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पीलीभीत में गोमती नदी के रास्ते में हो गए कब्जे

पीलीभीत में गोमती नदी के रास्ते में हो गए कब्जे

Apr 23, 2014

पीलीभीत: राजधानी लखनऊ की लाइफ कही जाने वाली गोमती नदी अपने उद्गम स्थल वाले जिले में ही उपेक्षित है। नदी के रास्ते में कई जगह कब्जे हो गए हैं। इससे नदी का पानी आगे नहीं बढ़ पाता है। वहीं नदी की धारा को अविरल बहने के लिए बनाई गई योजना भी अब तक परवान नहीं चढ़ सकी है। लखनऊ की शान बढ़ाने वाली गोमती नदी माधोटांडा के फुल्हर झील से निकली है। गर्मी में झील सूख जाती है लेकिन पानी अविरल बहता रहे। इसके लिए प्रशासन ने वहां पर सौर ऊर्जा का पंप लगा दिया है। इससे पानी चलता रहता है। यह नदी पीलीभीत 23 गांवों से होकर गुजरती है। लेकिन नदी के रास्ते में पड़ने वाले कुछ गांव इसके लिए बाधक बन गए हैं। नदी की जमीन पर गांव औरैया कला, हरीपुर, घाटमपुर, गोमती गुरुद्वारा, नुकुटहाई, केशवपुर आदि गांवों में कब्जे हो गए हैं।

कुछ गांव के लोग नदी की जमीन पर खेती कर रहें है तो कुछ घर बना लिए हैं। ऐसे में यहां पर नदी नाले के स्वरूप में तब्दील हो गई हैं। प्रशासन ने एक बार कब्जा हटाने का प्रयास किया लेकिन अब भी काफी हिस्से पर कब्जा है। इसके आगे घुंघचाई क्षेत्र में इकोहत्तर नाथ मंदिर के पास नदी का पानी ठहरा हुआ है। इससे इसमें जलकुंभी हो गई है। इसकी सफाई की जरूरत है लेकिन किसी ने अब तक सुध नहीं ली है।

परवान नहीं चढ़ी योजना

नदी की धारा अविरल बहाने के लिए हरदोई ब्रांच नहर से पानी देने की योजना तैयार की गई थी। वहीं मनरेगा से इसकी खुदाई कराने को करोड़ों रुपया बर्बाद किया गया। इसके बाद भी नदी की धारा को अविरल नहीं बनाया जा सका। क्षेत्रीय लोगों का कहना है कि जनप्रतिनिधियों को नदी के उद्धार के लिए सार्थक प्रयास करने चाहिए। विधायक पीतमराम ने बताया कि नदी अविरल बढ़े इसके लिए प्रयास कर रहे हैं। इसके लिए फिर से प्रोजेक्ट तैयार करवाया जाएगा।

 

As posted in Jagran.com

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