजह है कि स्टाफ का ना होना। वर्तमान समय में सौ से अधिक वन दारोगा व वनरक्षकों की कमी है। इस कमी को राज्य सरकार ने दूर नहीं किया है। इस वजह से बाघों को बचाने में वन कर्मी सफल नहीं हो पा रहे हैं।

As posted in Jagran.com
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