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दबंगों के आगे पीलीभीत टाइगर रिज़र्व का जंगलात महकमा असहाय

दबंगों के आगे पीलीभीत टाइगर रिज़र्व का जंगलात महकमा असहाय

Jun 12, 2015

पीलीभीत : जंगल में चोरी छिपे पेड़ काटने का मामला हो या शिकार का। दबंग लोगों के सामने वन विभाग के कर्मी असहाय हो जाते हैं। पीलीभीत टाइगर रिजर्व बने साल भर पूरा हो गया लेकिन इसके नियमों का पालन नहीं हो पा रहा है। बगैर अनुमति लोग जंगल में घुस जाते हैं। वन कर्मचारी गश्त के दौरान ऐसे लोगों को पकड़ने का प्रयास करते हैं तो उन्हें विरोध का सामना करना पड़ता है। कई रसूखदार लोग तो अपनी मनमानी करके ही मानते हैं। पीलीभीत टाइगर रिजर्व बनने के बाद बगैर पूर्व अनुमति के जंगल में प्रवेश पर मनाही है। जंगल में घूमने के लिए जाने वालों को पहले से ही अनुमति लेनी अनिवार्य है। साथ ही यह भी दर्शाना पड़ता है कि वे जंगल के किस हिस्से में और क्यों जाना चाहते हैं। कितनी देर रुकेंगे और किस मार्ग से जाएंगे। नियम के अनुसार जिस मार्ग से प्रवेश किया जाता है, उसी से पर्यटक को वापस भी लौटना पड़ता है। वाहन का नंबर भी लिखाना होता है। उसका शुल्क लिया जाता है। मगर ये सब नियम अभी कागजों पर ही चल रहे हैं। लोग जब मन में आया, जंगल में प्रवेश करके घूमने लगते हैं। कई बार तो शिकारी अपना काम कर जाते हैं और वन कर्मियों को भनक तक नहीं लगती। किसी को अगर कभी पकड़ भी लिया तो रसूखदार लोगों की सिफारिशें आना शुरू हो जाता है। जंगल में अनाधिकृत रूप से घुसने वाले लोगों और वन कर्मियों के बीच मारपीट की घटनाएं पहले भी होती रही हैं। मगर इस पर सख्ती से अंकुश फिर भी नहीं लग पा रहा है।

ताजा उदाहरण सपा नेता और उनके साथियों की मनमानी का है। उधर, घटना में घायल हुए सपा नेता जिला पंचायत सदस्य मोहम्मद मियां उर्फ छोटे खां ने भी मामले की तहरीर पुलिस को दी है। इसमें उन्होंने कहा कि दो दिनों के लिए चूका स्पाट व बराही गेस्टहाउस को बुक कराया था। जब वे लोग वहां पहुंचे तो वन कर्मचारी शराब पी रहे थे। गेस्टहाउस खाली करने के लिए कहने पर गाली-गलौच करने लगे। तब वह परिवार के लोगो के साथ बराही गेस्टहाउस चले गए। वहां रेंजर व वन दरोगा और वन रक्षकों के समेत 15-20 लोग आ गए। उन्होंने हमला कर दिया। इसमें वह स्वयं और अन्य कई लोग घायल हुए। मारपीट के दौरान वन कर्मियों ने महिलाओं से जेवर व पांच हजार रुपये भी लूट लिए। डीएफओ कैलाश प्रकाश का कहना है कि पीलीभीत टाइगर रिजर्व बनने के बाद नियम कड़े हो गए हैं। इनका पालन कराने का प्रयास लगातार किया जा रहा है। जंगल में घूमने वाले लोगों के लिए रास्ते तय हो चुके हैं। अगर लोग उन नियमों का पालन नहीं करेंगे तो उनके खिलाफ कार्रवाई होगी।

 

 

As posted in Jagran.com

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